{"_id":"6ad7b056906ba7aae50d48c0","slug":"with-the-onset-of-winter-the-air-quality-in-the-region-has-begun-to-deteriorate-narnol-news-c-196-1-nnl1005-146879-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: 20 में से 16 दिन नारनौल का एक्यूआई 100 के पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: 20 में से 16 दिन नारनौल का एक्यूआई 100 के पार
विज्ञापन
फोटो नंबर- 16नारनौल में सड़क किनारे फैले कूडे को जलाने से उठता धूंआ। संवाद
- फोटो : 1
नारनौल। सर्दी आने के साथ ही क्षेत्र की हवा बिगड़ने लगी है। अक्तूबर के बीते 20 दिनों में से 16 दिन एक्यूआई 100 से 200 के बीच रहा। आने वाले दिनों में यह 200 के पार जा सकता है। ऐसा हुआ तो ग्रैप लगा सकता है जिसमें कूड़ा जलाने, निर्माण और खनन जैसे कामों पर रोक रहेगी।
पिछले साल क्षेत्र का एक्यूआई 400 से ऊपर चला गया था और ग्रैप स्टेज 3 लागू हुई थी। तब बहादुर सिंह तालाब के पास बन रही सड़क का काम करीब दो महीने रुका रहा और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
इस महीने सबसे ज्यादा एक्यूआई 1 अक्तूबर को 165 रहा जबकि 16 अक्तूबर को सबसे कम 64 दर्ज हुआ। 20 अक्तूबर को यह 128 रहा।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एसडीओ अनुज नरवाल ने लोगों से कूड़ा-कचरा न जलाने और निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव करने की अपील की, ताकि धूल न उड़े और हवा सामान्य रहे।
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार उत्तरी हवाओं से नमी घटती है और प्रदूषण के कण जमीन के पास टिके रहते हैं जिससे धुंध और स्मॉग बढ़ता है। त्योहारी सीजन की आतिशबाजी, पराली जलना, खनन, निर्माण, ईंट-भट्ठे और जाम भी इसकी वजह हैं। उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 दिन चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण फेफड़ों से खून में पहुंचकर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं। खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी का जोखिम भी बढ़ता है। आंखों में जलन, सिरदर्द और थकान की शिकायत हो सकती है।
विज्ञापन
पिछले साल क्षेत्र का एक्यूआई 400 से ऊपर चला गया था और ग्रैप स्टेज 3 लागू हुई थी। तब बहादुर सिंह तालाब के पास बन रही सड़क का काम करीब दो महीने रुका रहा और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
विज्ञापन
इस महीने सबसे ज्यादा एक्यूआई 1 अक्तूबर को 165 रहा जबकि 16 अक्तूबर को सबसे कम 64 दर्ज हुआ। 20 अक्तूबर को यह 128 रहा।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एसडीओ अनुज नरवाल ने लोगों से कूड़ा-कचरा न जलाने और निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव करने की अपील की, ताकि धूल न उड़े और हवा सामान्य रहे।
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार उत्तरी हवाओं से नमी घटती है और प्रदूषण के कण जमीन के पास टिके रहते हैं जिससे धुंध और स्मॉग बढ़ता है। त्योहारी सीजन की आतिशबाजी, पराली जलना, खनन, निर्माण, ईंट-भट्ठे और जाम भी इसकी वजह हैं। उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 दिन चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण फेफड़ों से खून में पहुंचकर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं। खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी का जोखिम भी बढ़ता है। आंखों में जलन, सिरदर्द और थकान की शिकायत हो सकती है।