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लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसानों को मिले न्याय

Sun, 21 Nov 2021 10:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 10:21 PM IST
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The farmers of Lakhimpur Kheri massacre should get justice
पलवल। प्रधानमंत्री के कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले अनुसार किसान आंदोलन रविवार को भी पलवल अटोहां मोड़ पर जारी रहा। वेदप्रकाश सौरोत हथाना की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन किशनचंद शर्मा ने किया। धरने में किसानों ने केंद्र सरकार से मांग की कि किसान संगठनों से बातचीत करके एमएसपी पर कानून बनाया जाए तथा हजारों आंदोलनकारी किसानों व नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापिस लिए जाए,। लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसानों को न्याय देते हुए घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बिजली संशोधन बिल को रद्द करने व वायु प्रदूषण (जो किसानों के पराली जलाने से जुड़ा है) का भी तर्कसंगत समाधान किया जाए। धरने में फैसला किया कि 26 नवंबर को आंदोलन के एक साल पूरा होने पर पलवल किसान धरने पर चौपाई व रागिनी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें क्षेत्र के जानेमाने कलाकार भाग लेंगे।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने बताया कि कृषि कानूनों की वापसी से साफ हो जाता है कि दादागीरी या तानाशाही से कोई भी कानून पास कराना न्यायसंगत नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत गांधी का देश है, गांधी का रास्ता सत्य और अहिंसा पर आधारित था। किसानों ने गांधी के उसी अहिंसक सत्याग्रह के जरिए एक हिंसक और जिद्दी प्रशासन से जीत हासिल की है। गांधी ने कहा था कि अगर देश का अन्नदाता अनाज उगाना बंद कर दे तो किसानों की आलोचना करने वाले लोग क्या खाएंगे। भारत की धरती पर अंग्रेजों की हार की पटकथा भी विद्रोही किसानों से ही शुरु हुई थी। महात्मा गांधी का राजनैतिक जीवन भी किसान आंदोलन से ही शुरू हुआ था जब उन्होंने नील की खेती करने वाले किसानों को शोषण से मुक्ति दिलाई थी।
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किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान और धर्मचंद घुगेरा ने कहा कि यह एक साल किसान आंदोलन की जीत का साल रहा तो यही एक साल सरकार द्वारा किसानों को अपमानित करने का साल रहा। क्या देश के प्रधानमंत्री किसानों को उस समय नहीं जानते थे जब संसद में किसानों का मजाक उड़ाया जा रहा था। किसान लगातार कृषि कानूनों के नुकसान समझाते रहे तथा कहते रहे कि देश का किसान हर रोज गरीब होता जा रहा है लेकिन सरकार लगातार कहती रही कि कृषि कानून गरीब किसानों की भलाई के लिए बनाए गए हैं इसलिए किसानों ने तमाम अपमानों को सहकर यह जीत हासिल की है।
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धरने में किसान नेता सोहनपाल चौहान, छिद्दासिंह मरौली, विजेन्द्र शास्त्री, रघुबीर सिंह, भागीरथ बैनीवाल, राजेन्द्र घरौट, नरेंद्र सहरावत, ताराचंद, कल्लू गहलब, बीरसिंह दलाल, रोशनलाल, बीरसिंह चौहान, समयसिंह, बाबूराम सरपंच व जीतराम गढ़ी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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