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महिला दिवस: पिता की बाक्सिंग में रुचि देख बाक्सर बनीं प्रियंका तेवतिया
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पलवल में बच्चों को बाक्सिंग का प्रशिक्षण देतीं प्रियंका तेवतिया।
- फोटो : Palwal
पलवल (अनूप पाराशर)। मन में कुछ करने की चाह हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। यह कर दिया है पलवल के छोटे से गांव कंजरपुर की प्रियंका तेवतिया ने। पिता की बाक्सिंग के प्रति रुचि को देखते हुए प्रियंका ने अपने मन में बाक्सिंग के प्रति ऐसा जजबा भरा। जिसके बाद उसने बाक्सिंग में तीन नेशनल प्रतियोगिताएं जीतकर अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। छोटे से गांव से निकलकर बाक्सिंग जैसे खेल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा प्रियंका पलवल के ग्रामीण आंचल में रहने वाली लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस खेल विश्वविद्यालय पटियाला से बाक्सिंग कोच की डिग्री प्राप्त कर प्रियंका तेवतिया अब बच्चों को बाक्सिंग का प्रशिक्षण दे रही हैं।
जी-न्यूज द्वारा प्राइड आफ इंडिया अवार्ड से सम्मानित प्रियंका तेवतिया पढ़ाई के दौरान टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा से प्रभावित थी और टेनिस खिलाड़ी बनना चाहती थी। इसके लिए वह फरीदाबाद खेल स्टेडियम में अभ्यास करने भी जाती थी। लेकिन घर में पिता की बाक्सिंग के प्रति रुचि देखते हुए प्रियंका ने टेनिस खिलाड़ी बनने का सपना छोड़ दिया और कोच रमेश वर्मा से बाक्सिंग सीखनी शुरू कर दी। इसके बाद उसका स्पोर्ट्स अथ्योरिटी आफ इंडिया में चयन हो गया। आगे बढ़ने के लिए उसने भिवानी जाकर बाक्सिंग कोच और द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश चंद से बाक्सिंग की कोचिंग लेनी शुरू कर दी। प्रियंका ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के अलावा अलग-अलग तीन नेशनल प्रतियोगिताएं खेलीं, जिसमें उसने बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त किए।
भाई की मौत के बाद छूट गई थी बाक्सिंग
2016 जालंधर में हुई नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर जब वह पलवल पहुंची तो अपने स्वागत से वे इतनी गदगद हुई कि उनका बाक्सिंग के प्रति जुनून और बढ़ता चला गया। उसके बाद वह ओलंपिक में खेलने की तैयारी में जुट गई, लेकिन उसी दौरान उनके भाई देवा की मौत से वे इतनी आहत हुईं कि बाक्सिंग उनसे छूट सी गई। लेकिन अब एक बार फिर से अपने मन में बाक्सिंग का जुनून पैदा कर फिर से उठ खड़ी हुई है। अब प्रियंका ने अपने भाई देवा के नाम से बाक्सिंग अकादमी शुरू कर बच्चों को प्रशिक्षण दे रही है। प्रियंका बताती है कि विकट परिस्थितियों में उसके माता-पिता व भाई ने बाक्सिंग सीखने में उसका पूरा साथ दिया। उसे आगे बढ़ाने के लिए उसके पिता ने भरपूर प्रोत्साहित किया।
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पलवल से कोई खिलाड़ी ओलंपिक में जीते पदक
प्रियंका कहती है कि गांव अगवानपुर के पास देवा बाक्सिंग अकादमी शुरू की है। मेरा सपना है कि पलवल में खिलाड़ी बाक्सिंग में आगे आएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन करें। पलवल से कोई खिलाड़ी ओलंपिक में खेले। लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं।
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जी-न्यूज द्वारा प्राइड आफ इंडिया अवार्ड से सम्मानित प्रियंका तेवतिया पढ़ाई के दौरान टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा से प्रभावित थी और टेनिस खिलाड़ी बनना चाहती थी। इसके लिए वह फरीदाबाद खेल स्टेडियम में अभ्यास करने भी जाती थी। लेकिन घर में पिता की बाक्सिंग के प्रति रुचि देखते हुए प्रियंका ने टेनिस खिलाड़ी बनने का सपना छोड़ दिया और कोच रमेश वर्मा से बाक्सिंग सीखनी शुरू कर दी। इसके बाद उसका स्पोर्ट्स अथ्योरिटी आफ इंडिया में चयन हो गया। आगे बढ़ने के लिए उसने भिवानी जाकर बाक्सिंग कोच और द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश चंद से बाक्सिंग की कोचिंग लेनी शुरू कर दी। प्रियंका ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के अलावा अलग-अलग तीन नेशनल प्रतियोगिताएं खेलीं, जिसमें उसने बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त किए।
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भाई की मौत के बाद छूट गई थी बाक्सिंग
2016 जालंधर में हुई नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर जब वह पलवल पहुंची तो अपने स्वागत से वे इतनी गदगद हुई कि उनका बाक्सिंग के प्रति जुनून और बढ़ता चला गया। उसके बाद वह ओलंपिक में खेलने की तैयारी में जुट गई, लेकिन उसी दौरान उनके भाई देवा की मौत से वे इतनी आहत हुईं कि बाक्सिंग उनसे छूट सी गई। लेकिन अब एक बार फिर से अपने मन में बाक्सिंग का जुनून पैदा कर फिर से उठ खड़ी हुई है। अब प्रियंका ने अपने भाई देवा के नाम से बाक्सिंग अकादमी शुरू कर बच्चों को प्रशिक्षण दे रही है। प्रियंका बताती है कि विकट परिस्थितियों में उसके माता-पिता व भाई ने बाक्सिंग सीखने में उसका पूरा साथ दिया। उसे आगे बढ़ाने के लिए उसके पिता ने भरपूर प्रोत्साहित किया।
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पलवल से कोई खिलाड़ी ओलंपिक में जीते पदक
प्रियंका कहती है कि गांव अगवानपुर के पास देवा बाक्सिंग अकादमी शुरू की है। मेरा सपना है कि पलवल में खिलाड़ी बाक्सिंग में आगे आएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन करें। पलवल से कोई खिलाड़ी ओलंपिक में खेले। लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं।