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Palwal News: मेवात लिंक चैनल योजना फाइलों में बहा, खेत पानी को तरसे
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2018 में हुआ था शिलान्यास, आठ साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी योजना
1.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से 65 फीसदी की सिंचाई बारिश पर निर्भर
नहर का पानी मिले तो साल में तीन फसल उपजा सकते हैं किसान
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात की प्यासी धरती को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित मेवात लिंक चैनल योजना आठ साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में सोनीपत से मेवात तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की योजना का शिलान्यास हुआ था। उम्मीद जगी थी कि इससे मेवात के किसानों की वर्षों पुरानी सिंचाई की समस्या खत्म होगी, लेकिन समय बीतता गया और योजना कागजों में ही उलझी रही।
नूंह जिले में करीब 1.15 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें लगभग 65 फीसदी क्षेत्र की सिंचाई आज भी बारिश पर निर्भर है। बारिश समय पर और पर्याप्त हो तो किसान फसल ले पाते हैं, वरना सूखे की स्थिति में उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो जाता है। जिले के बड़े हिस्से में सिंचाई के लिए नहरों का जाल नहीं होने के कारण किसान ट्यूबवेल और अन्य निजी संसाधनों पर निर्भर हैं।
रजवाहे और ड्रेन हैं, लेकिन सिंचाई की गारंटी नहीं
मेवात में कुछ रजवाहे और ड्रेन जरूर हैं, लेकिन इनसे पूरे जिले की सिंचाई व्यवस्था नहीं हो पाती। उजीना, चंदेनी और आकेड़ा ड्रेन मुख्य रूप से बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाई गई हैं। इनमें सिंचाई के लिए नियमित और पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। कई छोटे रजवाहों में भी वर्षों से किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया है। फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में स्थिति और गंभीर है। यहां सिंचाई के लिए नहर और रजवाहों का पर्याप्त नेटवर्क नहीं है। किसानों का कहना है कि कई इलाकों में भूजल काफी नीचे चला गया है और कुछ क्षेत्रों में पानी खारा होने के कारण खेती करना भी मुश्किल हो रहा है। खारे पानी से सिंचाई करने पर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं।
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पानी मिले तो बदल सकती है खेती की तस्वीर
मेवात की मिट्टी में कृषि की पर्याप्त संभावनाएं हैं। वर्तमान में पानी की उपलब्धता सीमित होने के कारण किसान मुख्य रूप से सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों पर निर्भर रहते हैं। किसानों का कहना है कि यदि नहर के जरिए पर्याप्त और नियमित मीठा पानी उपलब्ध हो जाए तो फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सकता है और किसान साल में दो से तीन फसल तक ले सकते हैं। इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय पर भी सीधा असर पड़ेगा।
किसानों का दुख
किसान नेता आजाद खेड़ी का कहना है कि मेवात की धरती उपजाऊ है, लेकिन पानी के अभाव में किसान अपनी पूरी क्षमता से खेती नहीं कर पा रहे हैं। यदि सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था हो जाए तो किसान वर्ष में तीन फसल तक ले सकते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बदल सकती है। किसान रणजीत नम्बरदार के मुताबिक, छोटे रजवाहों में पर्याप्त पानी नहीं आता। ऐसे में किसान मजबूरी में खारे भूजल का इस्तेमाल करते हैं, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। सरकार को मेवात की सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
कोट
2018 में भाजपा ने मेवात लिंक चैनल को लेकर खूब प्रचार किया था, पर वर्षों बाद भी योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। समस्या को लेकर विधानसभा में कई बार आवाज उठाई है। -आफताब अहमद, विधायक, नूंह
सरकार की ओर से रजवाहों और ड्रेन में पर्याप्त पानी छुड़वाया जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। मेवात लिंक चैनल को लेकर भी प्रयास चल रहा है। -जाकिर हुसैन, पूर्व विधायक
मामल उच्च स्तर पर पेंडिंग है। जैसे ही कोई आदेश आएगा तो कार्रवाई की जाएगी। -आफताब रहमान, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
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1.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से 65 फीसदी की सिंचाई बारिश पर निर्भर
नहर का पानी मिले तो साल में तीन फसल उपजा सकते हैं किसान
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात की प्यासी धरती को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित मेवात लिंक चैनल योजना आठ साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में सोनीपत से मेवात तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की योजना का शिलान्यास हुआ था। उम्मीद जगी थी कि इससे मेवात के किसानों की वर्षों पुरानी सिंचाई की समस्या खत्म होगी, लेकिन समय बीतता गया और योजना कागजों में ही उलझी रही।
नूंह जिले में करीब 1.15 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें लगभग 65 फीसदी क्षेत्र की सिंचाई आज भी बारिश पर निर्भर है। बारिश समय पर और पर्याप्त हो तो किसान फसल ले पाते हैं, वरना सूखे की स्थिति में उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो जाता है। जिले के बड़े हिस्से में सिंचाई के लिए नहरों का जाल नहीं होने के कारण किसान ट्यूबवेल और अन्य निजी संसाधनों पर निर्भर हैं।
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रजवाहे और ड्रेन हैं, लेकिन सिंचाई की गारंटी नहीं
मेवात में कुछ रजवाहे और ड्रेन जरूर हैं, लेकिन इनसे पूरे जिले की सिंचाई व्यवस्था नहीं हो पाती। उजीना, चंदेनी और आकेड़ा ड्रेन मुख्य रूप से बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाई गई हैं। इनमें सिंचाई के लिए नियमित और पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। कई छोटे रजवाहों में भी वर्षों से किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया है। फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में स्थिति और गंभीर है। यहां सिंचाई के लिए नहर और रजवाहों का पर्याप्त नेटवर्क नहीं है। किसानों का कहना है कि कई इलाकों में भूजल काफी नीचे चला गया है और कुछ क्षेत्रों में पानी खारा होने के कारण खेती करना भी मुश्किल हो रहा है। खारे पानी से सिंचाई करने पर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं।
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पानी मिले तो बदल सकती है खेती की तस्वीर
मेवात की मिट्टी में कृषि की पर्याप्त संभावनाएं हैं। वर्तमान में पानी की उपलब्धता सीमित होने के कारण किसान मुख्य रूप से सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों पर निर्भर रहते हैं। किसानों का कहना है कि यदि नहर के जरिए पर्याप्त और नियमित मीठा पानी उपलब्ध हो जाए तो फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सकता है और किसान साल में दो से तीन फसल तक ले सकते हैं। इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय पर भी सीधा असर पड़ेगा।
किसानों का दुख
किसान नेता आजाद खेड़ी का कहना है कि मेवात की धरती उपजाऊ है, लेकिन पानी के अभाव में किसान अपनी पूरी क्षमता से खेती नहीं कर पा रहे हैं। यदि सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था हो जाए तो किसान वर्ष में तीन फसल तक ले सकते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बदल सकती है। किसान रणजीत नम्बरदार के मुताबिक, छोटे रजवाहों में पर्याप्त पानी नहीं आता। ऐसे में किसान मजबूरी में खारे भूजल का इस्तेमाल करते हैं, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। सरकार को मेवात की सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
कोट
2018 में भाजपा ने मेवात लिंक चैनल को लेकर खूब प्रचार किया था, पर वर्षों बाद भी योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। समस्या को लेकर विधानसभा में कई बार आवाज उठाई है। -आफताब अहमद, विधायक, नूंह
सरकार की ओर से रजवाहों और ड्रेन में पर्याप्त पानी छुड़वाया जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। मेवात लिंक चैनल को लेकर भी प्रयास चल रहा है। -जाकिर हुसैन, पूर्व विधायक
मामल उच्च स्तर पर पेंडिंग है। जैसे ही कोई आदेश आएगा तो कार्रवाई की जाएगी। -आफताब रहमान, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग