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Mahendragarh-Narnaul News: पानी की गुणवत्ता खराब होने पर जलघरों को भरने से मना किया
Sun, 04 May 2025 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 04 May 2025 12:02 AM IST
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फोटो संख्या:51- पंप हाउस एनबी-2 के पास पानी में जमा कचरा--संवाद
- फोटो : संवाद
महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ क्षेत्र में जेएलएन नहर से तीन दिन ही पानी मिल पाया। वह भी गुणवत्ता खराब होने के कारण जन स्वास्थ्य विभाग ने जलघरों को भरने से मना कर दिया। विभाग ने क्षेत्र के किसी भी जलघर को पानी से नहीं भरा। इससे शहर में पेयजल के लिए संकट खड़ा हो सकता है।
शनिवार को जेएलएन नहर में साल्हावास पंप हाउस से पानी बंद कर रेवाड़ी आपूर्ति शुरू कर दी गई। अब तीन दिन बाद ही महेंद्रगढ़ में पानी छोड़ा जा सकेगा। जब जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नहर और सिंचाई विभाग के सामने पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। बताया गया कि 24 दिनों से नहर बंद थी। इसके कारण पत्ते गिरने और पेड़ों की टहनियां गिरने के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। 20 वर्षों के दौरान पहली बार जेएलएन नहर में पानी की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई कि इसे जलघरों तक नहीं पहुंचाया जा सका। इस बार पानी का रंग भी काला है।
महेंद्रगढ़ में तीन टैंक सूख चुके : गांव देवास जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक हैं। इनमें से तीन सूख चुके हैं। एक में कुछ पानी है। शुक्रवार शाम को जब जेएलएन नहर के देवास पंप हाउस से देवास जल परियोजना में पानी छोड़ा गया तो पानी की गुणवत्ता को लेकर कर्मचारियों ने विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जन स्वास्थ्य विभाग के उपमंडल अधिकारी जीयाराम ने मौके पर पहुंचकर नहर से टैंक में जलापूर्ति बंद करा दी। जिले की करीब 65 नहरें, 37 बड़े जलघरों व नहरों से जुड़े 427 जोहड़ों में से अधिकांश में पानी सूख चुका है। ऐसे में जिले में पेयजल के लिए जेएलएन पर ही आधारित रहना पड़ता है।
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शनिवार को जेएलएन नहर में साल्हावास पंप हाउस से पानी बंद कर रेवाड़ी आपूर्ति शुरू कर दी गई। अब तीन दिन बाद ही महेंद्रगढ़ में पानी छोड़ा जा सकेगा। जब जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नहर और सिंचाई विभाग के सामने पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। बताया गया कि 24 दिनों से नहर बंद थी। इसके कारण पत्ते गिरने और पेड़ों की टहनियां गिरने के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। 20 वर्षों के दौरान पहली बार जेएलएन नहर में पानी की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई कि इसे जलघरों तक नहीं पहुंचाया जा सका। इस बार पानी का रंग भी काला है।
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महेंद्रगढ़ में तीन टैंक सूख चुके : गांव देवास जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक हैं। इनमें से तीन सूख चुके हैं। एक में कुछ पानी है। शुक्रवार शाम को जब जेएलएन नहर के देवास पंप हाउस से देवास जल परियोजना में पानी छोड़ा गया तो पानी की गुणवत्ता को लेकर कर्मचारियों ने विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जन स्वास्थ्य विभाग के उपमंडल अधिकारी जीयाराम ने मौके पर पहुंचकर नहर से टैंक में जलापूर्ति बंद करा दी। जिले की करीब 65 नहरें, 37 बड़े जलघरों व नहरों से जुड़े 427 जोहड़ों में से अधिकांश में पानी सूख चुका है। ऐसे में जिले में पेयजल के लिए जेएलएन पर ही आधारित रहना पड़ता है।

फोटो संख्या:51- पंप हाउस एनबी-2 के पास पानी में जमा कचरा--संवाद- फोटो : संवाद
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