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संगम स्नान करने से तन-मन होता है निर्मल : राहुल
Tue, 28 Jan 2025 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 28 Jan 2025 11:27 PM IST
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फोटो संख्या:57- पंडित राहुल भारद्वाज--संवाद
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महेंद्रगढ़। माघ की मौनी अमावस्या बुधवार को उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के युग्म संयोग में रहेगी। वहीं इस दिन सिद्धि और वज्र योग विद्यमान होने से यह और भी पुण्यदायक हो गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस दिन ऋषि मनु का अवतरण भी हुआ था। इसीलिए इसे मनु अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन समस्त देवी-देवता पवित्र संगम में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन गंगाजल अमृत के समान हो जाता है। मौनी अमावस्या के दिन गंगा या संगम स्नान करने से तन-मन निर्मल होता है। साथ ही निरोग काया के साथ पाप का क्षय होता है। यह अमावस्या दुख, दरिद्रता से मुक्ति और कार्यों मैं सफलता दिलाती है। इस दिन साधु, महात्मा और संत मौन रहते हैं।
भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने से विशेष ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मौन रहना आत्मा को शुद्ध करने का एक तरीका है। मौन व्रत से मन शांत होता है और व्यक्ति में सकारात्मकता का विकास होता है। इस दिन ध्यान और प्रार्थना के जरिए आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान मात्र से दैहिक (शारीरिक), भौतिक (अनजाने में किया गया पाप), दैविक (ग्रहों, गोचरों का दुर्योग) तीनों प्रकार पापों से मुक्ति मिलती है।
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इस दिन सभी देवी-देवता गंगा में वास करते हैं, जो सभी पापों और संताप से मुक्ति दिलाते हैं। इस दिन तिल तेल, तिल का लड्डू, वस्त्र, कंबल, उड़द, दर्पण और जूता दान करने से ग्रह जनित दोष से छुटकारा मिलता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच का होता है, उन्हें इस दिन दूध, चावल, खीर, मिश्री और पतासा दान करना शुभ होगा।
इसेट
पितृ दोष का करें निवारण
अगर घर में पितृ दोष है तो आज का दिन पितृ दोष दूर करने का विशेष है। इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितृ तृप्त होकर वंश वृद्धि का आशीष देते हैं। मौनी अमावस्या को स्नान-दान, जप, तप, पूजा-पाठ, हवन आदि करने से सौ गुना फल मिलता है। इसलिए आज के दिन जितना हो सके पितरों के निमित्त पूजा-पाठ, तर्पण, हवन, दान करें।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस दिन ऋषि मनु का अवतरण भी हुआ था। इसीलिए इसे मनु अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन समस्त देवी-देवता पवित्र संगम में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन गंगाजल अमृत के समान हो जाता है। मौनी अमावस्या के दिन गंगा या संगम स्नान करने से तन-मन निर्मल होता है। साथ ही निरोग काया के साथ पाप का क्षय होता है। यह अमावस्या दुख, दरिद्रता से मुक्ति और कार्यों मैं सफलता दिलाती है। इस दिन साधु, महात्मा और संत मौन रहते हैं।
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भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने से विशेष ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मौन रहना आत्मा को शुद्ध करने का एक तरीका है। मौन व्रत से मन शांत होता है और व्यक्ति में सकारात्मकता का विकास होता है। इस दिन ध्यान और प्रार्थना के जरिए आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान मात्र से दैहिक (शारीरिक), भौतिक (अनजाने में किया गया पाप), दैविक (ग्रहों, गोचरों का दुर्योग) तीनों प्रकार पापों से मुक्ति मिलती है।
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इस दिन सभी देवी-देवता गंगा में वास करते हैं, जो सभी पापों और संताप से मुक्ति दिलाते हैं। इस दिन तिल तेल, तिल का लड्डू, वस्त्र, कंबल, उड़द, दर्पण और जूता दान करने से ग्रह जनित दोष से छुटकारा मिलता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच का होता है, उन्हें इस दिन दूध, चावल, खीर, मिश्री और पतासा दान करना शुभ होगा।
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पितृ दोष का करें निवारण
अगर घर में पितृ दोष है तो आज का दिन पितृ दोष दूर करने का विशेष है। इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितृ तृप्त होकर वंश वृद्धि का आशीष देते हैं। मौनी अमावस्या को स्नान-दान, जप, तप, पूजा-पाठ, हवन आदि करने से सौ गुना फल मिलता है। इसलिए आज के दिन जितना हो सके पितरों के निमित्त पूजा-पाठ, तर्पण, हवन, दान करें।