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सावर्जनिक शौचालय बदहाल, कैसे सुधरेगी स्वच्छता रैंकिंग
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नगर परिषद कार्यालय में बनाया गया शौचालय, जिसमें सफाई नाम की चीज नहीं है। संवाद
- फोटो : Narnol
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स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 की शुरुआत हो चुकी है, मगर नगर परिषद अभी भी आधी-अधूरी तैयारियों के बीच सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग की उम्मीद लगाए बैठी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न स्थानों पर नगर परिषद द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बदहाल है। साफ-सफाई के अभाव में शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। कई शौचालयों के दरवाजे ही नहीं है। लेकिन इन शौचालयों की स्थिति को सुधारने के लिए परिषद ने अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है। ऐसे में नगर परिषद को कैसे स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 में पहले से बेहतर रैंकिंग मिल पाएगी।
स्वच्छता र्स्वेक्षण में रैंकिंग सुधार के लिए नगर परिषद प्रयास कर रही है। शहर में सफाई नियमित रूप से करवा रही है। इसके अलावा सर्वेक्षण के लिए निर्धारित टॉस्क पर कार्य कर रही है, मगर शौचालय की तरफ नप ने ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में शौचालयों की अनदेखी कहीं नगर परिषद के बेहतर रैंकिंग के सपने को धूमिल न कर दे, क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 में शहर में कोई हाईटेक शौचालय नहीं होने, साफ-सफाई व रखरखाव नहीं होने पर शून्य नंबर मिले थे।
बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 की जनवरी से शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की टीम सर्वेक्षण के कार्य में जुट गई है। हालांकि यह टीम नारनौल शहर का कब निरीक्षण करेगी, यह अभी तक जानकारी नहीं है। मगर यह तो तय है कि टीम सर्वेक्षण के लिए कभी भी शहर में दस्तक दे सकती है। ऐसे में नगर परिषद ने अगर टीम के आने से पहले शहर में बने सार्वजनिक शौचालयों का कायाकल्प नहीं किया तो शौचालयों के रखरखाव के लिए निर्धारित किए अंक जरूर कट सकते हैं। जोकि स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने की बजाय खराब कर सकते है। शहर में विश्राम गृह के सामने, महेंद्रगढ़ रोड आईटीआई के पास, टीबी अस्पताल के पास, किला रोड पर, पुरानी सराय में रविदास मंदिर से आगे गंदे नाले के पास, बहरोड रोड राजकीय महिला महाविद्यालय के पास, नगर परिषद के अंदर सार्वजनिक शौचालय बने हुए है। इनमें कुछ स्थानों पर मोबाइल टायलेट भी रखे गए हैं। मगर बिना साफ-सफाई व पानी एवं टूटे दरवाजे, शीट, वॉशबेसिन के कारण चलते इनकी हालत बद से बदतर हो रही है। इस कारण आमजन द्वारा इनका उपयोग करना तो दूर इनके नजदीक से भी नहीं गुजरते हैं।
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नप में बना सार्वजनिक शौचालय ही बदहाल
शहर के बने या रखे गए सार्वजनिक शौचालय ही नहीं नगर परिषद के मुख्य द्वार के अंदर बना सार्वजनिक शौचालय ही साफ-सफाई के अभाव में बदहाल हो रहा है। शौचालय में पानी की सुविधा नहीं होने के कारण इससे काफी दुर्धंग आती है, मगर आसपास अन्य कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण मजबूरन स्थानीय दुकानदारों को यहीं शौच के लिए आना पड़ता है। मुख्य द्वार पर शौचालय होने के कारण नगर परिषद में प्रतिदिन कार्य के लिए आने वाले लोगों को दुर्धंगमय वातावरण के चलते अपने मुंह व नाक पर रुमाल या कपड़ा रखकर आवागमन करना पड़ता है।
गत दो वर्षों की जिले की परिषद व पालिकाओं की रैंकिंग
स्थान कुल शहर शामिल रैंकिंग 2020 2021
नारनौल 95 83 85
महेंद्रगढ़ 200 190 190
नांगल चौधरी 720 218 555
कनीना 720 595 706
अटेली 720 582 682
सार्वजनिक शौचालय के रखरखाव व मरम्मत कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। टेंडर जारी होने के बाद सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत, रखरखाव व साफ-सफाई आदि कार्य करवाए जाएंगे। अंकित वशिष्ठ, एक्सईएन, नगर परिषद नारनौल।
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स्वच्छता र्स्वेक्षण में रैंकिंग सुधार के लिए नगर परिषद प्रयास कर रही है। शहर में सफाई नियमित रूप से करवा रही है। इसके अलावा सर्वेक्षण के लिए निर्धारित टॉस्क पर कार्य कर रही है, मगर शौचालय की तरफ नप ने ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में शौचालयों की अनदेखी कहीं नगर परिषद के बेहतर रैंकिंग के सपने को धूमिल न कर दे, क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 में शहर में कोई हाईटेक शौचालय नहीं होने, साफ-सफाई व रखरखाव नहीं होने पर शून्य नंबर मिले थे।
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बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 की जनवरी से शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की टीम सर्वेक्षण के कार्य में जुट गई है। हालांकि यह टीम नारनौल शहर का कब निरीक्षण करेगी, यह अभी तक जानकारी नहीं है। मगर यह तो तय है कि टीम सर्वेक्षण के लिए कभी भी शहर में दस्तक दे सकती है। ऐसे में नगर परिषद ने अगर टीम के आने से पहले शहर में बने सार्वजनिक शौचालयों का कायाकल्प नहीं किया तो शौचालयों के रखरखाव के लिए निर्धारित किए अंक जरूर कट सकते हैं। जोकि स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने की बजाय खराब कर सकते है। शहर में विश्राम गृह के सामने, महेंद्रगढ़ रोड आईटीआई के पास, टीबी अस्पताल के पास, किला रोड पर, पुरानी सराय में रविदास मंदिर से आगे गंदे नाले के पास, बहरोड रोड राजकीय महिला महाविद्यालय के पास, नगर परिषद के अंदर सार्वजनिक शौचालय बने हुए है। इनमें कुछ स्थानों पर मोबाइल टायलेट भी रखे गए हैं। मगर बिना साफ-सफाई व पानी एवं टूटे दरवाजे, शीट, वॉशबेसिन के कारण चलते इनकी हालत बद से बदतर हो रही है। इस कारण आमजन द्वारा इनका उपयोग करना तो दूर इनके नजदीक से भी नहीं गुजरते हैं।
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नप में बना सार्वजनिक शौचालय ही बदहाल
शहर के बने या रखे गए सार्वजनिक शौचालय ही नहीं नगर परिषद के मुख्य द्वार के अंदर बना सार्वजनिक शौचालय ही साफ-सफाई के अभाव में बदहाल हो रहा है। शौचालय में पानी की सुविधा नहीं होने के कारण इससे काफी दुर्धंग आती है, मगर आसपास अन्य कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण मजबूरन स्थानीय दुकानदारों को यहीं शौच के लिए आना पड़ता है। मुख्य द्वार पर शौचालय होने के कारण नगर परिषद में प्रतिदिन कार्य के लिए आने वाले लोगों को दुर्धंगमय वातावरण के चलते अपने मुंह व नाक पर रुमाल या कपड़ा रखकर आवागमन करना पड़ता है।
गत दो वर्षों की जिले की परिषद व पालिकाओं की रैंकिंग
स्थान कुल शहर शामिल रैंकिंग 2020 2021
नारनौल 95 83 85
महेंद्रगढ़ 200 190 190
नांगल चौधरी 720 218 555
कनीना 720 595 706
अटेली 720 582 682
सार्वजनिक शौचालय के रखरखाव व मरम्मत कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। टेंडर जारी होने के बाद सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत, रखरखाव व साफ-सफाई आदि कार्य करवाए जाएंगे। अंकित वशिष्ठ, एक्सईएन, नगर परिषद नारनौल।

विश्राम गृह के सामने रखे शौचालय का टूटा गेट । संवाद- फोटो : Narnol