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सीजन का सबसे गर्म दिन रहा सोमवार, पारा @ 45.8
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गर्मी से सुनसान पड़ी सड़क।
- फोटो : Narnol
पिछले पांच दिन से भीषण गर्मी पड़ रही हैं। चिलचिलाती धूप व लू के थपेड़ों से लोगों का जीना बेहाल हो गया है। नौतपा के पहले दिन सोमवार को गर्मी और लू के थपेड़ों से लोग बेहाल दिखे। गर्मी से दोपहर में लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है। सोमवार को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहा। सोमवार इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा।
लॉकडाउन व तेज गर्मीं के चलते दोपहर के समय शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लगातार बढ़ रहे तापमान से भीषण गर्मी से आम आदमी परेशान है। नारनौल में भी बाजार और सड़कें दोपहर में सूनी रही। दूसरी ओर गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ गई है। इससे बार-बार फाल्ट आने से बिजली गुल होने की समस्या रही। वहीं एक तरफ जहां अधिक गर्मी होने के कारण लोग परेशान नजर आ रहे हैं। गर्मी के कारण कूलरों की दुकानों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। लॉकडाउन में दुकानों को कारोबार अच्छा होने की उम्मीद हैं। वहीं पशुपालक दुधारू पशुओं को इस भीषण गर्मी से बचाने के लिए उपाय कर रहे हैं, लेकिन फिर भी दुग्ध उत्पादन में कमी आ रही हैं। दूध कम देने के कारण पशुपालक परेशान हैं। चिकित्सकों का कहना हैं कि ज्यादा गर्मी होने के कारण व हरा चारा नहीं मिलने के कारण पशुओं में कैल्शियम व पानी की कमी आ जाती हैं व हीट-स्ट्रोक होने का खतरा ज्यादा होता हैं। इसलिए दुधारू पशुओं को हवादार जगह में बांधना चाहिए व दिन में कई बार साफ पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा पशु व पक्षियों के लिए भी पानी का उचित प्रबंध करना चाहिए।
गर्मी के मौसम को देखते हुए घरों पर ही रहें : डीसी
डीसी जगदीश शर्मा ने जिला के नागरिकों से आह्वान किया है कि वे गर्मी के मौसम को देखते हुए अपने घरों पर ही रहें। हीट वेव ( लू ) के प्रभाव को कम करने और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए वे पूरे प्रबंध करके ही घर से बाहर निकलें। इसके अलावा वे पशु व पक्षियों के लिए भी पानी का उचित प्रबंध करें। गर्मी के मौसम में इन बेजुबानों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ऐसे में हर नागरिक अपने स्तर पर इन बेजुबानों के लिए कुछ न कुछ पानी आदि का प्रबंध जरूर करें। ऐसे मौसम में विशेषकर बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ख्याल रखें।
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क्या करें:
- पर्याप्त पानी पीएं और जितनी बार संभव हो, भले ही प्यास न लगे।
-हल्के, हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। धूप में बाहर जाते समय सुरक्षात्मक चश्में, छाता/ टोपी, जूते या चप्पल का प्रयोग करें।
-ओआरएस का उपयोग करें, घर का बना पेय जैसे लस्सी, नींबू का पानी, छाछ आदि ले
- यदि आप बाहर काम करते है, तो एक टोपी या एक छाता का उपयोग करें और अपने सिर, गर्दन, चेहरे और अंगों पर एक नम कपड़े का उपयोग करें।
-अपने घर को ठंडा रखें, रात में पर्दे, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खोलें।
- पंखे का उपयोग करें, कपड़ों को नम करें और ठंडे पानी से स्नान करें।
- जानवरों को छाया में रखें और पीनेक के लिए भरपूर पानी दें।
क्या न करें :
- खड़े किए हुए वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़े।
-धूप में बाहर जाने से बचें, दोपहर 12 बजे से शाम ती बजे तक।
- गहरे रंग व तंग कपड़े पहनने से बचें।
- शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड शीतल पेय से बचें, जो शरीर को निर्जलित करता है।
- उच्च प्रोटिन वाले भोजन से बचें और बासी भोजन न करें।
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लॉकडाउन व तेज गर्मीं के चलते दोपहर के समय शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लगातार बढ़ रहे तापमान से भीषण गर्मी से आम आदमी परेशान है। नारनौल में भी बाजार और सड़कें दोपहर में सूनी रही। दूसरी ओर गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ गई है। इससे बार-बार फाल्ट आने से बिजली गुल होने की समस्या रही। वहीं एक तरफ जहां अधिक गर्मी होने के कारण लोग परेशान नजर आ रहे हैं। गर्मी के कारण कूलरों की दुकानों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। लॉकडाउन में दुकानों को कारोबार अच्छा होने की उम्मीद हैं। वहीं पशुपालक दुधारू पशुओं को इस भीषण गर्मी से बचाने के लिए उपाय कर रहे हैं, लेकिन फिर भी दुग्ध उत्पादन में कमी आ रही हैं। दूध कम देने के कारण पशुपालक परेशान हैं। चिकित्सकों का कहना हैं कि ज्यादा गर्मी होने के कारण व हरा चारा नहीं मिलने के कारण पशुओं में कैल्शियम व पानी की कमी आ जाती हैं व हीट-स्ट्रोक होने का खतरा ज्यादा होता हैं। इसलिए दुधारू पशुओं को हवादार जगह में बांधना चाहिए व दिन में कई बार साफ पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा पशु व पक्षियों के लिए भी पानी का उचित प्रबंध करना चाहिए।
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गर्मी के मौसम को देखते हुए घरों पर ही रहें : डीसी
डीसी जगदीश शर्मा ने जिला के नागरिकों से आह्वान किया है कि वे गर्मी के मौसम को देखते हुए अपने घरों पर ही रहें। हीट वेव ( लू ) के प्रभाव को कम करने और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए वे पूरे प्रबंध करके ही घर से बाहर निकलें। इसके अलावा वे पशु व पक्षियों के लिए भी पानी का उचित प्रबंध करें। गर्मी के मौसम में इन बेजुबानों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ऐसे में हर नागरिक अपने स्तर पर इन बेजुबानों के लिए कुछ न कुछ पानी आदि का प्रबंध जरूर करें। ऐसे मौसम में विशेषकर बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ख्याल रखें।
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क्या करें:
- पर्याप्त पानी पीएं और जितनी बार संभव हो, भले ही प्यास न लगे।
-हल्के, हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। धूप में बाहर जाते समय सुरक्षात्मक चश्में, छाता/ टोपी, जूते या चप्पल का प्रयोग करें।
-ओआरएस का उपयोग करें, घर का बना पेय जैसे लस्सी, नींबू का पानी, छाछ आदि ले
- यदि आप बाहर काम करते है, तो एक टोपी या एक छाता का उपयोग करें और अपने सिर, गर्दन, चेहरे और अंगों पर एक नम कपड़े का उपयोग करें।
-अपने घर को ठंडा रखें, रात में पर्दे, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खोलें।
- पंखे का उपयोग करें, कपड़ों को नम करें और ठंडे पानी से स्नान करें।
- जानवरों को छाया में रखें और पीनेक के लिए भरपूर पानी दें।
क्या न करें :
- खड़े किए हुए वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़े।
-धूप में बाहर जाने से बचें, दोपहर 12 बजे से शाम ती बजे तक।
- गहरे रंग व तंग कपड़े पहनने से बचें।
- शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड शीतल पेय से बचें, जो शरीर को निर्जलित करता है।
- उच्च प्रोटिन वाले भोजन से बचें और बासी भोजन न करें।