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Mahendragarh-Narnaul News: सरसों के खेतों में ग्रीन अमोनिया का प्रयोग, यूरिया की जगह नई उम्मीद
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फोटो संख्या:53-:- गांव पालड़ी पनिहारा में कृषि वैज्ञानिकों से संवाद करते विधायक कंवर सिंह यादव
महेंद्रगढ़। जिले के किसानों को सरसों की खेती में कम खर्च और ज्यादा मुनाफे का रास्ता दिखाने के लिए नई पहल शुरू की गई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जिले में करीब 300 एकड़ क्षेत्र में किसानों के खेतों पर ग्रीन अमोनिया के प्रदर्शन लगाए जाएंगे। इनके जरिये यह परखा जा रहा है कि सरसों की फसल में यूरिया की जगह ग्रीन अमोनिया का उपयोग कितना कारगर हो सकता है।
शनिवार को महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव गांव पालड़ी पनिहारा पहुंचे और खेतों में लगे प्रदर्शनों को देखा। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल व कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बातचीत की। उन्होंने तकनीक की उपयोगिता, फसल को नाइट्रोजन मिलने और किसानों को होने वाले संभावित फायदों की जानकारी ली।
विधायक ने कहा कि खेती में नई तकनीक और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना आज की जरूरत है। किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना चाहिए, जिनसे लागत घटे, संसाधनों का सही उपयोग हो और उत्पादन फायदे का सौदा बने।
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परियोजना प्रभारी एवं मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजपाल यादव और सह-प्रभारी डॉ. नरेंद्र यादव ने बताया कि इन प्रदर्शनों से ग्रीन अमोनिया की नाइट्रोजन देने की क्षमता, फसल की बढ़वार, पैदावार और आर्थिक असर का आकलन होगा। इससे पता चलेगा कि सरसों की खेती में यह कितना उपयोगी है।
केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. नरेश कुमार यादव ने कहा कि इस पहल का मकसद किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना है।
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शनिवार को महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव गांव पालड़ी पनिहारा पहुंचे और खेतों में लगे प्रदर्शनों को देखा। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल व कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से बातचीत की। उन्होंने तकनीक की उपयोगिता, फसल को नाइट्रोजन मिलने और किसानों को होने वाले संभावित फायदों की जानकारी ली।
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विधायक ने कहा कि खेती में नई तकनीक और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना आज की जरूरत है। किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना चाहिए, जिनसे लागत घटे, संसाधनों का सही उपयोग हो और उत्पादन फायदे का सौदा बने।
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परियोजना प्रभारी एवं मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजपाल यादव और सह-प्रभारी डॉ. नरेंद्र यादव ने बताया कि इन प्रदर्शनों से ग्रीन अमोनिया की नाइट्रोजन देने की क्षमता, फसल की बढ़वार, पैदावार और आर्थिक असर का आकलन होगा। इससे पता चलेगा कि सरसों की खेती में यह कितना उपयोगी है।
केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. नरेश कुमार यादव ने कहा कि इस पहल का मकसद किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना है।