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सर्दी बढ़ने के साथ निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ी
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मरीजों की जांच करते डॉ. संदीप यादव।
- फोटो : Narnol
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सर्दी की शुरुआत होते ही जिले में निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ठंड बढ़ने के बावजूद भी परिजन बच्चों को गर्म कपड़ा पहनाने में लापरवाही कर रहे हैं। इसी वजह से बच्चों को निमोनिया होने लगा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 की ओपीडी शुरू हो गई जबकि महेंद्रगढ़ अस्पताल में लगभग 40 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। पांच मरीज अस्पताल में एडमिट हैं। ऐसे में बच्चों को खांसी, जुकाम और बुखार होने पर बाल रोग विशेषज्ञ को बढ़ती ठंड के चलते परिजनों को बच्चों को का ध्यान रखना होगा। अन्यथा निमोनिया होने पर खतरनाक साबित हो सकता है। 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूक भी किया जाता है।
निमोनिया के लक्षण
-बच्चे को खांसी होना
- सांस लेने में तकलीफ होना
-पसलियों का तेज चलना।
-बच्चे के अंदर बैचेनी होना।
-खाना-पीना कम करना।
खतर के निशान पर लक्षण
-बच्चों की सांसे बहुत तेजी से चलना
-छाती पर भरना
-छाती में गड्ढ़े पड़ना
-शरीर पर लाल दाने होना।
-पेशाब कम करना व बार-बार तेज बुखार होना।
बचाव के उपाय
- बच्चों को सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं।
- बच्चों को सुबह-शाम नंगे पैर न चलने दें।
- निमोनिया-फ्लू से बचाव को टीके लगवाएं।
- दिक्कत होने पर डॉक्टर से ही उपचार लें।
- खांसी जुकाम के मरीजों से दूर रखना।
-मां के खांसी-जुकाम होने पर मास्क लगाकर बच्चे को दूध पिलाएं
-बच्चों को तरल पदार्थ ज्यादा से ज्याद दें।
जिला अस्पताल में है उपचार की व्यवस्था
यदि किसी के बच्चे को निमोनिया की दिक्कत होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। जिला अस्पताल में निमोनिया के उपचार की पूरी व्यवस्था हैं। अस्पताल के अंदर निमोनिया का अलग वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा नेबुलाइजर, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। दिक्कत होने पर बच्चों और बुजुर्गों को अस्पताल में ले जाकर उपचार दिलाएं।
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मौसम में परिवर्तन के कारण निमोनिया के मरीज बढ़े हैं। सर्दी शुरू होने पर ही मरीजों की ओपीडी 200 पर पहुंच गई है। यह संख्या कई गुना और बढ़ सकती है। इसलिए जागरूकता जरूरी है। बच्चों को निमोनिया से बचाव के लिए उनका सर्दी से बचाव रखें। -डॉ. संदीप यादव, बाल रोग विशेषज्ञ।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 की ओपीडी शुरू हो गई जबकि महेंद्रगढ़ अस्पताल में लगभग 40 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। पांच मरीज अस्पताल में एडमिट हैं। ऐसे में बच्चों को खांसी, जुकाम और बुखार होने पर बाल रोग विशेषज्ञ को बढ़ती ठंड के चलते परिजनों को बच्चों को का ध्यान रखना होगा। अन्यथा निमोनिया होने पर खतरनाक साबित हो सकता है। 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूक भी किया जाता है।
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निमोनिया के लक्षण
-बच्चे को खांसी होना
- सांस लेने में तकलीफ होना
-पसलियों का तेज चलना।
-बच्चे के अंदर बैचेनी होना।
-खाना-पीना कम करना।
खतर के निशान पर लक्षण
-बच्चों की सांसे बहुत तेजी से चलना
-छाती पर भरना
-छाती में गड्ढ़े पड़ना
-शरीर पर लाल दाने होना।
-पेशाब कम करना व बार-बार तेज बुखार होना।
बचाव के उपाय
- बच्चों को सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं।
- बच्चों को सुबह-शाम नंगे पैर न चलने दें।
- निमोनिया-फ्लू से बचाव को टीके लगवाएं।
- दिक्कत होने पर डॉक्टर से ही उपचार लें।
- खांसी जुकाम के मरीजों से दूर रखना।
-मां के खांसी-जुकाम होने पर मास्क लगाकर बच्चे को दूध पिलाएं
-बच्चों को तरल पदार्थ ज्यादा से ज्याद दें।
जिला अस्पताल में है उपचार की व्यवस्था
यदि किसी के बच्चे को निमोनिया की दिक्कत होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। जिला अस्पताल में निमोनिया के उपचार की पूरी व्यवस्था हैं। अस्पताल के अंदर निमोनिया का अलग वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा नेबुलाइजर, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। दिक्कत होने पर बच्चों और बुजुर्गों को अस्पताल में ले जाकर उपचार दिलाएं।
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मौसम में परिवर्तन के कारण निमोनिया के मरीज बढ़े हैं। सर्दी शुरू होने पर ही मरीजों की ओपीडी 200 पर पहुंच गई है। यह संख्या कई गुना और बढ़ सकती है। इसलिए जागरूकता जरूरी है। बच्चों को निमोनिया से बचाव के लिए उनका सर्दी से बचाव रखें। -डॉ. संदीप यादव, बाल रोग विशेषज्ञ।