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थर्मल स्क्रीनिंग के बाद स्टाफ एवं विद्यार्थियों को दिया प्रवेश
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महेंद्रगढ़। सरकार के आदेश पर तीन महीने बाद जिले के सभी स्कूल वीरवार को खुल गए हैं। पहले दिन विद्यालयों में चहल पहल रही। एसओपी के निर्देशानुसार 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूलों में बुलाए गए। विद्यालय में स्टाफ एवं विद्यार्थियों की एंट्री थर्मल स्क्रीनिंग के बाद हुई। स्कूल स्टाफ ने विद्यार्थियों के परिजन सहमति पत्र तथा मास्क चेक किए। विद्यार्थियों को सोशल डिस्टेसिंग पर बैठाया गया। कई दिन बाद विद्यालय खुलने पर विद्यार्थियों ने आपस में हाल चाल जाना तथा अध्यापकों से भी रूबरू हुए।
बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह से प्रदेश सरकार ने 16 अप्रैल को शिक्षण संस्थाओं को बंद कर दिया था। अभी कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे कम हो गया है। प्रदेश सरकार ने 16 जुलाई से 9वीं से 12वीं कक्षा तक स्कूल खोलने का निर्णय लिया था। 23 जुलाई को छठी से 8वीं तक के स्कूल भी खोल जाएंगे। शिक्षण संस्थाओं ने पहले ही सरकार के निर्देश पर भवन एवं बसों को सैनिटाइज करवा दिया था। पहले दिन बच्चे स्कूल में आकर काफी खुश दिखाई दिए। उन्होंने अपने साथियों का हालचाल जाना तथा अध्यापकों से भी रूबरू हुए। वीरवार को 9 से 12 बजे तक स्कूल लगाए गए। लगभग आधे-आधे घंटे छह पीरियड लगाए। इंटरवल नहीं किया गया। एक कक्षा में मात्र 30 विद्यार्थी ही बैठाए गए थे। संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति हालांकि कम ही रही क्योंकि कई अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगाए जाने से पहले भेजने को लेकर आशंकित हैं। वहीं, दूसरी ओर कई छात्र अपने शिक्षण संस्थानों के फिर से खुलने से काफी उत्साहित थे।
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रोस्टर सिस्टम के तहत खोले गए स्कूल
सरकार के आदेशानुसार 50 प्रतिशत बच्चों के बुलाने के आदेश थे। कई स्कूलों ने ईवन और ऑड फार्मूला अपनाया। सोमवार, बुधवार तथा शुक्रवार को ईवन तथा मंगलवार, वीरवार तथा शनिवार को ऑड रोल नंबर के विद्यार्थी बुलाए गए हैं। किन्हीं स्कूलों ने 1 से 30 रोल नंबर तक आज बुलाए तथा शेष अगले दिन बुलाए हैं।
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अध्यापक कर रहे हैं दो-दो ड्यूटी
स्कूल खुल जाने के बाद अध्यापकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्कूलों में मात्र 50 प्रतिशत बच्चे बुलाने की वजह से उनको ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरह कक्षाएं पढ़नी पड़ रही है। अध्यापक शुक्रवार को स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को ऑफलाइन पढ़ाई करवाई। उसके बाद स्कूल में नहीं आने वाले बच्चों को वही चेपटर ऑनलाइन क्लास लेकर पढ़ाना पड़ा।
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ऑनलाइन से अच्छी है कक्षा में की जाने वाली पढ़ाई
अश्वनी, रोहित, लक्ष्य, हिमांशु, अंकित आदि ने कहा कि पढ़ाई करने का असली मजा कक्षा में ही है। कक्षा में रहकर अध्यापकों से खुलकर डाउट पूछे जा सकते हैं और समझना भी अच्छे से आता है। ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की समस्या रहती है जिस वजह से आवाज कट-कट कर आती है। डाउट भी क्लीयर नहीं हो पाते। उन्होंने कहा कि वो कई दिनों से स्कूल खुलने का इंतजार कर रहे थे लेकिन सरकार ने आज से स्कूल खोल दिए हैं। आज स्कूल आकर बहुत अच्छा भी लगा।
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वर्जन:
सरकार के निर्देशानुसार स्कूल खोल दिए गए हैं। स्कूलों में एसओपी नियमों का पालन किया जा रहा है। अगर कोई स्कूल एसओपी के नियमों की पालना नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।
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बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह से प्रदेश सरकार ने 16 अप्रैल को शिक्षण संस्थाओं को बंद कर दिया था। अभी कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे कम हो गया है। प्रदेश सरकार ने 16 जुलाई से 9वीं से 12वीं कक्षा तक स्कूल खोलने का निर्णय लिया था। 23 जुलाई को छठी से 8वीं तक के स्कूल भी खोल जाएंगे। शिक्षण संस्थाओं ने पहले ही सरकार के निर्देश पर भवन एवं बसों को सैनिटाइज करवा दिया था। पहले दिन बच्चे स्कूल में आकर काफी खुश दिखाई दिए। उन्होंने अपने साथियों का हालचाल जाना तथा अध्यापकों से भी रूबरू हुए। वीरवार को 9 से 12 बजे तक स्कूल लगाए गए। लगभग आधे-आधे घंटे छह पीरियड लगाए। इंटरवल नहीं किया गया। एक कक्षा में मात्र 30 विद्यार्थी ही बैठाए गए थे। संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति हालांकि कम ही रही क्योंकि कई अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगाए जाने से पहले भेजने को लेकर आशंकित हैं। वहीं, दूसरी ओर कई छात्र अपने शिक्षण संस्थानों के फिर से खुलने से काफी उत्साहित थे।
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रोस्टर सिस्टम के तहत खोले गए स्कूल
सरकार के आदेशानुसार 50 प्रतिशत बच्चों के बुलाने के आदेश थे। कई स्कूलों ने ईवन और ऑड फार्मूला अपनाया। सोमवार, बुधवार तथा शुक्रवार को ईवन तथा मंगलवार, वीरवार तथा शनिवार को ऑड रोल नंबर के विद्यार्थी बुलाए गए हैं। किन्हीं स्कूलों ने 1 से 30 रोल नंबर तक आज बुलाए तथा शेष अगले दिन बुलाए हैं।
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अध्यापक कर रहे हैं दो-दो ड्यूटी
स्कूल खुल जाने के बाद अध्यापकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्कूलों में मात्र 50 प्रतिशत बच्चे बुलाने की वजह से उनको ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरह कक्षाएं पढ़नी पड़ रही है। अध्यापक शुक्रवार को स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को ऑफलाइन पढ़ाई करवाई। उसके बाद स्कूल में नहीं आने वाले बच्चों को वही चेपटर ऑनलाइन क्लास लेकर पढ़ाना पड़ा।
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ऑनलाइन से अच्छी है कक्षा में की जाने वाली पढ़ाई
अश्वनी, रोहित, लक्ष्य, हिमांशु, अंकित आदि ने कहा कि पढ़ाई करने का असली मजा कक्षा में ही है। कक्षा में रहकर अध्यापकों से खुलकर डाउट पूछे जा सकते हैं और समझना भी अच्छे से आता है। ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की समस्या रहती है जिस वजह से आवाज कट-कट कर आती है। डाउट भी क्लीयर नहीं हो पाते। उन्होंने कहा कि वो कई दिनों से स्कूल खुलने का इंतजार कर रहे थे लेकिन सरकार ने आज से स्कूल खोल दिए हैं। आज स्कूल आकर बहुत अच्छा भी लगा।
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वर्जन:
सरकार के निर्देशानुसार स्कूल खोल दिए गए हैं। स्कूलों में एसओपी नियमों का पालन किया जा रहा है। अगर कोई स्कूल एसओपी के नियमों की पालना नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।