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21वीं सदी की चुनौतियां अलग, सीबीएसई कर रहा पाठयक्रम में बदलाव: अनिता करवाल
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चंडीगढ़। सीबीएसई की ओर से छात्रों को 21वीं सदी में पेश आने वाली चुनौतियों के लिए हर प्रकार से तैयार करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, इसलिए लगातार शिक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव भी किए जा रहे हैं। यह कहना है सेंट्रल बोर्ड सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की चेयरपर्सन अनिता करवाल का। साल 2021 में होने वाले प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट्स असेस्मेंट (पीसा) की परीक्षा को लेकर अनीता करवाल ने सोमवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-40 स्थित डीपीएस में शिक्षा सचिव बीएल शर्मा और प्रिंसिपल्स के साथ बैठक की। बैठक में पीसा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें स्कूल के प्रिंसिपल, गणित, विज्ञान और भाषा शिक्षकों के लिए एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इसमें 302 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान बैठक में सीबीएसई शिक्षाविद और प्रशिक्षण के निदेशक डॉ. जोसेफ इमैनुएल, डीएसई रुबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा विभाग चंडीगढ़ के अन्य प्रमुख अधिकारियों के अतिरिक्त सीबीएसई के उप सचिव मौजूद रहे।
पीसा की तैयारी को लेकर तैयार किया खाका : बीएल शर्मा
अनीता करवाल ने स्कूल के पाठ्यक्रम में बहुत जरूरी बदलाव लाने के लिए सीबीएसई द्वारा की गई विभिन्न पहलों के बारे में भी बात की। इस कार्यक्रम के दौरान एजुकेशनल करिकुलम में नई योजनाएं लागू करने पर जोर दिया गया। वहीं वक्ताओं ने क्लास में छात्रों को प्रैक्टिकल करते हुए या अन्य अनुभवों के आधार पर शिक्षित करने को कहा। खुद प्रैक्टिस करके सीखने से तथ्य बच्चों को अधिक देर तक याद रहते हैं। इस दौरान पीसा की कमेटी की ओर से प्रेजेंटेशन भी दी गई। शिक्षा सचिव बीएल शर्मा ने इस तरह के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि पीसा 2021 के लिए तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। इस दौरान दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रीमा दीवान ने सीबीएसई और यूटी के शिक्षा विभाग को इस तरह के आयोजन का अवसर देने के लिए प्रशासन का धन्यवाद किया।
क्या है ‘पीसा’
पीसा टेस्ट से विश्व भर के विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट में छात्रों द्वारा स्कोर किए गए अंकों से राष्ट्रीय औसत स्कोर निकाला जाता है। इस टेस्ट का उद्देश्य देशों की रैंकिंग निश्चित करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि किस प्रकार देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है। इस टेस्ट में देश के विभिन्न हिस्सों से 15 साल 3 महीने से 16 साल 2 महीने के बीच के बच्चों को भाग लेने के लिए भेजा जाता है। यह टेस्ट ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) द्वारा हर तीन साल बाद कराया जाता है। इसमें लगभग 80 देश भाग लेते हैं।
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पीसा की तैयारी को लेकर तैयार किया खाका : बीएल शर्मा
अनीता करवाल ने स्कूल के पाठ्यक्रम में बहुत जरूरी बदलाव लाने के लिए सीबीएसई द्वारा की गई विभिन्न पहलों के बारे में भी बात की। इस कार्यक्रम के दौरान एजुकेशनल करिकुलम में नई योजनाएं लागू करने पर जोर दिया गया। वहीं वक्ताओं ने क्लास में छात्रों को प्रैक्टिकल करते हुए या अन्य अनुभवों के आधार पर शिक्षित करने को कहा। खुद प्रैक्टिस करके सीखने से तथ्य बच्चों को अधिक देर तक याद रहते हैं। इस दौरान पीसा की कमेटी की ओर से प्रेजेंटेशन भी दी गई। शिक्षा सचिव बीएल शर्मा ने इस तरह के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि पीसा 2021 के लिए तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। इस दौरान दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रीमा दीवान ने सीबीएसई और यूटी के शिक्षा विभाग को इस तरह के आयोजन का अवसर देने के लिए प्रशासन का धन्यवाद किया।
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क्या है ‘पीसा’
पीसा टेस्ट से विश्व भर के विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट में छात्रों द्वारा स्कोर किए गए अंकों से राष्ट्रीय औसत स्कोर निकाला जाता है। इस टेस्ट का उद्देश्य देशों की रैंकिंग निश्चित करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि किस प्रकार देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है। इस टेस्ट में देश के विभिन्न हिस्सों से 15 साल 3 महीने से 16 साल 2 महीने के बीच के बच्चों को भाग लेने के लिए भेजा जाता है। यह टेस्ट ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) द्वारा हर तीन साल बाद कराया जाता है। इसमें लगभग 80 देश भाग लेते हैं।
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