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हरियाणा में 816 आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों की सेवाएं तीन दिन में होंगी समाप्त
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चंडीगढ़ । हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 816 आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों की सेवाएं तीन दिन में समाप्त हो जाएंगी। मौलिक शिक्षा निदेशक नितिन यादव ने मंगलवार को इस संबंध में सभी डीईईओ को आदेश जारी कर दिए। तीन दिन में सभी शिक्षकों को हटाकर डीईईओ को रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी।
ये शिक्षक पूर्व हुड्डा सरकार में भर्ती हुए थे। बीते नवंबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकी भर्ती रद्द कर दी थी। वर्ष 2006 में निकली इनकी भर्ती में साक्षात्कार को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। यमुनानगर निवासी सचिन गर्ग और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि 2006 में हरियाणा सरकार ने आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक के 816 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। विज्ञापन में लिखा था कि परीक्षा के अतिरिक्त 25 अंक का साक्षात्कार होगा। इसके बाद नियम बदला गया कि पदों से चार गुणा आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, फिर निर्णय लिया गया कि 60 प्रतिशत से अधिक अंक वाले ही बुलाए जाएंगे। बार-बार होते संशोधनों के चलते इस भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
एकल पीठ ने 2015 में भर्ती खारिज करते हुए कहा था कि भर्ती के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते। हाईकोर्ट ने कहा था कि पूरी प्रक्रिया देखकर स्पष्ट होता है कि नियुक्तियां तय नियमों के तहत नहीं हुई और माना था कि कई अयोग्य लोग भी चयनित किए गए हैं। चयनित शिक्षकों ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। 10 नवंबर 2020 को हाईकोर्ट ने इन सभी शिक्षकों को हटाने के आदेश जारी किए थे, लेकिन अभी तक इनको नहीं हटाया गया था।
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ये शिक्षक पूर्व हुड्डा सरकार में भर्ती हुए थे। बीते नवंबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकी भर्ती रद्द कर दी थी। वर्ष 2006 में निकली इनकी भर्ती में साक्षात्कार को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। यमुनानगर निवासी सचिन गर्ग और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि 2006 में हरियाणा सरकार ने आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक के 816 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। विज्ञापन में लिखा था कि परीक्षा के अतिरिक्त 25 अंक का साक्षात्कार होगा। इसके बाद नियम बदला गया कि पदों से चार गुणा आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, फिर निर्णय लिया गया कि 60 प्रतिशत से अधिक अंक वाले ही बुलाए जाएंगे। बार-बार होते संशोधनों के चलते इस भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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एकल पीठ ने 2015 में भर्ती खारिज करते हुए कहा था कि भर्ती के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते। हाईकोर्ट ने कहा था कि पूरी प्रक्रिया देखकर स्पष्ट होता है कि नियुक्तियां तय नियमों के तहत नहीं हुई और माना था कि कई अयोग्य लोग भी चयनित किए गए हैं। चयनित शिक्षकों ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। 10 नवंबर 2020 को हाईकोर्ट ने इन सभी शिक्षकों को हटाने के आदेश जारी किए थे, लेकिन अभी तक इनको नहीं हटाया गया था।
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