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Mahendragarh-Narnaul News: 9 हजार इंतकाल और 6 हजार नकल-प्रमाण पत्र अटके, पैमाइश व सीमांकन का काम भी प्रभावित
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फोटो संख्या:76- तहसील कार्यालय में बैठे आमजन--संवाद
महेंद्रगढ़। जिले में पटवारियों की हड़ताल के कारण राजस्व विभाग से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा असर जमीन की पैमाइश, सीमांकन और सर्वे पर पड़ा है। कई लोग जमीन से जुड़े काम के लिए तहसील और पटवार कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन पटवारी उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बिना काम के लौटना पड़ रहा है।
जिले में करीब 9 हजार इंतकाल और 6 हजार नकल व प्रमाण पत्र का काम लंबित है। जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद पैमाइश और रिकॉर्ड में बदलाव जरूरी होता है। इसके अलावा खेत, प्लॉट और दूसरी जमीनों का सही सीमांकन भी राजस्व विभाग के जरिए किया जाता है। हड़ताल के कारण पहले से किए गए पैमाइश के आवेदन भी अटके हुए हैं।
हड़ताल का असर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है। सरकारी, पंचायती या निजी जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर पैमाइश और सीमांकन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। पटवारी की रिपोर्ट और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में इन मामलों में भी देरी होने की संभावना है।
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जमाबंदी, फर्द, जमीन के रिकॉर्ड में सुधार, वारिसान दर्ज करने और अन्य राजस्व कार्य भी प्रभावित हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
सरकार से समाधान की मांग
दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रधान सुनील तंवर ने बताया कि एसोसिएशन के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर सांकेतिक धरना दिया जा रहा है। पटवारी और कानूनगो अपनी विभागीय व तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वीरवार को राज्य कमेटी की प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक है। बैठक के बाद राज्य कमेटी के निर्देश के अनुसार अगला फैसला लिया जाएगा। जिले के 216 पटवारी हड़ताल पर हैं।
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जिले में करीब 9 हजार इंतकाल और 6 हजार नकल व प्रमाण पत्र का काम लंबित है। जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद पैमाइश और रिकॉर्ड में बदलाव जरूरी होता है। इसके अलावा खेत, प्लॉट और दूसरी जमीनों का सही सीमांकन भी राजस्व विभाग के जरिए किया जाता है। हड़ताल के कारण पहले से किए गए पैमाइश के आवेदन भी अटके हुए हैं।
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हड़ताल का असर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है। सरकारी, पंचायती या निजी जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर पैमाइश और सीमांकन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। पटवारी की रिपोर्ट और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में इन मामलों में भी देरी होने की संभावना है।
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जमाबंदी, फर्द, जमीन के रिकॉर्ड में सुधार, वारिसान दर्ज करने और अन्य राजस्व कार्य भी प्रभावित हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
सरकार से समाधान की मांग
दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रधान सुनील तंवर ने बताया कि एसोसिएशन के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर सांकेतिक धरना दिया जा रहा है। पटवारी और कानूनगो अपनी विभागीय व तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वीरवार को राज्य कमेटी की प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक है। बैठक के बाद राज्य कमेटी के निर्देश के अनुसार अगला फैसला लिया जाएगा। जिले के 216 पटवारी हड़ताल पर हैं।

फोटो संख्या:76- तहसील कार्यालय में बैठे आमजन--संवाद