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परिजनों ने सुनाई शहीदों की गौरव गाथा, कहा- मिले उचित सम्मान
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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धाजंलि देते मुख्यातिथि डॉ.
- फोटो : Narnol
महेंद्रगढ़। भूतपूर्व सैनिक विकास संघ और अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कारगिल विजय दिवस पर विचार गोष्ठी मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें क्षेत्र के 15 शहीदों के परिजनों ने शहीदों की गौरव गाथा और अपने संघर्षों की कहानी साझा की।
मुख्य अतिथि भूतपूर्व सैनिक विकास संघ के अध्यक्ष डॉ. मेजर सूरत सिंह ने कारगिल शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में कप्तान राजेंद्र सिंह खेड़ा और सुबेदार रामस्वरूप यादव उपस्थित रहे। गोष्ठी में दो शहीदों की पत्नियां भी शामिल रहीं। इस दौरान परिजनों ने शहीदों की वीरगाथाओं को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
आपरेशन रक्षक का हिस्सा रहे आनंद कुमार ने 14 अगस्त 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत दी थी। उन्होंने 23 वर्षों के संघर्ष के दौरान उन्होंने बेटे को पढ़ा कर देशसेवा के लिए तैयार किया है। इस समय बेटा आईआईएम से प्रशिक्षण ले रहा है। दिसंबर में प्रशिक्षण पूरा होने पर सेना का अधिकारी बन कर वह देश सेवा करेगा। दो बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई।- शर्मिला देवी, गांव भगड़ाना
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26 अक्तूूबर 1997 को गांव खेड़ी निवासी हवलदार धर्मपाल सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। उस समय सात बेटियां और एक बेटे सहित परिवार को संभालना चुनौती थी। इस समय बेटा शहीद कोटे से महेंद्रगढ़ आईटीआई में बतौर लिपिक कार्यरत है। - पुष्पा देवी, वीरांगना गांव खेड़ी-तलवाना
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वर्ष 1944 के द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान गांव खेड़ी-तलवाना निवासी शहीद रामस्वरूप को बर्मा में शौर्य व साहस के कारण याद किया जाता है। उन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था। लंदन से लेकर बर्मा और इंग्लैंड तक उनके शौर्य को आज भी याद किया जाता है। उनके बेटे तेजपाल सिंह भी सेना में रहे तथा अब उनकी तीसरी पीढ़ी में उनके पौत्र शिवकुमार भी भारतीय सेना में लद्दाख में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।- रिपुदमन, शहीद रामस्वरूप के पौत्र, गांव खेड़ी-तलवाना
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वर्ष 1972 के भारत-पाक युद्ध में गांव डालनवास निवासी नायब भंवर सिंह ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। शहीद नायब भंवर सिंह की वीरांगना जहरो देवी ने दो वर्ष के बेटे व दो बेटियों के साथ परिवार को पालने में बड़ा संघर्ष किया। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में शहीद परिवार के सदस्य को नौकरी की घोषणा की थी लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है। शहीद भंवर सिंह के दो पौत्र भारतीय सेना की तैयारी कर रहे हैं। शहीद परिवारों के एक-एक सदस्यों को नौकरी दी जानी चाहिए।- राजबीर, डालनवास
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वर्तमान में अन्य देशों की तुलना में भारतीय सेना के पास आधुनिक हथियारों की संख्या काफी कम है। जवानों को सक्षम बनाने के लिए आधुनिक हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट, युद्ध के अत्याधुनिक उपकरण देने होंगे। सेना सक्षम बनेगी तो ही देशवासी चैन की नींद सो पाएंगे। सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करना होगा तभी जवान निडर होकर दुश्मन का मुंह तोड़ जवाब दे सकेंगे।- महाबीर प्रसाद, पूर्व सैनिक गांव देवास
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों को सम्मान देना सराहनीय है। ऐसे कार्यक्रमों से सैनिक परिवारों को नई ऊर्जा मिलेगी। शहीदों को सम्मान देने के लिए पूर्व सैनिकों एवं वीरांगनाओं को एक मंच देने के लिए हम अमर उजाला के आभारी हैं। यह सराहनीय पहल है। - युद्धवीर सिंह, मानद सुबेदार, गांव डेरोली जाट
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एक जवान, वीरांगना या पूर्व सैनिक जिस सम्मान का हकदार है। समाज उसे अभी तक नहीं दे पाया है। सभी को चाहिए कि वे जवानों का सम्मान करें जिससे दोगुने उत्साह के साथ देशसेवा कर सकें। भारतीय सेना शिक्षा बोर्ड से जुड़कर दिसंबर 1985 से 2013 तक देशसेवा की है। सही समय पर पर्याप्त सूचना देना भी दुश्मन की चाल को रद्द करता है। आपरेशन पवन का हिस्सा बनकर देश का विश्व में नाम रोशन किया है।- कैप्टन हंसराज, हुडिना
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1964 से लेकर 1992 तक देश के विभिन्न हिस्सों में रहकर देशसेवा की। जब 16 दिसंबर 1971 को पाक ने भारत के सामने घुटने टेकते हुए 92 हजार सैनिकों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया तो वह दिन भारतीय सेना के लिए गौरव का दिन था। भारतीय सेना का इतिहास गौरव गाथाओं को भरा पड़ा है।- सुबेदार रामस्वरूप, कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व सैनिक विकास संघ
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मुख्य अतिथि भूतपूर्व सैनिक विकास संघ के अध्यक्ष डॉ. मेजर सूरत सिंह ने कारगिल शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में कप्तान राजेंद्र सिंह खेड़ा और सुबेदार रामस्वरूप यादव उपस्थित रहे। गोष्ठी में दो शहीदों की पत्नियां भी शामिल रहीं। इस दौरान परिजनों ने शहीदों की वीरगाथाओं को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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आपरेशन रक्षक का हिस्सा रहे आनंद कुमार ने 14 अगस्त 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत दी थी। उन्होंने 23 वर्षों के संघर्ष के दौरान उन्होंने बेटे को पढ़ा कर देशसेवा के लिए तैयार किया है। इस समय बेटा आईआईएम से प्रशिक्षण ले रहा है। दिसंबर में प्रशिक्षण पूरा होने पर सेना का अधिकारी बन कर वह देश सेवा करेगा। दो बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई।- शर्मिला देवी, गांव भगड़ाना
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26 अक्तूूबर 1997 को गांव खेड़ी निवासी हवलदार धर्मपाल सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। उस समय सात बेटियां और एक बेटे सहित परिवार को संभालना चुनौती थी। इस समय बेटा शहीद कोटे से महेंद्रगढ़ आईटीआई में बतौर लिपिक कार्यरत है। - पुष्पा देवी, वीरांगना गांव खेड़ी-तलवाना
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वर्ष 1944 के द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान गांव खेड़ी-तलवाना निवासी शहीद रामस्वरूप को बर्मा में शौर्य व साहस के कारण याद किया जाता है। उन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था। लंदन से लेकर बर्मा और इंग्लैंड तक उनके शौर्य को आज भी याद किया जाता है। उनके बेटे तेजपाल सिंह भी सेना में रहे तथा अब उनकी तीसरी पीढ़ी में उनके पौत्र शिवकुमार भी भारतीय सेना में लद्दाख में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।- रिपुदमन, शहीद रामस्वरूप के पौत्र, गांव खेड़ी-तलवाना
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वर्ष 1972 के भारत-पाक युद्ध में गांव डालनवास निवासी नायब भंवर सिंह ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। शहीद नायब भंवर सिंह की वीरांगना जहरो देवी ने दो वर्ष के बेटे व दो बेटियों के साथ परिवार को पालने में बड़ा संघर्ष किया। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में शहीद परिवार के सदस्य को नौकरी की घोषणा की थी लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है। शहीद भंवर सिंह के दो पौत्र भारतीय सेना की तैयारी कर रहे हैं। शहीद परिवारों के एक-एक सदस्यों को नौकरी दी जानी चाहिए।- राजबीर, डालनवास
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वर्तमान में अन्य देशों की तुलना में भारतीय सेना के पास आधुनिक हथियारों की संख्या काफी कम है। जवानों को सक्षम बनाने के लिए आधुनिक हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट, युद्ध के अत्याधुनिक उपकरण देने होंगे। सेना सक्षम बनेगी तो ही देशवासी चैन की नींद सो पाएंगे। सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करना होगा तभी जवान निडर होकर दुश्मन का मुंह तोड़ जवाब दे सकेंगे।- महाबीर प्रसाद, पूर्व सैनिक गांव देवास
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों को सम्मान देना सराहनीय है। ऐसे कार्यक्रमों से सैनिक परिवारों को नई ऊर्जा मिलेगी। शहीदों को सम्मान देने के लिए पूर्व सैनिकों एवं वीरांगनाओं को एक मंच देने के लिए हम अमर उजाला के आभारी हैं। यह सराहनीय पहल है। - युद्धवीर सिंह, मानद सुबेदार, गांव डेरोली जाट
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एक जवान, वीरांगना या पूर्व सैनिक जिस सम्मान का हकदार है। समाज उसे अभी तक नहीं दे पाया है। सभी को चाहिए कि वे जवानों का सम्मान करें जिससे दोगुने उत्साह के साथ देशसेवा कर सकें। भारतीय सेना शिक्षा बोर्ड से जुड़कर दिसंबर 1985 से 2013 तक देशसेवा की है। सही समय पर पर्याप्त सूचना देना भी दुश्मन की चाल को रद्द करता है। आपरेशन पवन का हिस्सा बनकर देश का विश्व में नाम रोशन किया है।- कैप्टन हंसराज, हुडिना
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1964 से लेकर 1992 तक देश के विभिन्न हिस्सों में रहकर देशसेवा की। जब 16 दिसंबर 1971 को पाक ने भारत के सामने घुटने टेकते हुए 92 हजार सैनिकों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया तो वह दिन भारतीय सेना के लिए गौरव का दिन था। भारतीय सेना का इतिहास गौरव गाथाओं को भरा पड़ा है।- सुबेदार रामस्वरूप, कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व सैनिक विकास संघ