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Mahendragarh-Narnaul News: जहां पिता बने गुरु, वहां बेटी ने गढ़ा अपना भविष्य
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फोटो नंबर-11हरि सिंह यादव व बेटी प्रोफेसर गीता यादव।
मेरे जीवन और कॅरियर की नींव मेरे पिता हरि सिंह यादव ने अपने संघर्ष और संस्कारों से रखी है। वे एक शिक्षक थे और बाद में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित किया।
हम छह भाई-बहन हैं और हमारे घर में हमेशा पढ़ाई, अनुशासन और ईमानदारी का माहौल रहा। मेरे पिता का मानना था कि शिक्षा ही सबसे बड़ी संपत्ति है और अच्छे संस्कार इंसान की असली पहचान बनाते हैं। उन्होंने बचपन से ही हमें मेहनत करना सिखाया, गिरकर फिर उठना सिखाया और हर हाल में सच्चाई के साथ खड़े रहना सिखाया।
वे खुद एक शिक्षक थे, इसलिए उन्होंने हमारे सपनों को हमेशा समझा और आगे बढ़ाया। जब भी हम हारने लगते, वे हमारे सबसे बड़े सहारा बन जाते। उनकी एक-एक सीख आज भी मेरे जीवन का हिस्सा है कि सफलता सिर्फ पद पाने का नाम नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाने का नाम है।
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आज मैं असिस्टेंट प्रोफेसर हूं, लेकिन यह उपलब्धि मेरी नहीं, बल्कि मेरे पिता के त्याग, संघर्ष और आशीर्वाद की देन है। अगर आज मैं आत्मविश्वास के साथ खड़ी हूं, तो उसके पीछे मेरे पिता का मजबूत हाथ और उनका विश्वास है। मेरे जीवन की हर उपलब्धि में उनका ही अंश है, और मैं गर्व से कहती हूं कि मैं अपने पिता की परवरिश की पहचान हूं।-गीता यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय
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हम छह भाई-बहन हैं और हमारे घर में हमेशा पढ़ाई, अनुशासन और ईमानदारी का माहौल रहा। मेरे पिता का मानना था कि शिक्षा ही सबसे बड़ी संपत्ति है और अच्छे संस्कार इंसान की असली पहचान बनाते हैं। उन्होंने बचपन से ही हमें मेहनत करना सिखाया, गिरकर फिर उठना सिखाया और हर हाल में सच्चाई के साथ खड़े रहना सिखाया।
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वे खुद एक शिक्षक थे, इसलिए उन्होंने हमारे सपनों को हमेशा समझा और आगे बढ़ाया। जब भी हम हारने लगते, वे हमारे सबसे बड़े सहारा बन जाते। उनकी एक-एक सीख आज भी मेरे जीवन का हिस्सा है कि सफलता सिर्फ पद पाने का नाम नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाने का नाम है।
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आज मैं असिस्टेंट प्रोफेसर हूं, लेकिन यह उपलब्धि मेरी नहीं, बल्कि मेरे पिता के त्याग, संघर्ष और आशीर्वाद की देन है। अगर आज मैं आत्मविश्वास के साथ खड़ी हूं, तो उसके पीछे मेरे पिता का मजबूत हाथ और उनका विश्वास है। मेरे जीवन की हर उपलब्धि में उनका ही अंश है, और मैं गर्व से कहती हूं कि मैं अपने पिता की परवरिश की पहचान हूं।-गीता यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय