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Palwal News: फर्जी दस्तावेज के सहारे मान्यता लेने वाले 11 स्कूल जांच के घेरे में
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स्कूलों से पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज के मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत कर उनका सत्यापन कराने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। नूंह जिले में निजी स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फर्जी दस्तावेज के आधार पर मान्यता लेने के आरोपों के बीच मौलिक शिक्षा निदेशालय ने जिले के 11 निजी स्कूलों को जांच के दायरे में लिया है। निदेशालय ने संबंधित स्कूलों के मूल रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। मामला सामने आने के बाद मान्यता प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी पत्र में नूंह के 11 स्कूलों को जिला स्तरीय समिति के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर मामलों में अनधिकृत पहुंच और स्वीकृति से जुड़े मामलों की जांच का उल्लेख किया गया है। स्कूलों से पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज के मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत कर उनका सत्यापन कराने को कहा गया है।
पूर्व डीईओ ने हस्ताक्षर को अपना मानने से किया इन्कार
जानकारी के अनुसार, निदेशालय की ओर से मई माह में भी ऐसे स्कूलों की सूची भेजी गई थी, जिनकी मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी थी। इसी जांच के दौरान मान्यता से संबंधित एक फाइल पर पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ रोहताश वर्मा के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार फाइल पर रोहताश वर्मा के नाम से हस्ताक्षर हैं, लेकिन जांच के दौरान उन्होंने इन हस्ताक्षरों को अपना मानने से इन्कार कर दिया।
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डीईओ कार्यालय से ही आगे बढ़ी थी फाइल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फाइल पर पूर्व डीईओ के हस्ताक्षर नहीं हैं तो उनके नाम से हस्ताक्षर किसने किए। वहीं, जानकारी के अनुसार संबंधित फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से ही आगे बढ़ी थी। ऐसे में अब जांच केवल दस्तावेज की सत्यता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि फाइल किस स्तर पर तैयार हुई, किसने जांच की, किस अधिकारी या कर्मचारी ने उसे आगे बढ़ाया और मान्यता की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, इन सभी बिंदुओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मानक पूरा नहीं करने के आरोप
जिले में कुछ निजी स्कूलों के मकानों में संचालित होने और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने के आरोप भी सामने आते रहे हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे कुछ स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब निदेशालय की जांच में यदि दस्तावेज में फर्जीवाड़ा या मान्यता प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित स्कूल संचालकों के साथ-साथ फाइल को आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच अहम होगी।
फाइल पर हस्ताक्षर को लेकर पूर्व डीईओ की ओर से इनकार और उसी फाइल को डीईओ कार्यालय से आगे बढ़ने के मामले ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हस्ताक्षर असली हैं या फर्जी, फाइल किस अधिकारी-कर्मचारी के स्तर से आगे बढ़ी और स्कूलों को मान्यता देने में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।
ये निजी स्कूल जांच के दायरे में
निदेशालय ने 14 अगस्त को नूंह और पलवल के जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर संबंधित स्कूलों को जिला स्तरीय समितियों के साथ जांच के लिए बुलाने के निर्देश दिए थे। पत्र के अनुसार नूंह जिले के अल-फलाह पब्लिक स्कूल पुन्हाना, अबान पब्लिक स्कूल नूंह, आदर्श मॉडर्न स्कूल साकरस, नारवदा पब्लिक स्कूल उजिना, गोल्डन पब्लिक स्कूल जमालगढ़, इनाया पब्लिक स्कूल पाथखोरी, एवरग्रीन पब्लिक स्कूल पुन्हाना, टैगोर पब्लिक स्कूल रहपुवा, मेहताब मेमोरियल पब्लिक स्कूल घटवासन, दुआ पब्लिक स्कूल जमालगढ़ और कलाम पब्लिक स्कूल टांई जांच के दायरे में हैं।
कोट
जिले के 11 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता संबंधित जांच चल रही है, जो मौलिक शिक्षा निदेशालय द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है। - मामराज रावत, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नूंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। नूंह जिले में निजी स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फर्जी दस्तावेज के आधार पर मान्यता लेने के आरोपों के बीच मौलिक शिक्षा निदेशालय ने जिले के 11 निजी स्कूलों को जांच के दायरे में लिया है। निदेशालय ने संबंधित स्कूलों के मूल रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। मामला सामने आने के बाद मान्यता प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी पत्र में नूंह के 11 स्कूलों को जिला स्तरीय समिति के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर मामलों में अनधिकृत पहुंच और स्वीकृति से जुड़े मामलों की जांच का उल्लेख किया गया है। स्कूलों से पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज के मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत कर उनका सत्यापन कराने को कहा गया है।
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पूर्व डीईओ ने हस्ताक्षर को अपना मानने से किया इन्कार
जानकारी के अनुसार, निदेशालय की ओर से मई माह में भी ऐसे स्कूलों की सूची भेजी गई थी, जिनकी मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी थी। इसी जांच के दौरान मान्यता से संबंधित एक फाइल पर पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ रोहताश वर्मा के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार फाइल पर रोहताश वर्मा के नाम से हस्ताक्षर हैं, लेकिन जांच के दौरान उन्होंने इन हस्ताक्षरों को अपना मानने से इन्कार कर दिया।
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डीईओ कार्यालय से ही आगे बढ़ी थी फाइल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फाइल पर पूर्व डीईओ के हस्ताक्षर नहीं हैं तो उनके नाम से हस्ताक्षर किसने किए। वहीं, जानकारी के अनुसार संबंधित फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से ही आगे बढ़ी थी। ऐसे में अब जांच केवल दस्तावेज की सत्यता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि फाइल किस स्तर पर तैयार हुई, किसने जांच की, किस अधिकारी या कर्मचारी ने उसे आगे बढ़ाया और मान्यता की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, इन सभी बिंदुओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मानक पूरा नहीं करने के आरोप
जिले में कुछ निजी स्कूलों के मकानों में संचालित होने और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने के आरोप भी सामने आते रहे हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे कुछ स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब निदेशालय की जांच में यदि दस्तावेज में फर्जीवाड़ा या मान्यता प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित स्कूल संचालकों के साथ-साथ फाइल को आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच अहम होगी।
फाइल पर हस्ताक्षर को लेकर पूर्व डीईओ की ओर से इनकार और उसी फाइल को डीईओ कार्यालय से आगे बढ़ने के मामले ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हस्ताक्षर असली हैं या फर्जी, फाइल किस अधिकारी-कर्मचारी के स्तर से आगे बढ़ी और स्कूलों को मान्यता देने में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।
ये निजी स्कूल जांच के दायरे में
निदेशालय ने 14 अगस्त को नूंह और पलवल के जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर संबंधित स्कूलों को जिला स्तरीय समितियों के साथ जांच के लिए बुलाने के निर्देश दिए थे। पत्र के अनुसार नूंह जिले के अल-फलाह पब्लिक स्कूल पुन्हाना, अबान पब्लिक स्कूल नूंह, आदर्श मॉडर्न स्कूल साकरस, नारवदा पब्लिक स्कूल उजिना, गोल्डन पब्लिक स्कूल जमालगढ़, इनाया पब्लिक स्कूल पाथखोरी, एवरग्रीन पब्लिक स्कूल पुन्हाना, टैगोर पब्लिक स्कूल रहपुवा, मेहताब मेमोरियल पब्लिक स्कूल घटवासन, दुआ पब्लिक स्कूल जमालगढ़ और कलाम पब्लिक स्कूल टांई जांच के दायरे में हैं।
कोट
जिले के 11 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता संबंधित जांच चल रही है, जो मौलिक शिक्षा निदेशालय द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है। - मामराज रावत, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नूंह