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Palwal News: जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण जनता दूषित पानी पीने को मजबूर
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शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाला बूस्टर खुद गंदगी, झाड़ियों, कीचड़ और मृत पशुओं के बीच है घिरा
होडल। शहर में जन स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। नानक डेरी रोड स्थित विभागीय पेयजल बूस्टर परिसर पूरी तरह से बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। लगभग 80 हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाला यह बूस्टर खुद गंदगी, झाड़ियों, कीचड़ और मृत पशुओं के बीच घिरा है। यहां कुत्ते, सूअर और आवारा जानवर खुलेआम घूमते हैं। वहीं, आसपास के घरों का कूड़ा भी यहीं फेंका जाता है, जो गंदगी का मुख्य स्रोत बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बूस्टर परिसर इतना गंदा है कि यहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। एक मृत सूअर कई दिनों से कीचड़ में पड़ा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है। परिसर के भीतर झाड़ियां उगी हुई हैं, जिनमें जहरीले कीड़े-मकोड़े पनप रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आंख मूंदे हैं। बूस्टर परिसर में ही एसडीओ, जेई और अन्य अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें गंदगी नजर नहीं आती है।
वहीं, परिसर में जलभराव के कारण ओवरफ्लो हुआ पानी एक गड्ढे में एकत्र होता है, जिससे दलदल की स्थिति बन गई है। इससे पहले भी बूस्टर में गंदा पानी मिल जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, पर स्थायी समाधान नहीं हुआ।
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प्रदेश सरकार जहां स्वच्छता अभियान को प्राथमिकता दे रही है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग उसका माखौल बना रहा है। हर जगह सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार की ओर से लाखों रुपये की आर्थिक सहायता जाती है, लेकिन यहां न तो कोई साफ-सफाई है और न ही सौंदर्यीकरण। इससे पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजमी है।
यदि बूस्टर के आसपास गंदगी और मृत जानवर हैं, तो वह स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगी। लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। जनहित से जुड़ा मामला है, इसलिए किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम, बैलिना
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होडल। शहर में जन स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। नानक डेरी रोड स्थित विभागीय पेयजल बूस्टर परिसर पूरी तरह से बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। लगभग 80 हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाला यह बूस्टर खुद गंदगी, झाड़ियों, कीचड़ और मृत पशुओं के बीच घिरा है। यहां कुत्ते, सूअर और आवारा जानवर खुलेआम घूमते हैं। वहीं, आसपास के घरों का कूड़ा भी यहीं फेंका जाता है, जो गंदगी का मुख्य स्रोत बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बूस्टर परिसर इतना गंदा है कि यहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। एक मृत सूअर कई दिनों से कीचड़ में पड़ा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है। परिसर के भीतर झाड़ियां उगी हुई हैं, जिनमें जहरीले कीड़े-मकोड़े पनप रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आंख मूंदे हैं। बूस्टर परिसर में ही एसडीओ, जेई और अन्य अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें गंदगी नजर नहीं आती है।
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वहीं, परिसर में जलभराव के कारण ओवरफ्लो हुआ पानी एक गड्ढे में एकत्र होता है, जिससे दलदल की स्थिति बन गई है। इससे पहले भी बूस्टर में गंदा पानी मिल जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, पर स्थायी समाधान नहीं हुआ।
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प्रदेश सरकार जहां स्वच्छता अभियान को प्राथमिकता दे रही है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग उसका माखौल बना रहा है। हर जगह सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार की ओर से लाखों रुपये की आर्थिक सहायता जाती है, लेकिन यहां न तो कोई साफ-सफाई है और न ही सौंदर्यीकरण। इससे पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजमी है।
यदि बूस्टर के आसपास गंदगी और मृत जानवर हैं, तो वह स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगी। लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। जनहित से जुड़ा मामला है, इसलिए किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम, बैलिना