{"_id":"65e0c5727ce053d6b6023f96","slug":"made-girl-students-aware-about-their-fundamental-rights-narnol-news-c-203-1-sroh1011-107786-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: छात्राओं को मौलिक अधिकारों के प्रति किया जागरूक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: छात्राओं को मौलिक अधिकारों के प्रति किया जागरूक
Thu, 29 Feb 2024 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 29 Feb 2024 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महेंद्रगढ़। राजकीय महिला महाविद्यालय में भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों के बारे में छात्राओं को जागरूक किया गया। मौलिक अधिकार, कर्तव्य पर कानूनी प्रावधान विषय पर एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया।
विस्तार व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. मनीषा यादव सहायक प्रो. राजनीतिक शास्त्र राजकीय महाविद्यालय सतनाली रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. संजय जोशी ने की। प्राचार्य डॉ. संजय जोशी ने छात्राओं को भारतीय संविधान में वर्णित महिलाओं के लिए बने कानून के प्रति जागरूक किया। डॉ. मनीषा यादव ने बताया कि भारत में न्यायिक प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय सर्वोपरि हैं। यदि हमारे किसी भी प्रकार के मौलिक अधिकारों का शोषण होता है तो हम अनुच्छेद 32 के तहत देश के सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय में इसके विरुद्ध सीधी अपील कर सकते हैं। मंच संचालन की भूमिका का निर्वहन विधि प्रकोष्ठ के प्रभारी तीर्थराज शर्मा ने किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. किरण, डॉ. पवनवीर, डॉ. शर्मिला, डॉ. सुमन, प्रवीण कुमार, ज्योति शर्मा उपस्थित रहीं।
विज्ञापन
विस्तार व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. मनीषा यादव सहायक प्रो. राजनीतिक शास्त्र राजकीय महाविद्यालय सतनाली रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. संजय जोशी ने की। प्राचार्य डॉ. संजय जोशी ने छात्राओं को भारतीय संविधान में वर्णित महिलाओं के लिए बने कानून के प्रति जागरूक किया। डॉ. मनीषा यादव ने बताया कि भारत में न्यायिक प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय सर्वोपरि हैं। यदि हमारे किसी भी प्रकार के मौलिक अधिकारों का शोषण होता है तो हम अनुच्छेद 32 के तहत देश के सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय में इसके विरुद्ध सीधी अपील कर सकते हैं। मंच संचालन की भूमिका का निर्वहन विधि प्रकोष्ठ के प्रभारी तीर्थराज शर्मा ने किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. किरण, डॉ. पवनवीर, डॉ. शर्मिला, डॉ. सुमन, प्रवीण कुमार, ज्योति शर्मा उपस्थित रहीं।
विज्ञापन