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गुलाबी सुंडी पहुंचाता है कपास की फसल को हानि : डॉ. अजय यादव

Sun, 25 Jul 2021 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 11:27 PM IST
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Pink worm causes damage to cotton crop : Dr. Ajay Yadav
उपमंडल कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़ डॉ. अजय यादव। संवाद - फोटो : Narnol
वेदप्रकाश शर्मा
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उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. अजय यादव ने कपास की फसल में लगने वाली गुलाबी सुंडी की परख और उसके निदान के लिए किसानों को कुछ आसान उपाय बताए हैं। जिनकी सहायता से किसान कृषि विशेषज्ञ का परामर्श मिलने से पहले प्राथमिक उपचार के तौर पर फसल का बचाव कर सकता है।
उत्तर भारत में गुलाबी सुंडी कपास की फसल को मध्यम, अंतिम अवस्था में नुकसान करने वाला कीट है। इस कीट की सुंडियां टिंडे के अंदर से अपना भोजन ग्रहण करती हैं। टिंडे खुलने के पश्चात गुलाबी सुंडी द्वारा भोजन किए हुए भाग के आसपास बीज, रुई की गुणवत्ता खराब हो जाती है और टिंडे भी पूरी तरह से नहीं खुलते। गुलाबी सुंडी के आक्रमण का टिंडे को बाहर से देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है।
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गुलाबी सुंडी के प्रकोप की निगरानी, नियंत्रण के लिए दो फेरोमोन ट्रेप प्रति एकड़ की दर से कपास की फसल में बिजाई के 40 से 45 दिन बाद अवश्य लगाएं। फूल डोडी, फूल आने की अवस्था और टिंडे बनते समय कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप की निगरानी के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम खेत का निरीक्षण करते रहें। गुलाब की शक्ल वाला फूल गुलाबी सुंडी के आक्रमण का प्रतीक है। बिजाई के 60 दिन बाद एक छिड़काव नीम आधारित कीटनाशक का 5 मिली लीटर प्रति लीटर के हिसाब से करें। गुलाबी सुंडी से प्रभावित नीचे गिर टिंडों, फूल डोडी, फूल आदि को एकत्रित कर नष्ट कर दें। जहां पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप हो वहां पर कपास की बिजाई के 90 से 120 दिन के बीच में अंडा परजीवी ट्राईकोग्रामा में बेक्टीरी 60,000 अंडे प्रति एकड़ के हिसाब से छोड़ें और कीटनाशक का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें। जब गुलाबी सुंडी का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर के ऊपर जैसे 20 टिंडों में से 2 टिंडों में (अर्थात 10% टिंडों में) गुलाबी या सफेद लारवा दिखाई दे और फेरोमोन ट्रैप में 8 प्रौढ़ पतंगे प्रति फेरोमोन ट्रेप में लगातार तीन दिन तक मिलें तो रासायनिक कीटनाशकों से नियंत्रण करना चाहिए। जिस खेत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप ना हुआ हो, उस कपास को अलग से चुगाई करें, अलग ही भंडारित करें। कपास की अंतिम चुगाई के बाद खेत में बचे अधखुले, खराब टिंडों को नष्ट करने के लिए खेत में भेड़, बकरी आदि जानवरों को चरने दें। कपास की चुनाई व छड़ियों की कटाई आर्थिक लाभ के हिसाब से जितना जल्दी हो सके कर लेनी चाहिए। छड़ियों को खेत में से दूर गांव में जमीन पर लंबवत खड़ा करें।
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डॉ. अजय यादव ने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि उक्त बातों में से कोई भी लक्षण नजर आने पर तुरंत नजदीकी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से परामर्श कर उनके बताए अनुसार उपचार करना चाहिए। किसान को अपनी तरफ से कोई भी हिट एंड ट्रायल मेथड नहीं अपनाना चाहिए। संवाद
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