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छह पार्षदों की सदस्यता रद्द करने के मामले में डीसी ने पक्ष रखने के लिए तय की नौ तारीख
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नगरपालिका के छह पार्षदों की सदस्यता को लेकर पार्षद अपने वकीलों के साथ डीसी कोर्ट पहुंचे। पार्षदों की ओर से अधिवक्ता करण सिंह ने कहा कि उन्हें नगरपालिका की ओर से पूरे दस्तावेज नहीं मिले। इस कारण वे अपना जवाब नहीं दे पाए। चेयरपर्सन रीना गर्ग की ओर से दस्तावेज दिए गए, लेकिन पालिका सचिव से दस्तावेज नहीं मिले। डीसी ने पार्षदों को पक्ष रखने के लिए 9 दिसंबर की तारीख दी है।
नगरपालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने अगस्त माह में नपा की लगातार चार बैठकों में पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी व विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019 व 9 जनवरी 2019 की बैठक में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। पार्षदों के निलंबन, सदस्यता रद्द करने के बारे में शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक के पास शक्तियां हैं। निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। डीसी ने इस मामले में 25 नवंबर को पार्षदों को सुनवाई के लिए बुलाया था। उस दिन पार्षदों को अदालत के आदेशों की प्रति सौंपी गई थी। दूसरी तारीख दो दिसंबर दी गई थी। सोमवार को पार्षदों के अधिवक्ता करण सिंह को उपायुक्त को जवाब पेश करना था। अधिवक्ता ने सचिव की ओर से पूरे दस्तावेज नहीं मिलने का हवाला देते हुए जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। जिस पर डीसी जगदीश शर्मा ने पार्षदों को 9 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
नरेंद्र खन्ना का मामला निदेशक को भेजा
दूसरे केस में पार्षद नरेंद्र खन्ना के खिलाफ धीरज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। एक्ट के सेक्शन-14 ए के मुताबिक किसी पार्षद के खिलाफ कोई जांच लंबित है तो उसको अयोग्य करार दिया जा सकता है। नरेंद्र खन्ना के खिलाफ दो फौजदारी के मामले चल रहे हैं। इसमें डीसी ने उनके मामले को निदेशक के पास भेज दिया है।
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सोमवार को कोर्ट में पार्षदों के अलग-अलग दो मामले थे। एक तो छह पार्षदों के निलंबन का तथा दूसरा पार्षद नरेंद्र खन्ना के निलंबन का था। छह पार्षदों के निलंबन मामले में विपक्षी अधिवक्ता ने दस्तावेज पूर्ण नहीं होने पर अगली तारीख 9 दिसंबर ले ली है। पार्षद नरेंद्र खन्ना के मामले में उपायुक्त निदेशक महोदय को भेज दिया है। अब निदेशक फैसला लेंगे।
-रणबीर यादव, अधिवक्ता (चेयरपर्सन पक्ष)
-छह पार्षदों के निलंबन मामले में सोमवार को हमें जवाब दाखिल करना था। परंतु हमारे पास इस केस संबंधित नगरपालिका के पूरे दस्तावेज नहीं थे। इसके लिए हमें 9 दिसंबर की तारीख मिली है। अगली तारीख में हम अपना जवाब दाखिल कर देंगे। नरेंद्र खन्ना के मामले में उपायुक्त ने उनका मामला निदेशक के पास भेज दिया है।
करण सिंह, अधिवक्ता (पार्षद पक्ष)
नपा चेयरपर्सन काम करना नहीं चाहती। उनका लक्ष्य यह है कि क्षेत्र की जनता इस वहम में रखें कि सारा मामला कोर्ट में फंसा हुआ है। केवल पार्षदों को तंग करने के लिए कोर्ट में खड़ा कर लिया जाता है। हम काम करवाना चाहते हैं कि हम अपने काम कई बार नोट कर दे चुके हैं। हम बैठक के लिए तैयार हैं। नियमानुसार सभी 15 पार्षदों की बुलाकर बैठक करवाएं। हम बैठक में आएंगे।
-डॉ. तरुण यादव, पार्षद, नपा, महेंद्रगढ़।
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नगरपालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने अगस्त माह में नपा की लगातार चार बैठकों में पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी व विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019 व 9 जनवरी 2019 की बैठक में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। पार्षदों के निलंबन, सदस्यता रद्द करने के बारे में शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक के पास शक्तियां हैं। निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। डीसी ने इस मामले में 25 नवंबर को पार्षदों को सुनवाई के लिए बुलाया था। उस दिन पार्षदों को अदालत के आदेशों की प्रति सौंपी गई थी। दूसरी तारीख दो दिसंबर दी गई थी। सोमवार को पार्षदों के अधिवक्ता करण सिंह को उपायुक्त को जवाब पेश करना था। अधिवक्ता ने सचिव की ओर से पूरे दस्तावेज नहीं मिलने का हवाला देते हुए जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। जिस पर डीसी जगदीश शर्मा ने पार्षदों को 9 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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नरेंद्र खन्ना का मामला निदेशक को भेजा
दूसरे केस में पार्षद नरेंद्र खन्ना के खिलाफ धीरज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। एक्ट के सेक्शन-14 ए के मुताबिक किसी पार्षद के खिलाफ कोई जांच लंबित है तो उसको अयोग्य करार दिया जा सकता है। नरेंद्र खन्ना के खिलाफ दो फौजदारी के मामले चल रहे हैं। इसमें डीसी ने उनके मामले को निदेशक के पास भेज दिया है।
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सोमवार को कोर्ट में पार्षदों के अलग-अलग दो मामले थे। एक तो छह पार्षदों के निलंबन का तथा दूसरा पार्षद नरेंद्र खन्ना के निलंबन का था। छह पार्षदों के निलंबन मामले में विपक्षी अधिवक्ता ने दस्तावेज पूर्ण नहीं होने पर अगली तारीख 9 दिसंबर ले ली है। पार्षद नरेंद्र खन्ना के मामले में उपायुक्त निदेशक महोदय को भेज दिया है। अब निदेशक फैसला लेंगे।
-रणबीर यादव, अधिवक्ता (चेयरपर्सन पक्ष)
-छह पार्षदों के निलंबन मामले में सोमवार को हमें जवाब दाखिल करना था। परंतु हमारे पास इस केस संबंधित नगरपालिका के पूरे दस्तावेज नहीं थे। इसके लिए हमें 9 दिसंबर की तारीख मिली है। अगली तारीख में हम अपना जवाब दाखिल कर देंगे। नरेंद्र खन्ना के मामले में उपायुक्त ने उनका मामला निदेशक के पास भेज दिया है।
करण सिंह, अधिवक्ता (पार्षद पक्ष)
नपा चेयरपर्सन काम करना नहीं चाहती। उनका लक्ष्य यह है कि क्षेत्र की जनता इस वहम में रखें कि सारा मामला कोर्ट में फंसा हुआ है। केवल पार्षदों को तंग करने के लिए कोर्ट में खड़ा कर लिया जाता है। हम काम करवाना चाहते हैं कि हम अपने काम कई बार नोट कर दे चुके हैं। हम बैठक के लिए तैयार हैं। नियमानुसार सभी 15 पार्षदों की बुलाकर बैठक करवाएं। हम बैठक में आएंगे।
-डॉ. तरुण यादव, पार्षद, नपा, महेंद्रगढ़।