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मरीजों के लिए मददगार साबित हो रहा टीबी आरोग्य साथी एप
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नारनौल। प्रधानमंत्री के 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान को जिले महेंद्रगढ़ में तेजी से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस काम में टीबी आरोग्य साथी एप भी मरीजों के लिए मददगार साबित हो रहा है। जिले में 1098 टीबी रोगियों को सरकार की योजना के अनुसार पहचान कर मुफ्त इलाज दिया जा रहा है। यह जानकारी उपायुक्त अजय कुमार ने गत दिवस स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद दी।
डीसी ने बताया कि एसीएस हेल्थ के निर्देशानुसार जिले में 2025 से पहले ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा जारी टीबी आरोग्य साथी एप टीबी के रोगियों के लिए हर प्रकार की जानकारी दे रहा है। कोई भी नागरिक इस एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकता है।
पंजीकृत होते ही होता है इलाज
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रणनीतिक तरीके से काम किया जा रहा है। इसके लिए अलग से नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम में प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया गया है। जहां भी रोगी की सूचना मिलती है तो उसे तुरंत पंजीकृत करवाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद उसे सरकार की योजना अनुसार सहायता व इलाज दिया जाता है।
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टीबी मरीज को मिलते हैं 500 रुपये
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि पिछले माह स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष कैंपेन चलाकर जिला कारावास व शहर में घर-घर जाकर टीबी मरीजों की पहचान की। टीबी के मरीजों को सरकार की योजना के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों का इलाज चलने तक प्रतिमाह 500 रुपए भी प्रोत्साहन राशि के रुप में दिए जाते हैं।
ये लक्षण हैं तो तुरंत कराएं बलगम जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि टीबी का शुरुआती लक्षण खांसी, दो सप्ताह से ज्यादा खांसी आना, बार-बार पसीना आना, थकावट होना, वजन घटना, सांस लेने में परेशानी आना, गर्दन में गांठ आना टीबी के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे मरीजों को तुरंत अपने बलगम की जांच करानी चाहिए। बलगम की जांच क्षय रोग केंद्र नारनौल में मुफ्त में की जाती है।
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डीसी ने बताया कि एसीएस हेल्थ के निर्देशानुसार जिले में 2025 से पहले ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा जारी टीबी आरोग्य साथी एप टीबी के रोगियों के लिए हर प्रकार की जानकारी दे रहा है। कोई भी नागरिक इस एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकता है।
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पंजीकृत होते ही होता है इलाज
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रणनीतिक तरीके से काम किया जा रहा है। इसके लिए अलग से नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम में प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया गया है। जहां भी रोगी की सूचना मिलती है तो उसे तुरंत पंजीकृत करवाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद उसे सरकार की योजना अनुसार सहायता व इलाज दिया जाता है।
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टीबी मरीज को मिलते हैं 500 रुपये
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि पिछले माह स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष कैंपेन चलाकर जिला कारावास व शहर में घर-घर जाकर टीबी मरीजों की पहचान की। टीबी के मरीजों को सरकार की योजना के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों का इलाज चलने तक प्रतिमाह 500 रुपए भी प्रोत्साहन राशि के रुप में दिए जाते हैं।
ये लक्षण हैं तो तुरंत कराएं बलगम जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि टीबी का शुरुआती लक्षण खांसी, दो सप्ताह से ज्यादा खांसी आना, बार-बार पसीना आना, थकावट होना, वजन घटना, सांस लेने में परेशानी आना, गर्दन में गांठ आना टीबी के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे मरीजों को तुरंत अपने बलगम की जांच करानी चाहिए। बलगम की जांच क्षय रोग केंद्र नारनौल में मुफ्त में की जाती है।