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रक्षाबंधन पर्व आज
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रक्षा बंधन पर्व के चलते शहर के बाजारों में दिनभर रौनक रही। बहनों ने अपने भाईयों के लिए जमकर खरीदारी की। इसके चलते राखियों, मिठाईयों व सर्राफा की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। बस स्टैंड पर भी आने-जाने वाली महिलाओं की खासी भीड़भाड़ देखी गई। इस बार कोरोना के कारण राखियों पर महंगाई की मार देखने को मिली। बाजारों में दस रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक राखियां मिल रही है। कुछ महिलाओं ने अपने भाईयों के लिए सोने-चांदी की राखियां आर्डर पर भी बनवाई है।
सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी महिलाओं के लिए रक्षाबंधन पर्व पर रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा का तोहफा दिया है। शनिवार को भी बस स्टैंड पर आने-जाने वाली महिलाओं की काफी भीड़ रही। रविवार को ओर अधिक भीड़ देखने को मिल सकती है। वहीं विभाग ने भी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए विभिन्न रूटों पर निर्धारित से अधिक बसें चलाने की योजना बनाई है।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व सावन शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि सुबह 6 बजकर 12 मिनट भद्रा समाप्ति के पश्चात रक्षाबंधन करना शुभ है। आचार्य ने बताया कि राखी बांधने का शुभ चौघड़ियां मुहूर्त लाभ - सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक, अमृत - सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक तथा शुभ- दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक है। उन्होंने बताया कि इस दिन विप्र समाज द्वारा श्रावणी उपाकर्म का आयोजन भी किया जाता है जिसके अंतर्गत ब्राह्मण जल में खड़े होकर ऋषियों व पितरों का तर्पण करते है और हवन के पश्चात नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
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सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी महिलाओं के लिए रक्षाबंधन पर्व पर रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा का तोहफा दिया है। शनिवार को भी बस स्टैंड पर आने-जाने वाली महिलाओं की काफी भीड़ रही। रविवार को ओर अधिक भीड़ देखने को मिल सकती है। वहीं विभाग ने भी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए विभिन्न रूटों पर निर्धारित से अधिक बसें चलाने की योजना बनाई है।
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भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व सावन शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि सुबह 6 बजकर 12 मिनट भद्रा समाप्ति के पश्चात रक्षाबंधन करना शुभ है। आचार्य ने बताया कि राखी बांधने का शुभ चौघड़ियां मुहूर्त लाभ - सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक, अमृत - सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक तथा शुभ- दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक है। उन्होंने बताया कि इस दिन विप्र समाज द्वारा श्रावणी उपाकर्म का आयोजन भी किया जाता है जिसके अंतर्गत ब्राह्मण जल में खड़े होकर ऋषियों व पितरों का तर्पण करते है और हवन के पश्चात नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
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