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14 जनवरी को 3:05 बजे होगा सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
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फोटो नंबर-09आचार्य क्रांति निर्मल।
नारनौल। मकर संक्रांति सूर्य कैलेंडर पर आधारित पर्व है। यह पर्व सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इसी दिन से सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा यानी उत्तरायण की शुरुआत होती है। इस दिन लोग पवित्र स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की पूजा करते हैं।
आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति क्षण) 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:05 बजे होगा। पुण्य काल-इसके कुछ घंटे बाद होगा। पुण्य काल में स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान करना शुभ माना जाता है। आचार्य ने बताया कि इस वर्ष की मकर संक्रांति को मंदाकिनी नाम दिया गया है।
ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार इस दिन सूर्य देव पीत वस्त्र धारण कर बाघ पर आरूढ़ होंगे जबकि उनका उपवाहन घोड़ा रहेगा। उनकी दृष्टि ईशान दिशा की ओर होगी और वे पश्चिम दिशा में गमन करेंगे।सूर्य देव का अस्त्र गदा बताया है और वे भोग की अवस्था में होंगे।
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मकर संक्रांति का प्रभाव
इस बार की मकर संक्रांति सेहत के लिहाज से सकारात्मक मानी जा रही है और लोगों को रोगों से राहत मिलने के संकेत हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के आपसी संबंधों में सुधार की संभावना बन रही है। सूर्य देव की कृपा से घरों में धन-धान्य की वृद्धि हो सकती है। सरकारी नौकरी या प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए यह समय शुभ फल देने वाला माना जा रहा है।
क्षेत्र विशेष अनुसार विभिन्न धार्मिक परंपराएं
इस विशेष पर्व पर गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान को पुण्यदायक माना जाता है। इसके अलावा इस दिन उगते सूर्य को जल अर्पित कर ग्रहों के राजा सूर्य की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इससे शरीर में विशेष स्फूर्ति व ऊर्जा का संचार होता है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है। मकर संक्रांति के पुण्य काल में अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ आदि वस्तुओं का दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
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आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति क्षण) 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:05 बजे होगा। पुण्य काल-इसके कुछ घंटे बाद होगा। पुण्य काल में स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान करना शुभ माना जाता है। आचार्य ने बताया कि इस वर्ष की मकर संक्रांति को मंदाकिनी नाम दिया गया है।
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ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार इस दिन सूर्य देव पीत वस्त्र धारण कर बाघ पर आरूढ़ होंगे जबकि उनका उपवाहन घोड़ा रहेगा। उनकी दृष्टि ईशान दिशा की ओर होगी और वे पश्चिम दिशा में गमन करेंगे।सूर्य देव का अस्त्र गदा बताया है और वे भोग की अवस्था में होंगे।
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मकर संक्रांति का प्रभाव
इस बार की मकर संक्रांति सेहत के लिहाज से सकारात्मक मानी जा रही है और लोगों को रोगों से राहत मिलने के संकेत हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के आपसी संबंधों में सुधार की संभावना बन रही है। सूर्य देव की कृपा से घरों में धन-धान्य की वृद्धि हो सकती है। सरकारी नौकरी या प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए यह समय शुभ फल देने वाला माना जा रहा है।
क्षेत्र विशेष अनुसार विभिन्न धार्मिक परंपराएं
इस विशेष पर्व पर गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान को पुण्यदायक माना जाता है। इसके अलावा इस दिन उगते सूर्य को जल अर्पित कर ग्रहों के राजा सूर्य की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इससे शरीर में विशेष स्फूर्ति व ऊर्जा का संचार होता है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है। मकर संक्रांति के पुण्य काल में अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ आदि वस्तुओं का दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।