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दो साल से पेयजल की समस्या से परेशान महिलाओं ने मटका फोड़कर किया प्रदर्शन
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दो वर्षों से पेयजल की समस्या से परेशान गांव बवाना की महिलाओं ने बुधवार को बीडीपीओ कार्यालय को मटके फोड़कर रोष जताया। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीण महिला ममता, राजेश देवी, प्रियंका, ग्यारसी, सुनीता, गीता, अनीता, रेणू, बिमला, रोशनी, सुमन, सुनीता देवी, निर्मला, कृष्णा, मुकेश, विद्या, अंकित, सोनू, मनीराम ने बताया कि 800 घरों की बस्ती के लोग समस्या के समाधान की मांग को लेकर उपायुक्त, एसडीएम से लेकर बार-बार अधिकारियों से मिल चुके हैं। लेकिन दो साल से समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सात ट्यूबवेल हैं, लेकिन उनकी बस्ती में महज दो ही ट्यूबवेल हैं। पेयजल आपूर्ति के लिए लगाया गया विभाग का कर्मचारी भी हर माह 50 रुपये प्रति घर के हिसाब से पैसे भी ले रहा है। उन्होंने कहा कि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। मौके पर जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप यादव ने पहुंचकर महिलाओं को एक सप्ताह में नियमित जलापूर्ति का आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद महिलाएं घर लौट गईं।
आए दिन मोटर रहती है खराब
दो साल से पानी की समस्या बनी हुई है। बार-बार अधिकारियों से समाधान की मांग के बावजूद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दूर-दराज से पानी लाकर काम चलाना पड़ता है। ऑपरेटर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर टाल देता है। -ममता
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अधिकारियों से गुहार लगाई फिर भी नहीं दूर हुई समस्या
इस समस्या को लेकर डीसी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राजेश देवी
पेयजल आपूर्ति के लिए नहीं पर्याप्त दो ट्यूबवेल
गांव में जनस्वास्थ्य विभाग के सात ट्यूबवेल हैं। लेकिन 800 घरों की आबादी के लिए महज दो ट्यूबवेल ही हैं। ऐसे में नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। लंबे समय से पानी सप्लाई नहीं होने से परेशानी हो रही है। अंकित, ग्रामीण
दूर-दराज से पानी लाने में होती है परेशानी
ट्यूबवेल का पानी नहीं आने के कारण लोगों को दूर-दराज से लेकर आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लंबे समय से बस्ती के लोग पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। ऑपरेटर हर महीने घर-घर जाकर रुपये लेता है। मनीराम, ग्रामीण।
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए लाइन डाली जा चुकी है। अगले सप्ताह तक पानी की लाइन शुरू कर दी जाएगी। विभाग के जेई को आदेश दिए गए हैं वहां जाकर शीघ्र ही जलापूर्ति के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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उन्होंने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सात ट्यूबवेल हैं, लेकिन उनकी बस्ती में महज दो ही ट्यूबवेल हैं। पेयजल आपूर्ति के लिए लगाया गया विभाग का कर्मचारी भी हर माह 50 रुपये प्रति घर के हिसाब से पैसे भी ले रहा है। उन्होंने कहा कि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। मौके पर जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप यादव ने पहुंचकर महिलाओं को एक सप्ताह में नियमित जलापूर्ति का आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद महिलाएं घर लौट गईं।
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आए दिन मोटर रहती है खराब
दो साल से पानी की समस्या बनी हुई है। बार-बार अधिकारियों से समाधान की मांग के बावजूद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दूर-दराज से पानी लाकर काम चलाना पड़ता है। ऑपरेटर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर टाल देता है। -ममता
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अधिकारियों से गुहार लगाई फिर भी नहीं दूर हुई समस्या
इस समस्या को लेकर डीसी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राजेश देवी
पेयजल आपूर्ति के लिए नहीं पर्याप्त दो ट्यूबवेल
गांव में जनस्वास्थ्य विभाग के सात ट्यूबवेल हैं। लेकिन 800 घरों की आबादी के लिए महज दो ट्यूबवेल ही हैं। ऐसे में नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। लंबे समय से पानी सप्लाई नहीं होने से परेशानी हो रही है। अंकित, ग्रामीण
दूर-दराज से पानी लाने में होती है परेशानी
ट्यूबवेल का पानी नहीं आने के कारण लोगों को दूर-दराज से लेकर आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लंबे समय से बस्ती के लोग पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। ऑपरेटर हर महीने घर-घर जाकर रुपये लेता है। मनीराम, ग्रामीण।
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए लाइन डाली जा चुकी है। अगले सप्ताह तक पानी की लाइन शुरू कर दी जाएगी। विभाग के जेई को आदेश दिए गए हैं वहां जाकर शीघ्र ही जलापूर्ति के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।