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मेडिकल कॉलेज के लिए एक साल और करना पड़ेगा इंतजार

Fri, 11 Feb 2022 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 11 Feb 2022 11:45 PM IST
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Will have to wait one more year for medical college
गांव कोरियावास में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज । संवाद - फोटो : Narnol
अरावली की गोद में डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए विद्यार्थियों को और एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार द्वारा गांव कोरियावास में 80 एकड़ भूमि पर बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेज का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कुल 30 भवनों में से शिक्षण अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल सहित 13 भवनों का स्ट्रक्टर बनाने का काम पूरा हो चुका है। इन भवनों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। लगभग 15 भवन निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा दो भवनों पर काम शुरू किया जाना है। इस भवन का कार्य अप्रैल 2022 में पूरा होना था, लेकिन कोरोना की वजह से काम में देरी हो रही है। इससे काम को पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय और लगेगा। एक वर्ष बाद चारों ओर खेतों की हरियाली और अरावली की पहाड़ियों के बीच शुद्ध वातावरण में मेडिकल के विद्यार्थी पढ़ाई कर सकेंगे।
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बता दें कि सितंबर 2020 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कोरियावास में बन रहे मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी थी। सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपये की अप्रूवल दी गई थी। 407 करोड़ रुपये से इसके टेंडर ओपन हुए थे। आधारशिला रखे जाने पर मेडिकल कॉलेज पर बहुत तेजी से काम शुरू कर दिया गया था। यह काम अप्रैल 2022 में पूरा होना था। लेकिन बीच में कोरोना की तीन लहरों के आने से काम धीमा हो गया। अब दोबारा से इसके निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है। लगभग एक हजार से अधिक मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे हैं। अब इस कार्य को अप्रै 2023 तक पूरा होने की संभावना है।
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इन भवनों का ढांचा बनकर तैयार हुआ
चार मंजिला शिक्षण संस्थान, सात मंजिला मेडिकल कॉलेज, एक मंजिला परीक्षा हॉल, सात मंजिला लड़कियों का छात्रावास, नौ मंजिला लड़कों का छात्रावास, चार मंजिला जूनियर रेजिडेंट, आठ मंजिला सीनियर रेजिडेंट, तीन मंजिला नर्सिंग छात्रावास, एक मंजिला डायरेक्टर रेजिडेंस, तीन मंजिला टाइप-5, तीन मंजिला टाइप-4, तीन मंजिला टाइप-3, चार मंजिला टाइप-2 रेजिडेंस के भवनों के ढांचा तैयार कर दिए गए हैं। अभी इन भवनों में फर्श, बिजली फिटिंग, फाल सिलिंग आदि का कार्य चल रहा है। इसके अलावा दो मंजिला गेस्ट हाउस व शॉपिंग सेंटर पर काम शुरू होना बाकी है।
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इन भवनों पर चल रहा है काम:
मेडिकल कॉलेज के अंदर मोर्चरी भवन, पुलिस स्टेशन, वेस्ट मैनेजमेंट भवन, सब स्टेशन एवं डीजी सेट, कैंटीन, तीन मंजिला रैन बसेरा, सुलभ, सेंट्रल वर्कशॉप, क्लब हाउस, बैडमिंटन, स्क्वास कोर्ट, खेल सुविधा, ग्रेवयार्ड, पंप रूम, एसटीपी तथा ईटीपी के भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है।
ऐसा होगा कॉलेज का भवन
710 बेड के इस मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक भवन होगा। इसके अलावा 634 कमरों के हॉस्टल होंगे। इसमें 320 लड़कों व 314 लड़कियों के रहने की व्यवस्था होगी। 600 विद्यार्थियों के लिए परीक्षा भवन होगा। 54 कमरों का सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स का हॉस्टल तो 75 जूनियर का होगा। 75 कमरों का नर्सों का हॉस्टल, प्राचार्य निवास, 72 स्टॉफ क्वार्टर, 16 कमरों का गेस्ट हाउस, शव परीक्षण कक्ष, शव कक्ष, विद्युत शव दाह भट्टी, पुलिस स्टेशन, बिजली का सब स्टेशन, कैंटीन, रैन बसेरा, सुलभ शौचालय आदि सुविधाएं सम्मलित होंगी। इसके अतिरिक्त केंद्रीय कार्यशाला, 5 लेक्चरर हॉल और सभी यंत्रों से सुसज्जित प्रयोगशाला होगी।
रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
जिले का एकमात्र मेडिकल कॉलेज नारनौल से चार किलोमीटर दूर गांव कोरियावास में बनाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने से क्षेत्र के युवाओें को रोजगार के अवसर पर पैदा होंगे। जिले से प्रति वर्ष मेडिकल की पढ़ाई करने जा रहे विद्यार्थियों को यहीं पढ़ने की सुविधा होगी।
इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली-जयपुर
क्षेत्र का यह एक मात्र मेडिकल कॉलेज वरदान साबित होगा। क्षेत्र से प्रति दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए दिल्ली, जयपुर या रोहतक जाना पड़ता है। इससे उनको मानसिक, शारीर तथा आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार चिकित्सक नहीं होने की वजह से बिना इलाज के लौटना पड़ता है।
सड़क हादसों में गंभीर घायल 80 प्रतिशत लोगों की बचा सकते हैं जान
जिले में हर साल सैकड़ों की संख्या में सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से गंभीर रूप से घायल 80 प्रतिशत लोग इलाज के अभाव में जान गंवा देते हैं। हादसे में घायलों को इलाज के लिए सिविल अस्पतालों में लेकर जाते हैं, जहां से उन्हें प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। रेफर किए गए अधिकतर गंभीर मरीज हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। मेडिकल कॉलेज बन जाने के बाद हादसे में घायल गंभीर लोगों की मौतों का आंकड़ा कम किया जा सकता है।

मेडिकल कॉलेज का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अप्रैल 2022 में यह काम पूरा होना था, लेकिन कोरोना की वजह से इसमें एक वर्ष लेट हो गया है। अब यह अप्रैल 2023 तक पूरा हो पाएगा। लगभग 170 करोड़ रुपये का एस्टीमेट केंद्र सरकार को बनाकर भेजा गया है। उसको भी जल्द अप्रूवल मिलने की संभावना है।- अश्वनी गहलावत, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग।

 निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में बने सरकारी क्वार्टर । संवाद

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में बने सरकारी क्वार्टर । संवाद- फोटो : Narnol

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