{"_id":"6a9318203e70c866260352ff","slug":"50-mw-of-electricity-to-be-generated-from-waste-in-haryana-palwal-news-c-25-1-mwt1001-115007-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: हरियाणा में कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली, चार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए एमओयू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: हरियाणा में कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली, चार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए एमओयू
विज्ञापन
एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व
हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में लगेंगे संयंत्र
रोजाना 5 हजार टन कचरे का होगा वैज्ञानिक प्रसंस्करण, अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की उम्मीद
दिनेश देशवाल
नूंह। हरियाणा में बढ़ते शहरी कचरे की समस्या से निपटने और उसे ऊर्जा में बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए शनिवार को समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में स्थापित होने वाले इन संयंत्रों में प्रतिदिन करीब 5 हजार टन कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाएगा। इससे न्यूनतम 50 मेगावाट बिजली पैदा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि चारों संयंत्रों के अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की संभावना है।
नूंह में एमओयू कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कचरे को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे ऊर्जा और उपयोगी संसाधन में बदलना है। इन संयंत्रों की स्थापना ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा की जाएगी, जो ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। परियोजनाओं में आधुनिक और एकीकृत तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कचरे के पूर्व-प्रसंस्करण के बाद उसके प्रकार के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की व्यवस्था होगी, जबकि ऐसे सूखे कचरे का वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में प्रसंस्करण किया जाएगा, जिसका पुन: उपयोग या रिसाइकिल संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजनाओं को केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत वित्तीय सहायता मिलेगी। कुल पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकाय साझा करेंगे, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड लगाएगी।कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा तथा ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
हिसार क्लस्टर में 500 टन कचरे से 5 मेगावाट बिजली
पहला संयंत्र हिसार क्लस्टर में स्थापित होगा। इसमें हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। यहां प्रतिदिन 500 टन कचरे का प्रसंस्करण कर न्यूनतम 5 मेगावाट ऊर्जा पैदा करने की योजना है।
अंबाला क्लस्टर में 900 टन कचरे का प्रसंस्करण
दूसरा संयंत्र अंबाला क्लस्टर में लगाया जाएगा। इसमें अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। यहां रोजाना 900 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा और न्यूनतम 9 मेगावाट बिजली उत्पादन अपेक्षित है।
फरीदाबाद में 16 मेगावाट और गुरुग्राम में 20 मेगावाट क्षमता
फरीदाबाद क्लस्टर में प्रतिदिन 1600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा, जिससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है। वहीं, गुरुग्राम में सबसे अधिक क्षमता वाला संयंत्र स्थापित होगा। यहां रोजाना 2000 टन कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर न्यूनतम 20 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी।
विज्ञापन
रोजाना 5 हजार टन कचरे का होगा वैज्ञानिक प्रसंस्करण, अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की उम्मीद
दिनेश देशवाल
नूंह। हरियाणा में बढ़ते शहरी कचरे की समस्या से निपटने और उसे ऊर्जा में बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए शनिवार को समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में स्थापित होने वाले इन संयंत्रों में प्रतिदिन करीब 5 हजार टन कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाएगा। इससे न्यूनतम 50 मेगावाट बिजली पैदा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि चारों संयंत्रों के अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की संभावना है।
नूंह में एमओयू कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कचरे को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे ऊर्जा और उपयोगी संसाधन में बदलना है। इन संयंत्रों की स्थापना ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा की जाएगी, जो ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। परियोजनाओं में आधुनिक और एकीकृत तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कचरे के पूर्व-प्रसंस्करण के बाद उसके प्रकार के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की व्यवस्था होगी, जबकि ऐसे सूखे कचरे का वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में प्रसंस्करण किया जाएगा, जिसका पुन: उपयोग या रिसाइकिल संभव नहीं है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजनाओं को केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत वित्तीय सहायता मिलेगी। कुल पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकाय साझा करेंगे, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड लगाएगी।कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा तथा ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
हिसार क्लस्टर में 500 टन कचरे से 5 मेगावाट बिजली
पहला संयंत्र हिसार क्लस्टर में स्थापित होगा। इसमें हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। यहां प्रतिदिन 500 टन कचरे का प्रसंस्करण कर न्यूनतम 5 मेगावाट ऊर्जा पैदा करने की योजना है।
अंबाला क्लस्टर में 900 टन कचरे का प्रसंस्करण
दूसरा संयंत्र अंबाला क्लस्टर में लगाया जाएगा। इसमें अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। यहां रोजाना 900 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा और न्यूनतम 9 मेगावाट बिजली उत्पादन अपेक्षित है।
फरीदाबाद में 16 मेगावाट और गुरुग्राम में 20 मेगावाट क्षमता
फरीदाबाद क्लस्टर में प्रतिदिन 1600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा, जिससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है। वहीं, गुरुग्राम में सबसे अधिक क्षमता वाला संयंत्र स्थापित होगा। यहां रोजाना 2000 टन कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर न्यूनतम 20 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी।