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Mahendragarh-Narnaul News: अटेली में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान
Wed, 25 Sep 2024 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 25 Sep 2024 01:18 AM IST
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फोटो नंबर-13अटेली में एक मकान की छत पर बैठे बंदर। संवाद
मंडी अटेली। कस्बे में निरंतर बढ़ रहे बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। लोग नगर पालिका प्रशासन से बार-बार छुटकारा दिलाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
कस्बे में बंदरों से कारण महिलाएं और बच्चों में भय है। बंदर हर रोज किसी न किसी वार्ड में बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों व महिलाओं पर हमला कर रहे हैं। बस स्टैंड, झंडा चौक, नांगल बैरियर तथा सरकारी स्कूल के आसपास बंदरों के झुंड देखे जा सकते हैं। बंदरों की बढ़ रही संख्या के चलते गलियों में लोगों का निकला मुश्किल हो गया है।
बंदरों की टोलियां घरों में घुस कर घर में रखा सामान उठाकर ले जाती हैं। कई बार देखने में आया है कि बंदर बेखौफ होकर स्कूल जाने वाले बच्चों तथा राहगीरों पर भी हमला बोल देते हैं। बंदरों के डर से गलियों में व छतों पर बच्चे खेलने से डरने लगे हैं। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करती रहती हैं। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े भी उठाकर लेकर जाते हैं। लोग बंदरों के उत्पात से बचने के लिए अपने घरों के आगे जाल लगवा रहे हैं।
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कस्बे में बंदरों की समस्या बढ़ती ही जा रही है। कस्बे में बंदरों से परेशान लोगों की शिकायत आ रही है। लोगों को इनके उत्पात से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा। -अनिल कुमार, सचिव नगरपालिका अटेली।
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दो से तीन दिन में बंदरों के काट खाने का केस आ जाता है। बंदर के काटने के बाद रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। जो केस अस्पताल में आ रहे हैं उनमें से कुछ केस कुत्ते के काटने के भी हैं। मरीजों के लिए अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध है।-डॉ. उमेश, चिकित्सा अधिकारी, अटेली
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कस्बे में बंदरों से कारण महिलाएं और बच्चों में भय है। बंदर हर रोज किसी न किसी वार्ड में बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों व महिलाओं पर हमला कर रहे हैं। बस स्टैंड, झंडा चौक, नांगल बैरियर तथा सरकारी स्कूल के आसपास बंदरों के झुंड देखे जा सकते हैं। बंदरों की बढ़ रही संख्या के चलते गलियों में लोगों का निकला मुश्किल हो गया है।
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बंदरों की टोलियां घरों में घुस कर घर में रखा सामान उठाकर ले जाती हैं। कई बार देखने में आया है कि बंदर बेखौफ होकर स्कूल जाने वाले बच्चों तथा राहगीरों पर भी हमला बोल देते हैं। बंदरों के डर से गलियों में व छतों पर बच्चे खेलने से डरने लगे हैं। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करती रहती हैं। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े भी उठाकर लेकर जाते हैं। लोग बंदरों के उत्पात से बचने के लिए अपने घरों के आगे जाल लगवा रहे हैं।
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कस्बे में बंदरों की समस्या बढ़ती ही जा रही है। कस्बे में बंदरों से परेशान लोगों की शिकायत आ रही है। लोगों को इनके उत्पात से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा। -अनिल कुमार, सचिव नगरपालिका अटेली।
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दो से तीन दिन में बंदरों के काट खाने का केस आ जाता है। बंदर के काटने के बाद रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। जो केस अस्पताल में आ रहे हैं उनमें से कुछ केस कुत्ते के काटने के भी हैं। मरीजों के लिए अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध है।-डॉ. उमेश, चिकित्सा अधिकारी, अटेली