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नोट नहीं होने के कारण घाटे का सौदा कर रहे हैं किसान

Wed, 16 Nov 2016 04:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 16 Nov 2016 04:57 PM IST
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Note the absence of farmers are losing proposition
पड़ा गेहूं - फोटो : अमर उजाला

बाजार में नोट नहीं मिल पाने के कारण किसान मंडी में घाटे का सौदा कर रहे हैं। किसानों को अपनी फसल को कम दाम में बेचना पड़ रहा है। किसानों को धान की फसल  2600 के बजाय 2100  रुपये तक में बेचनी पड़ रही है, जिससे किसानों को काफी घाटा हो रहा है। किसानों का कहना है कि रेट कम मिले तो कोई बात नहीं है। लेकिन दुकानदार उन्हें जो 1000 और 500 के नोट दे रहे हैं वो तो बंद हो चुके हैं। व्यापारी कहते हैं कि पीछे से जो नोट मिल रहे हैं, उन्हीं को दिया जा रहा है। वहीं मजदूरों की स्थिति भी कमतर नहीं है। उन्हें तो भूखे रहने तक की नौबत आ रही है। अनाज मंडी में इसी को लेकर आढ़तियों एवं किसानों तथा मजदूरों के बीच आए दिन बहस एवं आपसी कहासुनी भी हो जाती ही। 

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नोट बंदी से पहले फसल बेच चुके किसानों की भी कुछ ऐसी ही हालत है। हथीन मंडी में आए किसान सतपाल ने बताया कि उसने 15 एकड़ में खड़ी अपनी फसल बेच दी परंतु भुगतान के लाले पड़ रहे हैं आढ़तियों ने पूरे भुगतान के लिए ही हाथ खडे़ कर दिए हैं। किसानों ने जैसे-तैसे फसल तैयार की फिर उसे मंडी तक पहुंचाया लेकिन अब भुगतान के लिए तरसना पड़ रहा है। 
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किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या फसल बिजाई के मौसम को लेकर भी है। रबी फसलों की विशेषकर गेहूं की बिजाई का यही सीजन है। किसानों के सामने संकट यह है कि खाद, बीच व डीजल के लिए नगदी ही नहीं है जिस कारण किसानों में रोष बना हुआ है। मंडी के कुछ आढ़ती किसानों को पुरानी करेंसी से 500 व 1000 रुपये के करेंसी नोट दे रहे हैं जिन्हें चलाने के चक्कर में किसान चक्कर काट रहे हैं। 
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हालांकि सरकार ने व्यापारियों के लिए नगदी की सीमा पचास हजार रुपये तय कर दी है परंतु आढ़तियों को बैंकों से नगदी नहीं मिल रही है। बैंकों में पैसा नहीं आ रहा है। इस बारे में किसान असरूद्दीन खिल्लूका ने बताया कि आढ़तियों के यहां कई चक्कर लगा चुके हैं परंतु उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है। इस बारे में अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रविन कुमार का कहना है कि बैंकों से नगदी नहीं मिल रही इस कारण किसानों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।

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