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सजा पाया नाइजिरियन बरी

Fri, 21 Jul 2017 02:11 AM IST
Updated Fri, 21 Jul 2017 02:11 AM IST
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सजा पाया नाइजिरियन बरी
निचली अदालत से नाइजीरियन को मिली थी सजा, ऊपरी ने किया बरी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
देश में अवैध रूप से रहने के मामले में निचली कोर्ट से सजा पाए नाइजीरियन मूल के डेविड ओटोकहाइव की आपराधिक अपील पर एडीजे कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। डेविड के खिलाफ 2008 में केस दर्ज हुआ था। निचली कोर्ट से डेविड को 8 मई 2014 को दो साल अधिकतम की सजा सुनाई गई थी।
अगस्त 2008 में डेविड चंडीगढ़ में पढ़ाई के सिलसिले में आया था। उस समय उसके पास देश में रहने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे। उसने फॉरनर एक्ट के तहत फॅारनर रजिस्ट्रेशन आफिस में 2002 के बाद से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। डेविड भारत में 1998 में आया था। उसके पास जुलाई 2002 तक का रजिस्ट्रेशन था। इसके बाद का डेविड ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। यह भारत सरकार के फॉरनर एक्ट के खिलाफ है। साथ ही देश में अवैध तरीके से रहने पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी की भी धारा दर्ज की गई थी। निचली अदालत ने उसे उक्त धाराओं के दर्ज केस में दोषी पाते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।
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इस सजा के खिलाफ डेविड ने ऊपरी अदालत में आपराधिक अपील दायर की थी। इसमें उसका कहना था कि उसे केस में झूठा फंसा गया है। उसके अनुसार जांच करने वाली एजेंसी ने केस की जांच सही तरीके से नहीं की थी। इसमें मुख्य आरोपी कांस्टेबल अजीत सिंह को शामिल ही नहीं किया गया था। उसके अनुसार वह भारत में वैध वीजा और पासपोर्ट के साथ 3 जुलाई 1998 में आया था। उसने जून 1999 में पटियाला एसएसपी आफिस में फॉरनर्स रजिस्ट्रेशन के तहत रजिस्टर कराया था। उसे रेजिडेंशियल परमिट मिला हुआ था जो समय-समय पर कार्यालय से एक्सटेंड होता रहता था। उसने देश के रहने के लिए समय पर कागजात कार्यालय में कार्यरत हेड कांस्टेबल अजीत सिंह को सौंप दिए थे। हालांकि उसे नहीं पता था कि उसका वहां ट्रांसफर हो चुका है। अजीत सिंह अवैध तरीके से उसके रहने का परमिट जारी करता था। उसे नहीं पता था कि वह अवैध है।
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6 अगस्त 2008 को वह चंडीगढ़ आया तो उसे अवैध परमिट होने पर गिरफ्तार कर लिया गया। अपील में उसका कहना था कि वह खुद समय समय पर एफआरओ कार्यालय में परमिट रजिस्ट्रेशन के लिए जाता था, लेकिन अजीत सिंह वहां से ट्रांसफर होने के बावजूद उससे पैसे लेकर उसे दस्तावेज देता था। उसे नहीं पता था कि वह दस्तावेज अवैध हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार डेविड खिलाफ लुक आऊट सर्कुलर (एलओसी) जारी हुआ था। वहीं डेविड के अनुसार वह 2005 में अपने देश गया था और 2006 में वापस आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उसके खिलाफ सर्कुलर जारी हुआ था तो वह देश से बाहर जाने के बाद वापस कैसे आ गया। वहीं पुलिस ने मामले में अजीत सिंह को बचाते हुए उसे आरोपी नहीं बनाया। बहस के बाद अदालत ने डेविड को आरोपमुक्त करते हुए उसे बरी कर दिया।
- देश में अवैध तरीके से रहने का मामला
- निचली अदालत ने सुनाई थी दो साल की सजा
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