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शिवधाम योजना: 374 में से 81 पंचायतों ने अपने स्तर पर कार्य कराया पूरा
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये राज्य के सभी उपायुक्तों के साथ विभिन्न योजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की। जिला महेंद्रगढ़ की तरफ से उपायुक्त अजय कुमार ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
बाद में डीसी ने जिले के अधिकारियों की बैठक ली तथा योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिवधाम योजना के तहत गांवों में श्मशान घाटों की चहारदीवारी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। जिले के सभी 374 गांव इस योजना में शामिल हैं। इनमें से अब तक 81 पंचायतों ने अपने स्तर पर यह काम पूरा करवा लिया है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष गांवों में माइनिंग क्षेत्र के आसपास के गांवों में सीएसआर फंड तथा अन्य गावों में डी-प्लॉन अथवा अन्य फंड से व्यवस्था की जाए। सरकार के निर्देश हैं कि अधिकतर कार्य पंचायत स्तर पर करवाए जाएं। इन कार्यों में चहारदीवारी, शेड, रास्ता व पेयजल अदि की व्यवस्था शामिल हैं। सरकार की इस योजना से दाह संस्कार के लिए आने जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें अधिकतर कार्य पंचायत स्तर पर होना है। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन, एक्सईएन सिंचाई विभाग आशुतोष यादव, डीडीपीओ ओमप्रकाश, एसडीओ पंचायतीराज राजकुमार यादव तथा लेखाकार सुनील जांगड़ा मौजूद थे।
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ग्रे वाटर मैनेजमेंट के तहत 11 गांवों का प्रस्ताव भेजा
उपायुक्त ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत पहले फेज में गंदे पानी की निकासी तथा ठोस कचरा प्रबंधन पर जिले के 16 गांवों में कार्य हो चुका है। इन सभी गांवों में कार्यों का लगातार निरीक्षण करें। फेज दो में ग्रे वाटर मैनेजमेंट के तहत 11 गांवों का प्रस्ताव भेजा है। इनमें तालाब व अन्य व्यवस्था करके पानी का उपयोग किया जाना है। इसके लिए बागवानी, पार्क या स्कूल के पेड़ पौधों में पानी की व्यवस्था की जा सकती है। इन गांवों में घाटासेर, डेरोली अहीर, दौंगड़ा अहीर, राता कलां, छापड़ा बीबीपुर, मंडलाना, मालड़ा सराय, स्यामपुरा, जड़वा, सेहलंग व धनौंदा शामिल है। जल को संरक्षित व स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है।
एमएसपी पर तीन हजार एमटी गेहूं की खरीद
जिले में रबी फसल की खरीद के संबंध में उपायुक्त ने बताया कि अब तक सरकारी रेट पर लगभग तीन हजार एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी है। सरसों को फिलहाल किसान बाजार भाव पर ही बेच रहे हैं। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में किसानों को पानी, बिजली, शौचालय सहित तमाम सुविधाएं मिलनी चाहिए। कोविड-19 के संबंध में सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन की पालना करने के निर्देश दिए।
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बाद में डीसी ने जिले के अधिकारियों की बैठक ली तथा योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिवधाम योजना के तहत गांवों में श्मशान घाटों की चहारदीवारी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। जिले के सभी 374 गांव इस योजना में शामिल हैं। इनमें से अब तक 81 पंचायतों ने अपने स्तर पर यह काम पूरा करवा लिया है।
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उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष गांवों में माइनिंग क्षेत्र के आसपास के गांवों में सीएसआर फंड तथा अन्य गावों में डी-प्लॉन अथवा अन्य फंड से व्यवस्था की जाए। सरकार के निर्देश हैं कि अधिकतर कार्य पंचायत स्तर पर करवाए जाएं। इन कार्यों में चहारदीवारी, शेड, रास्ता व पेयजल अदि की व्यवस्था शामिल हैं। सरकार की इस योजना से दाह संस्कार के लिए आने जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें अधिकतर कार्य पंचायत स्तर पर होना है। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन, एक्सईएन सिंचाई विभाग आशुतोष यादव, डीडीपीओ ओमप्रकाश, एसडीओ पंचायतीराज राजकुमार यादव तथा लेखाकार सुनील जांगड़ा मौजूद थे।
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ग्रे वाटर मैनेजमेंट के तहत 11 गांवों का प्रस्ताव भेजा
उपायुक्त ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत पहले फेज में गंदे पानी की निकासी तथा ठोस कचरा प्रबंधन पर जिले के 16 गांवों में कार्य हो चुका है। इन सभी गांवों में कार्यों का लगातार निरीक्षण करें। फेज दो में ग्रे वाटर मैनेजमेंट के तहत 11 गांवों का प्रस्ताव भेजा है। इनमें तालाब व अन्य व्यवस्था करके पानी का उपयोग किया जाना है। इसके लिए बागवानी, पार्क या स्कूल के पेड़ पौधों में पानी की व्यवस्था की जा सकती है। इन गांवों में घाटासेर, डेरोली अहीर, दौंगड़ा अहीर, राता कलां, छापड़ा बीबीपुर, मंडलाना, मालड़ा सराय, स्यामपुरा, जड़वा, सेहलंग व धनौंदा शामिल है। जल को संरक्षित व स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है।
एमएसपी पर तीन हजार एमटी गेहूं की खरीद
जिले में रबी फसल की खरीद के संबंध में उपायुक्त ने बताया कि अब तक सरकारी रेट पर लगभग तीन हजार एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी है। सरसों को फिलहाल किसान बाजार भाव पर ही बेच रहे हैं। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में किसानों को पानी, बिजली, शौचालय सहित तमाम सुविधाएं मिलनी चाहिए। कोविड-19 के संबंध में सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन की पालना करने के निर्देश दिए।