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Mahendragarh-Narnaul News: आर्य समाज महेंद्रगढ़ में चंद्रशेखर आजाद को दी श्रद्धांजलि
Tue, 27 Feb 2024 11:18 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 27 Feb 2024 11:18 PM IST
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महेंद्रगढ़। आर्य समाज महेंद्रगढ़ में वेद प्रचार मंडल एवं आर्य समाज के तत्वावधान में मंगलवार को चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधान डॉ. प्रेमराज आर्य ने बताया कि भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए थे। चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई थी कि चाहें कुछ भी हो जाए, लेकिन वह जिंदा अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे। आजाद ने अंग्रेजों से अकेले ही मुकाबला करते हुए अपने साथियों को पार्क से बाहर निकाल दिया, जिससे भारत की आजादी के लिए बनाई उनकी योजनाओं पर कोई प्रभाव न पड़े। जब उनकी रिवाल्वर में आखिरी गोली बची तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथ आने की बजाए खुद के जीवन को खत्म करना चुना और उस आखिरी गोली से अपना जीवन खत्म कर दिया। वे एक ऐसे युवा क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अपने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दी। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान भूपेंद्र सिंह आर्य, उप प्रधान वीर सिंह मेघवनवास, डॉ. विक्रांत डागर, सुभाष चंद आर्य, कोषाध्यक्ष बाबू रंग राव आर्य आदि मौजूद रहे।
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प्रधान डॉ. प्रेमराज आर्य ने बताया कि भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए थे। चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई थी कि चाहें कुछ भी हो जाए, लेकिन वह जिंदा अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे। आजाद ने अंग्रेजों से अकेले ही मुकाबला करते हुए अपने साथियों को पार्क से बाहर निकाल दिया, जिससे भारत की आजादी के लिए बनाई उनकी योजनाओं पर कोई प्रभाव न पड़े। जब उनकी रिवाल्वर में आखिरी गोली बची तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथ आने की बजाए खुद के जीवन को खत्म करना चुना और उस आखिरी गोली से अपना जीवन खत्म कर दिया। वे एक ऐसे युवा क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अपने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दी। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान भूपेंद्र सिंह आर्य, उप प्रधान वीर सिंह मेघवनवास, डॉ. विक्रांत डागर, सुभाष चंद आर्य, कोषाध्यक्ष बाबू रंग राव आर्य आदि मौजूद रहे।
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