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महेंद्रगढ़ ग्राउंड जीरो: राव की राह में कंवर ने ठोकी सादगी की कीलें, भाजपा ने अपनाई वोट धुव्रीकरण की रणनीति

Sun, 29 Sep 2024 09:53 AM IST
नवीन दलाल आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 29 Sep 2024 09:53 AM IST
सार

हरियाणा में महेंद्रगढ़ सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच होता रहा है। इस सीट को कभी भाजपा फतेह करती है तो कभी कांग्रेस। कांग्रेस के मौजूदा उम्मीदवार राव दान सिंह इस क्षेत्र से सातवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। छह में से वह चार बार चुनाव जीते हैं।

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Kanwar put nails of simplicity in path of Rao, BJP adopted strategy of vote polarization Mahendergarh Ground
कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह और भाजपा उम्मीदवार कंवर सिंह यादव - फोटो : संवाद

विस्तार

चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, महेंद्रगढ़ सीट पर चुनाव कांटे की टक्कर में तब्दील हो रहा है। शुरुआत में कांग्रेस उम्मीदवार व विधायक राव दान सिंह का पलड़ा भारी था, मगर भाजपा ने अहीर जाति के ही लो प्रोफाइल वाले कंवर सिंह यादव को उतारकर मुकाबले को जातीय समीकरण में उलझा दिया है।

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गांव व शहरों में राव के बड़े कद व कंवर की सादगी की सबसे ज्यादा चर्चा है। अपनी इसी सादगी के चलते कंवर ने राव की जीत की राह में कीलें ठोक दी हैं। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व आईएएस संदीप सिंह एसडीएम भी जोर लगा रहे हैं, मगर उनका ज्यादा प्रभाव पहाड़ वाले एरिया में है। इस सीट का चुनाव अभी थोड़ा बदलेगा, क्योंकि कुछ वोटरों में अभी भी असमंजस की स्थिति है।
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महेंद्रगढ़ सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच होता रहा है। इस सीट को कभी भाजपा फतेह करती है तो कभी कांग्रेस। कांग्रेस के मौजूदा उम्मीदवार राव दान सिंह इस क्षेत्र से सातवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। छह में से वह चार बार चुनाव जीते हैं। राव दान सिंह अहीर जाति से आते हैं। सवा दो लाख आबादी वाले क्षेत्र में 80 हजार से ज्यादा आबादी यादवों की हैं। उन्हें यादवों के साथ कांग्रेस का कोर वोट भी मिलता रहा है।
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बीते लोकसभा चुनाव में राव दान सिंह भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे। भाजपा उम्मीदवार धर्मबीर को कड़ी टक्कर देने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे भी बड़ी बात यह थी कि उनकी खुद के महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में वह करीब चार हजार वोट से पिछड़ गए थे। इसी कारण उन्होंने गांवों के साथ शहर पर भी जोर दे रखा है।

राव दान सिंह ने कहते हैं कि यह इलाका तो पिछड़ा था। भाजपा सरकार में और पिछड़ गया है। इलाके में बेरोजगारी, महंगाई, अग्निवीर, उद्योग और विकास बड़े मुद्दे हैं। 2009 की कांग्रेस सरकार में वह इलाके में सेंट्रल यूनिवर्सिटी लेकर आए। खुडाना गांव में आईएमटी लेकर आए थे। मगर भाजपा सरकार उसे क्रियान्वित करने में विफल रही है। कांग्रेस की सरकार बनते ही सबसे पहले इसी प्रोजेक्ट को लेकर आएंगे।

वहीं, भाजपा उम्मीदवार कंवर सिंह यादव का कहना है कि लोग भाजपा के संकल्प पत्र को हाथो-हाथ ले रहे हैं। युवाओं की योग्यता के आधार पर नौकरी लगी है। अब सरकार का लक्ष्य हर खेत में पानी पहुंचाने का है।

चुनावी माहौल पर महेंद्रगढ़ के राम तुला राम चौक के दुकानदार जय सिंह बताते हैं कि यहां का सबसे बड़ा मुद्दा जिला मुख्यालय नारनौल का 35 किलोमीटर दूर होना है। पूरे प्रदेश में महेंद्रगढ़ ही सिर्फ एक जिला है, जिसका मुख्यालय जिले में नहीं है। दस साल में भाजपा सरकार ने इसके लिए कुछ नहीं किया। महेंद्रगढ़ की सड़कें भी टूटी हैं। बारिश के दिनों में इस इलाके में जलभराव की भारी समस्या देखने को मिलती है। लोग इस बार सरकार को बदलना चाहते हैं। किसान ओमप्रकाश कहते हैं कि अग्निवीर योजना आने से पहले उनका बेटा सेना में जाना चाहता था, मगर अब उसने सेना के बजाय कहीं और नौकरी करने का मन बनाया है। सरकार को इस योजना को खत्म कर देना चाहिए।

भाजपा ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष का टिकट कटने की नहीं दिखती नाराजगी

भाजपा ने जातीय समीकरण को देखते हुए अपने सबसे वरिष्ठ नेता पंडित राम बिलास शर्मा का टिकट काट नया चेहरा कंवर सिंह यादव पर दांव लगाया है। वह भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। पंडित रामबिलास शर्मा का जब टिकट काटा गया तो कयास लगाए जाने लगे कि भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। मगर जमीन पर इस तरह की नाराजगी या लोगों में गुस्सा फिलहाल नहीं दिखता है। लोग कंवर सिंह यादव की सादगी को भी पसंद कर रहे हैं।

उनका कहना है कि भाजपा के सर्वे में यादव आगे थे, इसलिए उन्हें मौका दिया गया है। महेंद्रगढ़ के देव नगर निवासी दशरथ यादव कहते हैं कि रामबिलास को कई बार मौका दिया गया है। अब पार्टी ने कंवर सिंह पर उतारा है तो इसे लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं होनी चाहिए। हर किसी को मौका मिलना चाहिए। जब शर्मा जी विधायक चुने गए तो उन्होंने इलाके में ऐसा कौन सा काम कराया, जिसे याद रखा जाए।

जासावास गांव के महेंद्र सिंह कहते हैं कि पिछले पांच साल में क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है। कांग्रेस के विधायक इलाके के लिए कुछ खास काम नहीं करवा पाए, लेकिन उनके सामने भी मजबूरी थी कि राज्य में उनकी सरकार नहीं थी। देवीनगर के निवासी बिजेंद्र कहते हैं कि भाजपा के शासनकाल में इस इलाके में पानी पहुंचा है। पहले 1500 फुट पर पानी था। लोगों को पानी की किल्लत खूब झेलनी पड़ती थी। भाजपा सरकार ने नहरों में पानी पहुंचाया है। इससे इस इलाके में पानी अब 180-200 फुट पर पहुंच गया है।

हुड्डा के लिए राव ने लगाया जोर, कंवर के लिए नहीं आया कोई बड़ा नेता

राव को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का काफी करीबी माना जाता है। हुड्डा उनके लिए रैली कर चुके हैं। वहीं, रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी उनके लिए रोड शो कर चुके हैं। दान सिंह के बेटे व युवा कांग्रेस के नेता अक्षत भी खूब मेहनत कर रहे हैं। वहीं, कंवर सिंह यादव के पक्ष अभी तक कोई बड़ा नेता नहीं आया है। राम बिलास शर्मा भी खुलकर उनके पक्ष में नहीं आ सके हैं। भाजपा के सूत्र बता रहे हैं कि महेंद्रगढ़ में पार्टी जल्द ही किसी शीर्ष नेता की रैली करवाने की योजना बना रहा है।

इन 5 समीकरणों से समझिए किसके लिए राह आसान व किसके लिए मुश्किल

1. राव दान सिंह अहीर वोटों के साथ ब्राह्मण व राजपूत वोटों में सेंध लगा पाने में कामयाब होते हैं तो उनकी राह आसान हो सकती है।
2.कंवर सिंह यादव चुनावी मैदान में नए हैं, मगर संगठन ने उनके चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है। यादव वोट के साथ वह अन्य गैर जाट वोटों को लामबंद करने में कामयाब होते हैं तो वह चुनाव में बढ़त बना सकते हैं।
3.रूठे पूर्व रामबिलास शर्मा फिलहाल मान गए हैं, मगर उनके समर्थक किस ओर जाते हैं, इस पर सभी की नजरें लगी हैं। यदि शर्मा के समर्थक दान सिंह की ओर गए तो भाजपा का चुनाव मुश्किल में पड़ सकता है।
4.राव इंद्रजीत का फैक्टर भी काम करेगा। अभी तक भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं।
5. राव दान सिंह के परिवार व रिश्तेदारों पर पड़े ईडी के छापों का इतना असर दिखता नहीं है। कांग्रेस समर्थक इन छापों के जरिये दान सिंह को सत्ता का जुल्म दिखाकर सहानुभूति बटोरने में लगे हैं।

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