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Mahendragarh-Narnaul News: भजन-कीर्तन से धन इकठ्ठा तक गोसेवा कर रहीं बिहाली की महिलाएं
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फोटो नंबर-10गो सेवा करने वाली महिला मंडल को सम्मानित करते गोशाला सदस्य। स्रोत: स्वयं
मंडी अटेली। गांव बिहाली में मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़ी करीब एक दर्जन महिलाएं गो सेवा को बढ़वा दे रही हैं। उन्होंने भजन-कीर्तन और सामाजिक कार्यक्रमों से धन एकत्र कर एक लाख रुपये की राशि गोशाला को दान दिया है।
मंडल में केला देवी, शीला देवी, रामकला देवी, सविता देवी, होशियार बाई, रामरति देवी, कैला देवी, मुन्नी देवी और सुनीता देवी सहित अन्य महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं ने गो सेवा के लिए प्रेरित करने का श्रेय गांव के बाबू पहलाद सिंह दिया, जिन्होंने उन्हें समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
महिला मंडल गांव में होने वाले जन्मदिन, कुआं पूजन, शादी समारोह, भजन संध्या और अन्य धार्मिक आयोजनों में भजन-कीर्तन कर सहयोग राशि एकत्र करती हैं। महिलाएं इस राशि को अपने बैंक खाते में जमा करती हैं और वर्षभर की बचत को गोशाला में दान कर देती हैं। इस वर्ष महिलाओं ने एक लाख रुपये की राशि गोशाला को भेंट की है।
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विशेष बात यह है कि मंडल की कुछ महिलाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित रही हैं, लेकिन उनका कहना है कि गो सेवा से उन्हें मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है तथा वे इस सेवा से स्वयं बेहतर महसूस करती हैं। महिलाएं केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं करतीं, बल्कि गोशाला में जाकर सफाई और गोवंश की देखभाल भी अपने हाथों से करती हैं।
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मंडल में केला देवी, शीला देवी, रामकला देवी, सविता देवी, होशियार बाई, रामरति देवी, कैला देवी, मुन्नी देवी और सुनीता देवी सहित अन्य महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं ने गो सेवा के लिए प्रेरित करने का श्रेय गांव के बाबू पहलाद सिंह दिया, जिन्होंने उन्हें समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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महिला मंडल गांव में होने वाले जन्मदिन, कुआं पूजन, शादी समारोह, भजन संध्या और अन्य धार्मिक आयोजनों में भजन-कीर्तन कर सहयोग राशि एकत्र करती हैं। महिलाएं इस राशि को अपने बैंक खाते में जमा करती हैं और वर्षभर की बचत को गोशाला में दान कर देती हैं। इस वर्ष महिलाओं ने एक लाख रुपये की राशि गोशाला को भेंट की है।
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विशेष बात यह है कि मंडल की कुछ महिलाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित रही हैं, लेकिन उनका कहना है कि गो सेवा से उन्हें मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है तथा वे इस सेवा से स्वयं बेहतर महसूस करती हैं। महिलाएं केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं करतीं, बल्कि गोशाला में जाकर सफाई और गोवंश की देखभाल भी अपने हाथों से करती हैं।