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गृहकर की फर्जी रसीद काटकर जारी कर दी एनओसी, केस दर्ज

Tue, 05 Jan 2021 10:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 10:46 PM IST
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NOC issued after deducting fake receipt of house tax, case registered
गृहकर की फर्जी रसीद काटकर जारी कर दी एनओसी, केस दर्ज
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पलवल। नगर परिषद द्वारा गृहकर की फर्जी रसीद काटकर गलत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने का आरोप लगाते हुए अज्ञात के खिलाफ शहर थाने में केस दर्ज कराया गया है। सोमवार देरशाम दर्ज कराए गए मुकदमे के बाद जहां परिषद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं उन लोगों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है, जिन्होंने गलत एनओसी के आधार पर तहसील में जमीनों की रजिस्ट्रियां कराई हैं। इसे एक बड़े घोटाले के रूप में देखा जा रहा है। इसे लेकर अब विपक्षी नेता भी सक्रिय हो गए हैं। सरकार से जुड़े नेताओं व अधिकारियों पर हल्ला बोलने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं इस मामले में आरटीआई दाखिल करने वाले धर्मेंद्र दलाल का कहना है कि अधिकारियों ने खुद को फंसता देख केस दर्ज कराया है।
दरअसल, किठवाडी निवासी धर्मेंद्र दलाल ने नवंबर 2020 में जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत नगर परिषद से 6 अप्रैल 2016 से 20 अप्रैल 2016 के बीच जारी की गईं एनओसी का रिकॉर्ड मांगा था। रसीद संख्या 146 से 270 तक जारी एनओसी किस आधार पर दी गई, कितना शुल्क और गृहकर जमाया गया था, इस संबंध में सूचना मांगी थी। नगर परिषद द्वारा जवाब में बताया गया कि संबंधित रसीद बुक और रिकॉर्ड नगर परिषद से चोरी हो गए हैं। इस संदर्भ में कैंप थाने में केस दर्ज कराया गया है। जब धर्मेंद्र ने कैंप थाने से दर्ज मुकदमे का रिकॉर्ड मांगा तो पुलिस ने जवाब दिया कि नगर परिषद कार्यालय, कैंप थाना क्षेत्र में नहीं आता और न ही कोई शिकायत नगर परिषद द्वारा दी गई है। तब यह मुद्दा शहर में काफी छाया रहा था। ‘अमर उजाला’ ने भी 22 नवंबर 2020 के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसे लेकर धर्मेंद्र ने उच्च न्यायालय में केस दर्ज करने के साथ गृहमंत्री व मुख्यमंत्री से भी शिकायत की थी।
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अब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मलिक ने शहर थाने में केस दर्ज कराया है। शिकायत में बताया है कि अज्ञात लोगों ने नगर परिषद की गृहकर की फर्जी रसीद काटकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। लोगों से साथ धोखाधड़ी करने के साथ परिषद कार्यालय की छवि को धूमिल किया गया है। खास बात यह है कि शिकायत में न तो किसी तारीख, वर्ष या रसीद नंबरों का हवाला दिया है और न ही कोई और उल्लेख किया है।
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अब पुलिस करेगी जांच
पुलिस तहसील कार्यालय में उन लोगों का रिकॉर्ड भी जांचेगी, जिन्होंने फर्जी एनओसी के आधार पर रजिस्ट्रियां कराई हैं। यदि रसीद फर्जी पाई जाती हैं तो रजिस्ट्रियां कराने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। वहीं

परिषद के कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि परिषद द्वारा अपने स्तर पर भी जांच की जा रही है। जल्द ही दोषी का पता लगाकर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।
आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के बाद नगर परिषद अधिकारियों ने खुद को फंसता देख केस दर्ज कराया है। अधिकारी खुद को और बड़े नेताओं को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उच्च न्यायालय में भी सुनवाई हो रही है। सही जांच के बाद दोषियों के नाम सामने आएंगे।
- धर्मेंद्र दलाल, आरटीआई कार्यकर्ता
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