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किसान, मजदूर व महिलाओं को आंदोलन मजदूर करने की सौंपेंगे जिम्मेवारी
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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। धरने में शामिल किसानों से आह्वान किया कि अब गांवों में जनजागरण अभियान चलाकर महिलाओं के जत्थे तैयार किए जाएंगे। हर गांव में किसान, मजदूर व महिलाओं को आंदोलन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता बुजुर्ग किसान चेतराम औरंगाबाद ने की, जबकि मंच संचालन किशन चंद शर्मा ने किया।
किसान संघर्ष समिति के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जून को ‘किसान बचाओ लोकतंत्र बचाओ’ दिवस के रुप में घोषित किया है। आंदोलन को और तेज करने की तैयारी चल रही है। यह दिन संघर्ष के सात महीने पूरे होने का प्रतीक है। इस दिन भारत में आपातकाल के इतिहास की 46वीं वर्षगांठ भी है। आपातकाल ऐसा दौर था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
भाजपा के शासनकाल में देश अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है। इसी दौर में किसानों ने तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर रखा है। ब्लॉक समिति के सदस्य राजकुमार ओलिहान ने कहा कि ये देश के किसान ही हैं जो खरीद तो खुदरा में करता है तथा अपने उत्पाद की बिक्री थोक में करता है।
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केंद्र सरकार के तीनों कानून किसान व खेत मजदूरों पर घातक प्रहार हैं, ताकि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ ना मिल सके और मजबूरी में किसान अपनी जमीन पूंजीपतियों के हवाले कर दे। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तु संशोधन बिल लागू करके सरकार ने वस्तुओं की जमाखोरी को मान्यता दे दी है, जिससे हर वर्ग पर प्रभाव पड़ेगा।
धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, डॉ. रघुबीर सिंह, रमेश चंद गौड़ौता, डिगंबर हथाना, चंद्रमुनि धतीर, रोशनलाल अल्लिका, शमशेर पहलवान किठवाड़ी, भागीरथ बैनीवाल, राजेंद्र घर्रौट व चंदन सिंह ने संबोधित किया।
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किसान संघर्ष समिति के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जून को ‘किसान बचाओ लोकतंत्र बचाओ’ दिवस के रुप में घोषित किया है। आंदोलन को और तेज करने की तैयारी चल रही है। यह दिन संघर्ष के सात महीने पूरे होने का प्रतीक है। इस दिन भारत में आपातकाल के इतिहास की 46वीं वर्षगांठ भी है। आपातकाल ऐसा दौर था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
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भाजपा के शासनकाल में देश अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है। इसी दौर में किसानों ने तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर रखा है। ब्लॉक समिति के सदस्य राजकुमार ओलिहान ने कहा कि ये देश के किसान ही हैं जो खरीद तो खुदरा में करता है तथा अपने उत्पाद की बिक्री थोक में करता है।
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केंद्र सरकार के तीनों कानून किसान व खेत मजदूरों पर घातक प्रहार हैं, ताकि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ ना मिल सके और मजबूरी में किसान अपनी जमीन पूंजीपतियों के हवाले कर दे। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तु संशोधन बिल लागू करके सरकार ने वस्तुओं की जमाखोरी को मान्यता दे दी है, जिससे हर वर्ग पर प्रभाव पड़ेगा।
धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, डॉ. रघुबीर सिंह, रमेश चंद गौड़ौता, डिगंबर हथाना, चंद्रमुनि धतीर, रोशनलाल अल्लिका, शमशेर पहलवान किठवाड़ी, भागीरथ बैनीवाल, राजेंद्र घर्रौट व चंदन सिंह ने संबोधित किया।