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अवैध तरीके से हो रहा भूजल दोहन, हर साल दो फीट नीचे गिर रहा जलस्तर
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पलवल में भूजल दोहन कर सर्विस स्टेशन लगा मोटरसाइकिलों की धुलाई कर पानी व्यर्थ में बहाते हुए
- फोटो : Palwal
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पलवल। जिले में अवैध तरीके से हो रहे भूजल दोहन के कारण भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है। यह गंभीर संकट को दावत दे रहा है। यदि जलस्तर इसी प्रकार गिरता रहा तो आने वाले वर्षों में लोगों का कंठ पानी के लिए तो तरसेगा ही, साथ-साथ सिंचाई के लिए पानी न मिलने से धरती की कोख भी सूखी रह जाएगी। रिकार्ड के अनुसार, जिले में हर साल करीब दो फीट पानी नीचे चला जाता है।
विशेषज्ञों, जन स्वास्थ्य, सिंचाई और कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो 15 साल पहले पलवल जिले में भूजल स्तर 15 से 20 फीट पर था, लेकिन लगातार बढ़ रहे भूजल दोहन के कारण अब जलस्तर 80 से 100 फीट पर है। हथीन क्षेत्र के कुछ इलाकों में तो और भी ज्यादा हालत खराब है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में भूमिगत जलस्तर करीब 3.65 मीटर से अधिक घट चुका है। किसानों की मानें तो हर वर्ष उन्हें अपने ट्यूबवेलों के बोर में 10 से 20 फीट पाइप और डालनी पड़ती है। जन स्वास्थ्य विभाग को भी हर साल जलस्तर गिरने से दर्जनों नए ट्यूबवेल लगाने पड़ते हैं। रिकार्ड के अनुसार, हर साल करीब दो फीट पानी नीचे चला जाता है।
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रजवाहों के आसपास भी गिरा स्तर
जिन गांवों में रजवाहे निकल रहे हैं, उनमें भी जलस्तर गिर रहा है। हालांकि, रजवाहों के आसपास जल स्तर अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम गिरा है। अधिकारी रजवाहों के आसपास जलस्तर 35 से 40 फीट पर मान रहे हैं। लेकिन, यदि हालात ऐसी ही रही तो जलस्तर और नीचे चला जाएगा। जल की बर्बादी, अवैध भूजल दोहन, वर्षा जल का संचयन न करना और औसतन वर्षा कम होने से जिले में ऐसे हालात पैदा हुए हैं।
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गांवों में टैंकरों से बेच रहे पानी
भूमिगत जल का अवैध रूप से दोहन करने वाले लोग इस पानी को गांवों में ले जाकर 1 हजार से 1500 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से बेचते हैं। गांव बघौला, दूधौला, पृथला, अगवानपुर और फिरोजपुर सहित हाइवे किनारे लगने वाले गांवों में टैंकरों से पानी बेचा जाता है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में भी अब पानी के टैंकर खूब जा रहे हैं। दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर ही गांव फिरोजपुर, कुसलीपुर के आसपास चार से पांच बोरवेल लगे हैं। इनमें से किसी के पास भी संबंधित विभाग से कोई लाइसेंस नहीं है। इन बोरवेल से करीब 100 से अधिक टैंकरों में प्रतिदिन पानी भरा जा रहा है। जहां इससे सरकार के राजस्व की चोरी होती है, वहीं इसे पीने वालों की सेहत से खिलवाड़ होता है।
डार्क जोन में हैं 8 से 10 क्षेत्र
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो पलवल जिले में एक भी डार्क जोन नहीं हैं। जबकि जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में अभी भी करीब 8 से 10 क्षेत्र डार्क जोन में हैं। उनकी मानें तो भुडेर के गांव धतीर सहित कई गांव तथा हथीन में उटावड सहित कई गांव शामिल हैं। होडल व पलवल के अंदर भी कई क्षेत्र डार्क जोन में हैं।
पक्के किए जा रहे नाले और रजवाहे भी मुख्य कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा रजवाहों और नालों को पक्का करवाना भी भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण है। कच्चे नाले और रजवाहों से पानी नीचे जमीन में जाता था, लेकिन अब रजवाहों व नालों को पक्का किया जा रहा है। इनसे भी जल स्तर गिरेगा। सरकार को रजवाहों और नालों को पक्का नहीं कराना चाहिए।
किसानों को कपास, सरसों, अरहर, मूंग जैसी कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलें उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सिंचाई के लिए टपका व फव्वारा विधि अपनाएं और खेत को लेजर लेवलर से समतल करवाने को जागरूक कर रहे हैं। हालात को देखते हुए किसानों को भी जागरूक हो जाना चाहिए।
- डॉ. महावीर मलिक, कृषि विशेषज्ञ व पर्यावरणविद
यदि इलाके में भूजल का दोहन करके क्षेत्र में आपूर्ति की जा रही है तो उस इलाके में भूजल तेजी से नीचे चला जाएगा। इस सीमित स्तर से ज्यादा भूजल का दोहन करने से जल की गुणवत्ता भी खराब होगी और वह क्षारीय रूप ले लेगा।
- डॉ. शिवसिंह रावत, एसई, सिचाई विभाग
भूजल दोहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश संबंधित विभागों को दिए हुए हैं। जल स्तर को गिरने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
- कृष्ण कुमार उपायुक्त पलवल
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विशेषज्ञों, जन स्वास्थ्य, सिंचाई और कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो 15 साल पहले पलवल जिले में भूजल स्तर 15 से 20 फीट पर था, लेकिन लगातार बढ़ रहे भूजल दोहन के कारण अब जलस्तर 80 से 100 फीट पर है। हथीन क्षेत्र के कुछ इलाकों में तो और भी ज्यादा हालत खराब है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में भूमिगत जलस्तर करीब 3.65 मीटर से अधिक घट चुका है। किसानों की मानें तो हर वर्ष उन्हें अपने ट्यूबवेलों के बोर में 10 से 20 फीट पाइप और डालनी पड़ती है। जन स्वास्थ्य विभाग को भी हर साल जलस्तर गिरने से दर्जनों नए ट्यूबवेल लगाने पड़ते हैं। रिकार्ड के अनुसार, हर साल करीब दो फीट पानी नीचे चला जाता है।
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रजवाहों के आसपास भी गिरा स्तर
जिन गांवों में रजवाहे निकल रहे हैं, उनमें भी जलस्तर गिर रहा है। हालांकि, रजवाहों के आसपास जल स्तर अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम गिरा है। अधिकारी रजवाहों के आसपास जलस्तर 35 से 40 फीट पर मान रहे हैं। लेकिन, यदि हालात ऐसी ही रही तो जलस्तर और नीचे चला जाएगा। जल की बर्बादी, अवैध भूजल दोहन, वर्षा जल का संचयन न करना और औसतन वर्षा कम होने से जिले में ऐसे हालात पैदा हुए हैं।
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गांवों में टैंकरों से बेच रहे पानी
भूमिगत जल का अवैध रूप से दोहन करने वाले लोग इस पानी को गांवों में ले जाकर 1 हजार से 1500 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से बेचते हैं। गांव बघौला, दूधौला, पृथला, अगवानपुर और फिरोजपुर सहित हाइवे किनारे लगने वाले गांवों में टैंकरों से पानी बेचा जाता है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में भी अब पानी के टैंकर खूब जा रहे हैं। दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर ही गांव फिरोजपुर, कुसलीपुर के आसपास चार से पांच बोरवेल लगे हैं। इनमें से किसी के पास भी संबंधित विभाग से कोई लाइसेंस नहीं है। इन बोरवेल से करीब 100 से अधिक टैंकरों में प्रतिदिन पानी भरा जा रहा है। जहां इससे सरकार के राजस्व की चोरी होती है, वहीं इसे पीने वालों की सेहत से खिलवाड़ होता है।
डार्क जोन में हैं 8 से 10 क्षेत्र
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो पलवल जिले में एक भी डार्क जोन नहीं हैं। जबकि जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में अभी भी करीब 8 से 10 क्षेत्र डार्क जोन में हैं। उनकी मानें तो भुडेर के गांव धतीर सहित कई गांव तथा हथीन में उटावड सहित कई गांव शामिल हैं। होडल व पलवल के अंदर भी कई क्षेत्र डार्क जोन में हैं।
पक्के किए जा रहे नाले और रजवाहे भी मुख्य कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा रजवाहों और नालों को पक्का करवाना भी भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण है। कच्चे नाले और रजवाहों से पानी नीचे जमीन में जाता था, लेकिन अब रजवाहों व नालों को पक्का किया जा रहा है। इनसे भी जल स्तर गिरेगा। सरकार को रजवाहों और नालों को पक्का नहीं कराना चाहिए।
किसानों को कपास, सरसों, अरहर, मूंग जैसी कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलें उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सिंचाई के लिए टपका व फव्वारा विधि अपनाएं और खेत को लेजर लेवलर से समतल करवाने को जागरूक कर रहे हैं। हालात को देखते हुए किसानों को भी जागरूक हो जाना चाहिए।
- डॉ. महावीर मलिक, कृषि विशेषज्ञ व पर्यावरणविद
यदि इलाके में भूजल का दोहन करके क्षेत्र में आपूर्ति की जा रही है तो उस इलाके में भूजल तेजी से नीचे चला जाएगा। इस सीमित स्तर से ज्यादा भूजल का दोहन करने से जल की गुणवत्ता भी खराब होगी और वह क्षारीय रूप ले लेगा।
- डॉ. शिवसिंह रावत, एसई, सिचाई विभाग
भूजल दोहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश संबंधित विभागों को दिए हुए हैं। जल स्तर को गिरने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
- कृष्ण कुमार उपायुक्त पलवल