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Mahendragarh-Narnaul News: बंदरों के आतंक से परेशान हैं कनीनावासी
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महेंद्रगढ़। बंदरों के आतंक लगातार बढ़ने से लोगों खासे परेशान हैं। कस्बे में घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियों से लेकर रसोई घर में सामान सुरक्षित नहीं है। घरों के बाहर खेलने वाले बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। कस्बावासी लगातार बंदरों के आतंक नगर पालिका प्रशासन से बार-बार लोग बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। उप नागरिक अस्पताल कनीना के ऑपरेटर अशोक ने जानकारी देते हो बताया कि वर्ष 2023 में उप नागरिक अस्पताल कनीना में केवल 22 मरीज आए थे लेकिन इस वर्ष अब तक 40 से अधिक मरीज आ चुके हैं।
कस्बावासी राकेश यादव, राजकुमार, देवेंद्र, संतलाल, महेश, कुलदीप यादव, आशीष व साहिल ने बताया कि निरंतर कस्बे में बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। बंदरों से बचने के लिए लोग हजारों रुपए खर्च करके लोहे के जाल लगवा रहे हैं। प्रतिदिन हिंसक हुए यह बंदर बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों व महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। नगर पालिका प्रशासन को से इनके आतंक से छुटकारा दिलाने की लगातार मांग उठाई जा रही है। बंदरों की टोलियां घरों में घुसकर सामान उठा कर ले जाती हैं। बंदरों के डर से बच्चों ने गलियो व छतों पर खेलना तक छोड़ दिया है। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करने को मजबूर हैं।
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उप नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि बंदरों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बंदर के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। निरंतर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जो केस अस्पताल में आ रहे हैं उनमें से अधिकांश बंदरों के काटने के आते हैं।
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- वर्जन:
कस्बे के लोगों को बंदरों के आतंक से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा। वर्तमान में कनिष्ठ अभियंता को अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है। एक सप्ताह में बैठक आयोजित करके जल्द ही बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-- - समय पाल सिंह, सचिव नगर पालिका कनीना।
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कस्बावासी राकेश यादव, राजकुमार, देवेंद्र, संतलाल, महेश, कुलदीप यादव, आशीष व साहिल ने बताया कि निरंतर कस्बे में बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। बंदरों से बचने के लिए लोग हजारों रुपए खर्च करके लोहे के जाल लगवा रहे हैं। प्रतिदिन हिंसक हुए यह बंदर बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों व महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। नगर पालिका प्रशासन को से इनके आतंक से छुटकारा दिलाने की लगातार मांग उठाई जा रही है। बंदरों की टोलियां घरों में घुसकर सामान उठा कर ले जाती हैं। बंदरों के डर से बच्चों ने गलियो व छतों पर खेलना तक छोड़ दिया है। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करने को मजबूर हैं।
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उप नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. जितेंद्र मोरवाल ने बताया कि बंदरों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बंदर के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। निरंतर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जो केस अस्पताल में आ रहे हैं उनमें से अधिकांश बंदरों के काटने के आते हैं।
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- वर्जन:
कस्बे के लोगों को बंदरों के आतंक से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा। वर्तमान में कनिष्ठ अभियंता को अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है। एक सप्ताह में बैठक आयोजित करके जल्द ही बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।