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महेंद्रगढ़ जिला एनसीआर से बाहर, दिवाली पर पटाखों की बिक्री होगीया नहीं संशय बरकरार
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नारनौल। दिवाली को मात्र एक सप्ताह शेष रह गया है। अभी तक पटाखों की बिक्री के बारे में संशय बना हुआ है। जिले में पटाखे बिकेंगे या नहीं इसके बार में प्रशासन के पास अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। इस वजह से पटाखे के खुरदरा व्यापारी प्रशासन की अनुमति की इंतजार कर रहे हैं। जिला एनसीआर में शामिल होने की वजह से पिछले दो वर्षों से पटाखों के जलाने एवं बेचने पर पाबंदी लगी हुई थी। बावजूद इसके दीपावली पर बिना लाइसेंस के चोरी छीपे बेचे गए थे। क्षेत्र के व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार जिला एनसीआर से बाहर हो गया है और संभवत: कोविड की शर्तों के साथ-साथ पर्यावरण मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार शासन आतिशबाजी बिक्री की अनुमति जारी करेगा।
एनजीटी की सख्ती के बाद एनसीआर में आतिशबाजी हुई कम:
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद दिल्ली एनसीआर में आतिशबाजी कम हुई है। दिल्ली एनसीआर में महेंद्रगढ़ एवं नारनौल दोनों ही क्षेत्र आते हैं। जिले का सबसे बड़ा शहर नारनौल है। महेंद्रगढ़ की अपेक्षा नारनौल में आतिशबाजी के रूप में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा रहती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में भी आतिशबाजी चलाने वालों की संख्या में कमी देखी जा रही है। फिर भी इस बार भी एनजीटी आतिशबाजी चलाने वालों के खिलाफ इस बार भी सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
रुझान अब ग्रीन पटाखों पर
एनजीटी की सख्ती और प्रदूषण को भी देखते हुए क्षेत्र के लोग काफी जागरूक हुए हैं। अब लोगों का रुझान ग्रीन पटाखों की ओर हुआ है। यह पटाखे सामान्य आतिशबाजी से थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं। खास तौर पर लोग ग्रीन आतिशबाजी में चकरी, राकेट, अनार, फुलझड़ी और डिजाइनर आतिशबाजी के साथ-साथ कम आवाज वाले पटाखे पसंद करते हैं।
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पटाखे बिक्री बेचने की प्रक्रिया 15 दिन पहले होती थी शुरू:
जिले में अंतिम बार 2018 में पटाखे बेचे गए थे। उस समय प्रशासन की ओर से पटाखे बेचने की प्रक्रिया 15 दिन पहले शुरू हो जाती थी। एसडीएम कार्यालय में एक सप्ताह पहले ड्रा निकाला जाता था। ड्रा में जिसका नाम आता था वो वही लोग निर्धारित स्थान पर धनतेरस, छोटी दिवाली तथा बड़ी दिवाली के दिन पटाखे बेचते थे। इससे पहले एसडीएम कार्यालय व्यापारी को अस्थायी लाइसेंस के लिए फाइलें जमा करवानी पड़ती थी।
हरियाणा सरकार ने नहीं किए अभी आदेश जारी:
इस बार दिवाली पर प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आतिशबाजी की बिक्री और भंडारण पर रोक लगा दी है, उसे देखते हुए अभी हरियाणा के अलावा पंजाब राज्य में दिवाली के मौके पर आतिशबाजी की बिक्री प्रतिबंध संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। लिहाजा, व्यापारियों को उम्मीद है कि शर्तों के जरिए उन्हें आतिशबाजी बिक्री का मौका मिलेगा।
आतिशबाजी की बिक्री एवं नहीं जलाने का हमारे पास कोई आदेश नहीं आया है और न ही एनसीआर से बाहर होने का कोई आदेश हैं। जैसे ही आदेश होंगे, उसकी पालना की जाएगी। -अजय कुमार, उपायुक्त, महेंद्रगढ़।
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एनजीटी की सख्ती के बाद एनसीआर में आतिशबाजी हुई कम:
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद दिल्ली एनसीआर में आतिशबाजी कम हुई है। दिल्ली एनसीआर में महेंद्रगढ़ एवं नारनौल दोनों ही क्षेत्र आते हैं। जिले का सबसे बड़ा शहर नारनौल है। महेंद्रगढ़ की अपेक्षा नारनौल में आतिशबाजी के रूप में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा रहती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में भी आतिशबाजी चलाने वालों की संख्या में कमी देखी जा रही है। फिर भी इस बार भी एनजीटी आतिशबाजी चलाने वालों के खिलाफ इस बार भी सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
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रुझान अब ग्रीन पटाखों पर
एनजीटी की सख्ती और प्रदूषण को भी देखते हुए क्षेत्र के लोग काफी जागरूक हुए हैं। अब लोगों का रुझान ग्रीन पटाखों की ओर हुआ है। यह पटाखे सामान्य आतिशबाजी से थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं। खास तौर पर लोग ग्रीन आतिशबाजी में चकरी, राकेट, अनार, फुलझड़ी और डिजाइनर आतिशबाजी के साथ-साथ कम आवाज वाले पटाखे पसंद करते हैं।
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पटाखे बिक्री बेचने की प्रक्रिया 15 दिन पहले होती थी शुरू:
जिले में अंतिम बार 2018 में पटाखे बेचे गए थे। उस समय प्रशासन की ओर से पटाखे बेचने की प्रक्रिया 15 दिन पहले शुरू हो जाती थी। एसडीएम कार्यालय में एक सप्ताह पहले ड्रा निकाला जाता था। ड्रा में जिसका नाम आता था वो वही लोग निर्धारित स्थान पर धनतेरस, छोटी दिवाली तथा बड़ी दिवाली के दिन पटाखे बेचते थे। इससे पहले एसडीएम कार्यालय व्यापारी को अस्थायी लाइसेंस के लिए फाइलें जमा करवानी पड़ती थी।
हरियाणा सरकार ने नहीं किए अभी आदेश जारी:
इस बार दिवाली पर प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आतिशबाजी की बिक्री और भंडारण पर रोक लगा दी है, उसे देखते हुए अभी हरियाणा के अलावा पंजाब राज्य में दिवाली के मौके पर आतिशबाजी की बिक्री प्रतिबंध संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। लिहाजा, व्यापारियों को उम्मीद है कि शर्तों के जरिए उन्हें आतिशबाजी बिक्री का मौका मिलेगा।
आतिशबाजी की बिक्री एवं नहीं जलाने का हमारे पास कोई आदेश नहीं आया है और न ही एनसीआर से बाहर होने का कोई आदेश हैं। जैसे ही आदेश होंगे, उसकी पालना की जाएगी। -अजय कुमार, उपायुक्त, महेंद्रगढ़।