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पराली और कूड़ा जलाने का सिलसिला नहीं रुक रहा

Fri, 30 Oct 2020 10:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2020 10:33 PM IST
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The process of burning stubble and garbage is not stopping
पलवल में सड़क पर जलता कूड़ा। - फोटो : Palwal
पराली और कूड़ा जलाने का सिलसिला नहीं रुक रहा
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पलवल। एक तरफ सड़कों पर कूड़ा जल रहा है वहीं खेतों में किसानों द्वारा पराली जलाई जा रही है। इससे जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हालांकि शुक्रवार को थोड़ी राहत रही और वायु गुणवत्ता सूचकांक 187 रिकॉर्ड किया गया। सड़कों पर चलते समय प्रदूषण के कारण आंखों में जलन होने लगती है और कई बार सांस लेने में भी तकलीफ होती है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि दम सा घुटने लगता है। ऐसा सड़कों पर कूड़ा जलाने से निकलने वाले धुएं के कारण हो रहा है। यही हाल गांवों व सड़कों के किनारे खेतों में पराली जलाने से हो रहा है।
पराली और कूड़ा नहीं जलाया जाए, इसके लिए कृषि विभाग और प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। यही कारण है कि जिले में पराली और कूड़ा जलाने की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है। स्थानीय लोग और सफाई कर्मचारी भी कूड़ा जला देते हैं। इस वजह से जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। बाहर निकलते ही स्मॉग दिखाई देने लगता है। यदि समय रहते इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो प्रदूषण कम होने के बजाय और अधिक बढ़ जाएगा।
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अक्तूबर में ऐसी रही स्थिति
नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गुरुग्राम जैसे महानगरों की तरह ही पलवल में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। महानगरों के मुकाबले बेशक प्रदूषण का स्तर कम है, लेकिन हवा में फैल रहे प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा है। जिले में एक अक्तूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक 132, दो को 143, तीन को 154, चार को 135, पांच को 130, छह को 140, सात को 148, आठ को 144, नौ को 137, 10 को 147, 11 को 120, 12 को 163, 13 को 180, 14 को 129 और 15 अक्तूबर को यह स्तर बढ़कर 225 हो गया। 16 अक्तूबर को 204, 17 को 239, 18 को 163, 19 को 155, 20 को 153, 22 को 227, 23 को 245, 24 को 228, 25 को 248, 26 को 263, 27 को 268 और 29 अक्तूबर को 203 दर्ज किया गया।
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विभाग की टीमें रोजाना खेतों में जाकर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक कर रही हैं। उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान और प्रदूषण स्तर बढ़ने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। कोशिश की जा रही है कि किसान पराली नहीं जलाएं।
- डॉ. महावीर मलिक, कृषि विकास अधिकारी पलवल

पलवल के एक गांव में पराली जलने से उठता धुआं।

पलवल के एक गांव में पराली जलने से उठता धुआं।- फोटो : Palwal

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