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फ्लैग: स्कूल बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन का मामला
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स्कूल बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी संचालन का मामला
फट गया था स्वीमिंग पूल का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
- बीमारी का शिकार होने से बचे दो दर्जन से अधिक लोग
- स्वीमिंग पूल निर्माण में भी बरती गईं थीं कई अनियमितताएं
- घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने करवाया था पूल को ठीक
अवधेश शुक्ला
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया है कि सेक्टर-12 स्थित नामचीन स्कूल में बिना अप्रवूल के बने स्वीमिंग पूल का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी फट गया था। घटना का मुख्य कारण ट्रीटमेंट प्लांट की क्वालिटी का ठीक न होना था। प्लांट फटने के बाद स्वीमिंग का पानी पूरी तरह दूषित हो गया था, लेकिन समय पर पता चलने के कारण प्लांट को ठीक करवाया दिया गया और लोग बीमारी की चपेट में आने से बच गए थे। यदि प्लांट के फटने का समय पर पता न चलता तो यहां आने वाले लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते थे। वहीं, जांच अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के दौरान स्कूल प्रबंधन की ओर से कई तरह की अनियमितताएं बरतीं गई थीं। हालांकि एक एक्सपर्ट के सुझाव पर खामियों को दूर कर लिया गया था। यदि कमियों को ठीक न किया जाता तो स्वीमिंग के दौरान जान भी जा सकती थी।
16 फीट से ज्यादा गहरा था स्वीमिंग पूल
सेक्टर-12 स्थित स्कूल में बने स्वीमिंग पूल की गहराई 16 फीट से भी ज्यादा थी। जबकि नियमानुसार किसी भी स्कूल के अंदर बने स्वीमिंग पूल की गहराई साढ़े छह से लेकर सात फीट से ज्यादा नहीं हो सकती। क्योंकि स्कूल के स्वीमिंग पूल का प्रयोग बच्चे ही करते हैं। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने बाहरी लोगों से मोटी कमाई करने के लिए स्वीमिंग पूल की गहराई 16 फीट कर रखी थी। लेकिन, एक्सपर्ट के सुझाव के बाद पूल की गहराई को करीब साढ़े छह से सात फीट कम कर दिया गया।
ठेकेदार ने जताई थी गहराई पर आपत्ति
जानकारी यह भी मिली है कि सेक्टर-12 के स्कूल में बने स्वीमिंग पूल को जब स्कूल प्रबंधन ने ठेके पर देने के लिए शहर के एक ठेकेदार को बुलाया था तो उसने भी पूल नियमानुसार न बने होने के कारण ठेके पर लेने से साफ मनाकर दिया था। ठेकेदार ने साफ कहा था कि इतनी गहराई में बच्चों की तो दूर किसी नौजवान युवक भी जान जा सकती है। क्योंकि गर्मियों के दिनों में स्वीमिंग पूल में अधिकांश ऐसे लोग आते हैं जिन्हें तैरना नहीं आता है। ऐसे में पैर फिसलने से बड़ी घटना हो सकती थी।
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बेसमेंट में नहीं लग सकती क्लासें : एसएस मलिक
फायर स्टेशन के प्रभारी एसएस मलिक का कहना है कि सेफ्टी नियमों के मुताबिक किसी भी स्कूल के बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन नहीं हो सकता है। यदि कोई स्कूल संचालक बेसमेंट में क्लास या फिर कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन करता है तो वह गलत है। उसे इसके लिए फायर विभाग से परमिशन लेनी होती है। यदि कोई निजी संचालक बेसमेंट में कामर्शियल एक्टिविटी कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वह मंगलवार को टीम के साथ स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे।
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फट गया था स्वीमिंग पूल का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
- बीमारी का शिकार होने से बचे दो दर्जन से अधिक लोग
- स्वीमिंग पूल निर्माण में भी बरती गईं थीं कई अनियमितताएं
- घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने करवाया था पूल को ठीक
अवधेश शुक्ला
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया है कि सेक्टर-12 स्थित नामचीन स्कूल में बिना अप्रवूल के बने स्वीमिंग पूल का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी फट गया था। घटना का मुख्य कारण ट्रीटमेंट प्लांट की क्वालिटी का ठीक न होना था। प्लांट फटने के बाद स्वीमिंग का पानी पूरी तरह दूषित हो गया था, लेकिन समय पर पता चलने के कारण प्लांट को ठीक करवाया दिया गया और लोग बीमारी की चपेट में आने से बच गए थे। यदि प्लांट के फटने का समय पर पता न चलता तो यहां आने वाले लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते थे। वहीं, जांच अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के दौरान स्कूल प्रबंधन की ओर से कई तरह की अनियमितताएं बरतीं गई थीं। हालांकि एक एक्सपर्ट के सुझाव पर खामियों को दूर कर लिया गया था। यदि कमियों को ठीक न किया जाता तो स्वीमिंग के दौरान जान भी जा सकती थी।
16 फीट से ज्यादा गहरा था स्वीमिंग पूल
सेक्टर-12 स्थित स्कूल में बने स्वीमिंग पूल की गहराई 16 फीट से भी ज्यादा थी। जबकि नियमानुसार किसी भी स्कूल के अंदर बने स्वीमिंग पूल की गहराई साढ़े छह से लेकर सात फीट से ज्यादा नहीं हो सकती। क्योंकि स्कूल के स्वीमिंग पूल का प्रयोग बच्चे ही करते हैं। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने बाहरी लोगों से मोटी कमाई करने के लिए स्वीमिंग पूल की गहराई 16 फीट कर रखी थी। लेकिन, एक्सपर्ट के सुझाव के बाद पूल की गहराई को करीब साढ़े छह से सात फीट कम कर दिया गया।
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ठेकेदार ने जताई थी गहराई पर आपत्ति
जानकारी यह भी मिली है कि सेक्टर-12 के स्कूल में बने स्वीमिंग पूल को जब स्कूल प्रबंधन ने ठेके पर देने के लिए शहर के एक ठेकेदार को बुलाया था तो उसने भी पूल नियमानुसार न बने होने के कारण ठेके पर लेने से साफ मनाकर दिया था। ठेकेदार ने साफ कहा था कि इतनी गहराई में बच्चों की तो दूर किसी नौजवान युवक भी जान जा सकती है। क्योंकि गर्मियों के दिनों में स्वीमिंग पूल में अधिकांश ऐसे लोग आते हैं जिन्हें तैरना नहीं आता है। ऐसे में पैर फिसलने से बड़ी घटना हो सकती थी।
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बेसमेंट में नहीं लग सकती क्लासें : एसएस मलिक
फायर स्टेशन के प्रभारी एसएस मलिक का कहना है कि सेफ्टी नियमों के मुताबिक किसी भी स्कूल के बेसमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन नहीं हो सकता है। यदि कोई स्कूल संचालक बेसमेंट में क्लास या फिर कॉमर्शियल एक्टिविटी का संचालन करता है तो वह गलत है। उसे इसके लिए फायर विभाग से परमिशन लेनी होती है। यदि कोई निजी संचालक बेसमेंट में कामर्शियल एक्टिविटी कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वह मंगलवार को टीम के साथ स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे।