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कैंसर से होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत की वजह तंबाकू का सेवन
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डॉ. प्रदीप भारद्वाज। संवाद
- फोटो : Narnol
कैंसर शरीर की सामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। इस अनियंत्रित वृद्धि के कई कारण हो सकते हैं। इसमें आनुवंशिक वातावरण संबंधी खानपान एवं जीवन शैली, (रसायन व कीटनाशक) प्रमुख हैं। सिक्स सिग्मा मेडिकल रिसर्च के संचालक डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि लगभग 22 प्रतिशत कैंसर से होने वाली मौत का कारण तंबाकू का सेवन है। अन्य 10 प्रतिशत मौतें मोटापा, खराब आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी या अत्यधिक शराब पीना है।
उन्होंने कहा कि कुछ सालों में कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आज कैंसर के लिए बेहतर जांच और इलाज उपलब्ध हैं, जिनकी बदौलत मरीज पहले से कहीं अधिक समय तक जीवित रहते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि नियमित जांच कराने से बीमारियां जल्दी पकड़ में आती हैं और उनका इलाज आसान हो जाता है।
सबसे ज्यादा महिलाएं हो रही हैं कैंसर का शिकार
डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि होने वाली मौतों में महिलाएं अधिक हैं। ब्रेस्ट, गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर से ज्यादातर मौतें होती हैं। पुरुषों में सबसे अधिक मौतें फेफड़ों, आमाशय, यकृत, मल मार्ग और ब्रेन कैंसर से होती है। कैंसर से मरने वाले लोगों में महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से अधिक है।
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जीवन शैली में बदलाव कर टाला जा सकता है कैसरा का खतरा
कैंसर के खतरे को काफी हद तक जीवन शैली में बदलाव करके टाला जा सकता है। इसके लिए आपको अपनी इच्छा, जीवन शैली, नियंत्रित आहार, नियमित व्यायाम जरूरी है। अनियंत्रित जीवन शैली, जिस तेजी से बढ़ी है, उसी तेजी के साथ कैंसर के मरीज बढ़े हैं। संतुलित पौष्टिक भोजन, दिनचर्या, ऋतुचर्या का पालन करते हुए नियमित रूप से योग, प्राणायाम आदि कर स्वस्थ रहा जा सकता है।
70 फीसदी केस तीसरे चरण में पहुंचते हैं अस्पताल
दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें कैंसर से होती है। सबसे ज्यादा कैंसर के शिकार नशा करने वाले होते हैं। कैंसर के 70 फीसदी केस तीसरे चरण में पहुंच जाने के बाद अस्पताल में आते हैं। बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के कारण आए दिन तरह-तरह की नई बीमारियां लोगों को अपना शिकार बना रही हैं।
कहां-कहां होता है कैंसर
सबसे कॉमन कैंसर आम स्किन, ब्रेस्ट, लंग, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, ब्लैडर, मेलानोमा, लिंफोमा, किडनी कैंसर हैं। महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, सर्वाइकल, और थायराइड कैंसर होते हैं। पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर के कैंसर सबसे ज्यादा होते हैं।
ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दें
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि खेती में उपयोग होने वाले उर्वरकों और कीटनाशक से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से भी अनुरोध किया कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए हमें जैविक खेती पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
जिले में प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं कैंसर मरीज
जिले में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ ही है। पिछले सात वर्षों में मरीजों की संख्या साढ़े चार गुना बढ़ गई हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास इसका रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन कैंसर पीड़ितों के फ्री बस पास बनाए जाते हैं। बस पास से कैंसर पीड़ित और एक अटेंड पूरे राज्य में रोडवेज बस में फ्री सफर कर सकता है। उसके डाटा से यह अनुमान लगाया गया है। 2014-15 में 68 मरीजों के बस पास बनाए गए थे। अप्रैल 2021 से 20 जनवरी 2022 तक 291 मरीजों के बस पास बनाए गए हैं।
अवधि कैंसर मरीज
1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 - 68
1 अप्रैल से 2015 मार्च 2016 - 85
1 अप्रैल से 2016 मार्च 2017 - 64
1 अप्रैल से 2017 मार्च 2018 - 124
1 अप्रैल से 2018 मार्च 2019 - 253
1 अप्रैल से 2019 मार्च 2020 - 325
1 अप्रैल से 2020 मार्च 2021 - 226
1 अप्रैल से 2021 जनवरी 2022 291
लगभग 22 प्रतिशत कैंसर से होने वाली मौतों का कारण तंबाकू है। अन्य 10 प्रतिशत मोटापा, खराब आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी या अत्यधिक शराब पीने के कारण होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज में काफी बदलाव आया है। प्राइमरी स्टेज पर ही मरीज को चिकित्सक के पास जाकर जांच करवा लेनी चाहिए। -डॉ. प्रदीप भारद्वाज, सिक्स सिग्मा मेडिकल रिसर्च।
महिलाओं में सबसे अधिक ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। ओरल कैविटी के मरीज भी काफी आते हैं। लक्षण आते ही चिकित्सकों से जांच करवानी चाहिए। जीवन शैली में बदलाव करना होगा। प्रतिदिन योग करना, खाने में सलाद, ताजा फल, जूस आदि लेते रहना चाहिए। -डॉ. मोहित शर्मा, कैंसर स्पेशलिस्ट, ऑल इंडिया मेडिकल साइंस, जोधपुर।
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उन्होंने कहा कि कुछ सालों में कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आज कैंसर के लिए बेहतर जांच और इलाज उपलब्ध हैं, जिनकी बदौलत मरीज पहले से कहीं अधिक समय तक जीवित रहते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि नियमित जांच कराने से बीमारियां जल्दी पकड़ में आती हैं और उनका इलाज आसान हो जाता है।
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सबसे ज्यादा महिलाएं हो रही हैं कैंसर का शिकार
डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि होने वाली मौतों में महिलाएं अधिक हैं। ब्रेस्ट, गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर से ज्यादातर मौतें होती हैं। पुरुषों में सबसे अधिक मौतें फेफड़ों, आमाशय, यकृत, मल मार्ग और ब्रेन कैंसर से होती है। कैंसर से मरने वाले लोगों में महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से अधिक है।
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जीवन शैली में बदलाव कर टाला जा सकता है कैसरा का खतरा
कैंसर के खतरे को काफी हद तक जीवन शैली में बदलाव करके टाला जा सकता है। इसके लिए आपको अपनी इच्छा, जीवन शैली, नियंत्रित आहार, नियमित व्यायाम जरूरी है। अनियंत्रित जीवन शैली, जिस तेजी से बढ़ी है, उसी तेजी के साथ कैंसर के मरीज बढ़े हैं। संतुलित पौष्टिक भोजन, दिनचर्या, ऋतुचर्या का पालन करते हुए नियमित रूप से योग, प्राणायाम आदि कर स्वस्थ रहा जा सकता है।
70 फीसदी केस तीसरे चरण में पहुंचते हैं अस्पताल
दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें कैंसर से होती है। सबसे ज्यादा कैंसर के शिकार नशा करने वाले होते हैं। कैंसर के 70 फीसदी केस तीसरे चरण में पहुंच जाने के बाद अस्पताल में आते हैं। बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के कारण आए दिन तरह-तरह की नई बीमारियां लोगों को अपना शिकार बना रही हैं।
कहां-कहां होता है कैंसर
सबसे कॉमन कैंसर आम स्किन, ब्रेस्ट, लंग, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, ब्लैडर, मेलानोमा, लिंफोमा, किडनी कैंसर हैं। महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, सर्वाइकल, और थायराइड कैंसर होते हैं। पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर के कैंसर सबसे ज्यादा होते हैं।
ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दें
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि खेती में उपयोग होने वाले उर्वरकों और कीटनाशक से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से भी अनुरोध किया कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए हमें जैविक खेती पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
जिले में प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं कैंसर मरीज
जिले में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ ही है। पिछले सात वर्षों में मरीजों की संख्या साढ़े चार गुना बढ़ गई हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास इसका रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन कैंसर पीड़ितों के फ्री बस पास बनाए जाते हैं। बस पास से कैंसर पीड़ित और एक अटेंड पूरे राज्य में रोडवेज बस में फ्री सफर कर सकता है। उसके डाटा से यह अनुमान लगाया गया है। 2014-15 में 68 मरीजों के बस पास बनाए गए थे। अप्रैल 2021 से 20 जनवरी 2022 तक 291 मरीजों के बस पास बनाए गए हैं।
अवधि कैंसर मरीज
1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 - 68
1 अप्रैल से 2015 मार्च 2016 - 85
1 अप्रैल से 2016 मार्च 2017 - 64
1 अप्रैल से 2017 मार्च 2018 - 124
1 अप्रैल से 2018 मार्च 2019 - 253
1 अप्रैल से 2019 मार्च 2020 - 325
1 अप्रैल से 2020 मार्च 2021 - 226
1 अप्रैल से 2021 जनवरी 2022 291
लगभग 22 प्रतिशत कैंसर से होने वाली मौतों का कारण तंबाकू है। अन्य 10 प्रतिशत मोटापा, खराब आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी या अत्यधिक शराब पीने के कारण होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज में काफी बदलाव आया है। प्राइमरी स्टेज पर ही मरीज को चिकित्सक के पास जाकर जांच करवा लेनी चाहिए। -डॉ. प्रदीप भारद्वाज, सिक्स सिग्मा मेडिकल रिसर्च।
महिलाओं में सबसे अधिक ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। ओरल कैविटी के मरीज भी काफी आते हैं। लक्षण आते ही चिकित्सकों से जांच करवानी चाहिए। जीवन शैली में बदलाव करना होगा। प्रतिदिन योग करना, खाने में सलाद, ताजा फल, जूस आदि लेते रहना चाहिए। -डॉ. मोहित शर्मा, कैंसर स्पेशलिस्ट, ऑल इंडिया मेडिकल साइंस, जोधपुर।