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कब्जा नहीं देने पर उपभोक्ता फोरम ने हुडा पर 50 हजार का जुर्माना लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2016 12:12 AM IST
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नारनौल। जिला उपभोक्ता फोरम ने नई मंडी निवासी लक्ष्मी नारायण गर्ग को उनके प्लाट पर कब्जा नहीं देने पर हुडा को शिकायतकर्ता की क्षतिपूर्ति के लिए पचास हजार रुपये जुर्माना और उसी सेक्टर में उसी साइज का प्लाट और 5500 रुपये वकील खर्चे के आदेश दिए हैं।
नई मंडी निवासी लक्ष्मीनारायण गर्ग ने 15 अक्तूबर 2015 को अपने वकील राव कृष्ण महता के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया था कि उसका हुडा में एक प्लाट नं. 447 है। शिकायतकर्ता ने हुडा द्वारा डिमांड की गई सभी राशि समय-समय पर ब्याज के साथ जमा करवा दी थी। शिकायतकर्ता ने हुडा से कई बार मांग की थी कि उसे उसका प्लाट दे दिया जाए या कोई वैकल्पिक प्लाट दे दिया जाए। लेकिन हुडा ने शिकायतकर्ता को प्लाट देने से मना कर दिया। जिसके कारण शिकायतकर्ता को शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा। अंत में शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई और अनुरोध किया कि उसका उसका प्लाट और उसकी क्षतिपूर्ति के लिए पांच लाख रुपए हुडा से बतौर जुर्माना दिलाया जाए। शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए फोरम द्वारा हुडा को नोटिस दिया गया। नोटिस के जवाब में हुडा के वकील प्लाट न देने का कोई ठोस कारण फोरम के सामने पेश कर गए।
उपभोक्ता फोरम के प्रधान बुद्धदेव यादव तथा सदस्य ऊषा यादव व लोकेश नदवानी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए तथा सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर 1 सितंबर 2016 को आदेश दिए कि हुडा शिकायतकर्ता को मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए पचास हजार जुर्माना और पचपन सौ रुपए बतौर वकील खर्च और उसी सेक्टर में उसी साइज का प्लाट दे और इसके साथ ही फोरम ने यह हुडा को यह आदेश भी दयिा कि हुडा शिकायतकर्ता को उसके द्वारा अब तक जमा की गई पूरी राशि पर प्रतिशत सालाना ब्याज भी दे। यह ब्याज जब तक चलता चलेगा तब तक हुडा शिकायतकर्ता को प्लाट नहीं दे देता। शिकायतकर्ता ने इस फैसले को बहुत ही न्यायोचित बताया और कानून में अपनी विश्वसनीयता जाहिर की।
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नई मंडी निवासी लक्ष्मीनारायण गर्ग ने 15 अक्तूबर 2015 को अपने वकील राव कृष्ण महता के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया था कि उसका हुडा में एक प्लाट नं. 447 है। शिकायतकर्ता ने हुडा द्वारा डिमांड की गई सभी राशि समय-समय पर ब्याज के साथ जमा करवा दी थी। शिकायतकर्ता ने हुडा से कई बार मांग की थी कि उसे उसका प्लाट दे दिया जाए या कोई वैकल्पिक प्लाट दे दिया जाए। लेकिन हुडा ने शिकायतकर्ता को प्लाट देने से मना कर दिया। जिसके कारण शिकायतकर्ता को शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा। अंत में शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई और अनुरोध किया कि उसका उसका प्लाट और उसकी क्षतिपूर्ति के लिए पांच लाख रुपए हुडा से बतौर जुर्माना दिलाया जाए। शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए फोरम द्वारा हुडा को नोटिस दिया गया। नोटिस के जवाब में हुडा के वकील प्लाट न देने का कोई ठोस कारण फोरम के सामने पेश कर गए।
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उपभोक्ता फोरम के प्रधान बुद्धदेव यादव तथा सदस्य ऊषा यादव व लोकेश नदवानी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए तथा सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर 1 सितंबर 2016 को आदेश दिए कि हुडा शिकायतकर्ता को मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए पचास हजार जुर्माना और पचपन सौ रुपए बतौर वकील खर्च और उसी सेक्टर में उसी साइज का प्लाट दे और इसके साथ ही फोरम ने यह हुडा को यह आदेश भी दयिा कि हुडा शिकायतकर्ता को उसके द्वारा अब तक जमा की गई पूरी राशि पर प्रतिशत सालाना ब्याज भी दे। यह ब्याज जब तक चलता चलेगा तब तक हुडा शिकायतकर्ता को प्लाट नहीं दे देता। शिकायतकर्ता ने इस फैसले को बहुत ही न्यायोचित बताया और कानून में अपनी विश्वसनीयता जाहिर की।
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