अस्पताल खुद बीमार है: हड्डी टूटने पर हो रहे दर्द को खत्म करने की लिखी दवा कुछ और, थमा दी गईं पीसीएम की गोलियां
हरियाणा के पलवल जिले में स्थित सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं व दवाइयां न मिलने पर गांवों से लोग लंबी दूरी तय कर जिला नागरिक अस्पताल में आते हैं, ताकि वहां उन्हें सुविधाएं मिल जाएं, लेकिन यहां भी उन्हें सुविधाओं और दवाइयों के लिए भटकना पड़ता है।
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बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं तो दूर पलवल जिला नागरिक अस्पताल में लोगों को दवाइयां तक नहीं मिल रही हैं। हालात ये हैं कि चिकित्सक जो दवाइयां लिख रहे हैं, अस्पताल में मरीजों को उनमें से कोई दवा नहीं मिल रही है। अस्पताल के दवा केंद्र पर मरीजों को बुखार हो या हड्डी से संबंधित दर्द सभी को पीसीएम की गोलियां देकर भेजा रहा है। जिस कारण मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों में बेहद रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जिले में नागरिक अस्पताल दिखावा बनकर रह गया है। यहां सुनवाई करने वाला तक कोई नहीं है।
हरियाणा के पलवल जिले में स्थित सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं व दवाइयां न मिलने पर गांवों से लोग लंबी दूरी तय कर जिला नागरिक अस्पताल में आते हैं, ताकि वहां उन्हें सुविधाएं मिल जाएं, लेकिन यहां भी उन्हें सुविधाओं और दवाइयों के लिए भटकना पड़ता है। पिछले तीन-चार दिनों से भी जिला नागरिक अस्पताल में ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं। चिकित्सक मरीजों की जांच करने के बाद जो दवाइयां लिखता है, वह अस्पताल में स्थित दवा स्टोर पर मिलती ही नहीं है। जिस कारण मरीज भटकते फिरते हैं। मजबूरी में मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दरों में दवाइयां लेनी पड़ती हैं।
दवाइयां लिखीं पांच, थमा दी पीसीएम
चिकित्सक द्वारा बुखार व शरीर दर्द के मरीजों के लिए दवाइयां लिखी जाती हैं पांच, लेकिन दवा स्टोर पर मरीज को केवल पीसीएम (पैरासिटामोल) देकर वापिस भेज दिया जाता है। बाकी दवाई मांगने पर जवाब दवा खत्म होने का मिलता है। ऐसे में मरीज चीखते रहते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं करता। अब तो हालात ये हैं कि हड्डी रोग विशेषज्ञ ने एक मरीज को दवा लिखी, लेकिन दवा स्टोर पर उसे केवल पीसीएम की गोलियां थमा दी और कहा गया कि दर्द होने पर यह गोली खा लेना, बाकी बाहर से खरीद लेना।
मरीज करते हैं शोर, पर नहीं सुनता कोई
दवा पूरी न मिलने पर मरीज अस्पताल में शोर करते रहते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। दवा स्टोर पर शोर-शराबा करने के बाद मरीज वापिस लौट जाते हैं हर दिन अस्पताल में यही सिलसिला चल रहा है, लेकिन दवाइयों की पूर्ति की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
मैं आज अस्पताल में इलाज के लिए आई हूं। मुझे चिकित्सक ने चार दवाइयां लिखीं, लेकिन मुझे केवल पीसीएम की गोली दी गई। यहां तक की एलर्जी की गोली भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है कहकर मुझे वापिस भेज दिया गया है। मैं गरीब हूं। बाहर से दवा खरीद सकती तो सरकारी अस्पताल क्यों आती। -कमलेश, राजीव नगर
मुझे डॉक्टर ने जो दवाइयां लिखीं, उनमें से एक भी दवा अस्पताल में नहीं मिली। मुझे मजबूरी में वापिस जाना पड़ रहा है। अब दवाइयां बाहर से लेनी होंगी। बाहर से दवा लेने पर खर्च बढ़ जाता है। अस्पताल में दवाइयों का इंतजाम होना चाहिए। गरीब लोग कहां जाएंगे। -राजवती
अस्पताल में दवाइयों की कमी को पूरा किया जा रहा है। कई बार पीछे से दवा आने में देरी हो जाती है। उस कारण कमी होती है। फिर भी चिकित्सकों को मैंने बोल दिया है कि मरीज को वही दवा लिखें, जो अस्पताल में उपलब्ध हैं। ऐसी कोई दवा न लिखें, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। मरीजों की सुविधा व उपचार का पूरा ध्यान रखा जाता है। -नरेश गर्ग, जिला सिविल सर्जन पलवल