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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   no ran basera in city

जिला में नहीं कोई रैन बसेरा, कहां जाएं बेघर

Thu, 26 Nov 2015 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/नारनौल
अमर उजाला ब्यूरो/नारनौल Updated Thu, 26 Nov 2015 12:43 AM IST
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जिला महेंद्रगढ़ में हजारों लोग बेघर हैं, जो फुटपाथ, रेलवे स्टेशन या बस स्टेंड आदि पर खुले आसमान के नीचे अपनी रात गुजारते हैं। अब ठंड शुरू हो गई है तथा यह लगातार बढ़ने भी लगी है।
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रात का तापमान भी इन दिनों 8 से 9 डिग्री के बीच चल रहा है। ऐसे में इन लोगों को छत की जरूरत पड़ने लगी है। इसके लिए सरकार व जिला प्रशासन रैन बसेरे बनाता है, मगर जिले में अभी तक एक भी रैन बसेरा नहीं बना।
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हालांकि दो रैन बसेरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, मगर वे कब तक बनेंगे, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। शहर में एक रैन बसेरा बनना था लेकिन नप ने दो रैन बसेरों का निर्माण शुरू करवा दिया।
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फिलहाल दोनों का काम अधर में लटका हुआ है। उनकी सुस्त रफ्तार से तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सर्दियों के मौसम में वे शायद ही तैयार हो पाए। इसके कारण खुले आसमान के नीचे सोने वाले लोग अब इनकी जरूरत महसूस करने लगे हैं।

क्षेत्र में बढ़ती ठंड से खुले आसमान के नीचे सोने वाले लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। जिले में रैन बसेरे की सुविधा भी अब ठंडे बस्ते में चली गई है।

शहर में इस समय कहीं भी प्रशासन द्वारा रैन बसेरे की सुविधा नहीं है। रैन बसेरा न होने के कारण जरूरतमंद लोगों को रात भारी पड़ रही है क्योंकि रैन बसेरा न होने से खास तौर से गरीब लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रैन बसेरे की सुविधा न होने के कारण या तो लोग रेलवे स्टेशन या फिर बस स्टैंड के पास रात गुजार रहे हैं। शहर में लंबे समय से जरूरतमंद लोग इन्हीं स्थानों में खुले में रात भर ठंड का मुकाबला करते हैं।

गत वर्ष रेडक्रास कार्यालय में था रैन बसेरा

शहर में पिछले साल रैन बसेरा जिला रेडक्रास द्वारा पुरानी कचहरी के पास अपने कार्यालय में अस्थायी रूप से बनाया गया था। यह रैन बसेरा कुछ समय तक तो चला और रेडक्रास ऑफिस के लघु सचिवालय में चले जाने के बाद वह भी बंद हो गया। फिलहाल शहर में कहीं भी रैन बसेरे की सुविधा नहीं है।

जब शहर में रैन बसेरे को लेकर जानकारी ली गई तो पता चला कि प्रशासन रैन बसेरे को बस स्टैंड के आसपास बनाने के प्रयास में है। परंतु अभी तक कहीं जगह न मिलने के कारण मामला अधर में लटका हुआ है। प्रशासन अभी रैन बसेरे को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।

जरूरतमंद लोग ठंड में भी रैन बसेरा नहीं होने के कारण कहीं भी खुले में रात बिताने के लिए मजबूर हैं। पुराने अस्थायी रैन बसेरे में तो इन दिनों ताला लगा हुआ और वहां साफ-सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं हैं। बेकार बंद पड़े इस भवन को जब तक कहीं रैन बसेरा न बने दोबारा से चालू किया जा सकता है।

बनना था एक शुरू कर दिए दो
शहर में एक रैन बसेरे का निर्माण होना था। इसके लिए एक साल पूर्व नप में बजट भी आ गया था, मगर नप ने एक की बजाए दो का निर्माण एक साथ शुरू कर दिया। इसके कारण दोनों का निर्माण कार्य अधर में लटक गया था, अब दुबारा बजट पास कर दोनों का निर्माण कराया जा रहा है। बीच में यह कार्य करीब पांच महीने बंद रहा था।

20-20 लाख से बनेंगे दो रैन बसेरे
शहर में बस स्टेंड के पास बने सुलभ शौचालय तथा अस्पताल के बाहर बने सुलभ शौचालय के ऊपर दो रैन बसेरों का निर्माण किया जा रहा है, मगर यह निर्माण बड़ी ही धीमी गति से हो रहा है। जिसके निर्माण में अभी दो से तीन माह का समय लग सकता है।

शहर नारनौल में रैन बसेरे बनाने की योजना एक साल से है। इसके लिए हमने नगर परिषद को रैन बसेरे के लिए रुपये जमा करवाए थे। प्रशासनिक अधिकारी ही इस बारे में सही बता सकते हैं। -मनोरंजन शर्मा, सचिव रेडक्रास


बढ़ती ठंड को देखते हुए नारनौल में बस स्टेंड के आसपास रैन बसेरा बनाने का काम किया जा रहा है। जल्द ही 20-20 लाख रुपये के दो नए रैन बसेरे बनकर तैयार हो जाएंगे। इन सर्दियों से उनमें जरूरतमंद लोग रह सकेंगे। - बीएन भारती, ईओ, नगर परिषद नारनौल
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