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Mahendragarh-Narnaul News: जाट समाज ने बदली रस्मों की राह, दिखावे पर लगेगी लगाम

Sun, 27 Sep 2026 02:14 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:14 AM IST
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Jat community changes course of customs; curbs to be placed on ostentation.
फोटो नंबर- 14सभा के निर्णय का हाथ उठाकर समर्थन करते जाट समाज के लोग। स्रोत : संस्था
नांगल चौधरी। सामाजिक आयोजनों में बढ़ते दिखावे और अनावश्यक खर्च को कम करने के लिए जाट समाज ने सामाजिक सुधार अभियान शुरू किया है। जाट सभा के प्रधान कुलदीप जेलदार के नेतृत्व में चल रहे अभियान के तहत गांवों में पांच सदस्यीय कमेटियां बनाई गई हैं। ये कमेटियां समाज की ओर से तय किए गए नियमों की निगरानी करेंगी और उन्हें लागू कराने में सहयोग करेंगी।
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अभियान के तहत समाज ने तीन प्रमुख सामाजिक परंपराओं में बदलाव का फैसला लिया है। इनमें मृत्यु भोज पर पूर्ण रोक, दिवंगत व्यक्ति के घर टीका लेने-देने की परंपरा खत्म करना और समारोहों में लड़की वालों की ओर से उपहार बांटने की रस्म पर रोक शामिल है।
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समाज के लोगों के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य परंपराओं का विरोध करना नहीं है। इसके पीछे परिवारों पर बढ़ रहे आर्थिक और सामाजिक दबाव को कम करना है। उनका कहना है कि सामाजिक कार्यक्रम सादगी से हों और परिवार अनावश्यक खर्च से बचें।
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अभियान में गांवों में डीजे पर रोक का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है। बुढवाल और बनिहाड़ी गांव में शुक्रवार से डीजे बंद करने का निर्णय लागू कर दिया गया। अन्य गांवों में भी इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
समाज के सदस्य सतपाल दहिया ने कहा कि समय के साथ सामाजिक परंपराओं में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिखावे पर खर्च करने के बजाय दिवंगत व्यक्ति की याद में बुजुर्गों की सेवा और बच्चों की शिक्षा पर पैसा खर्च किया जाए तो उसका लाभ लंबे समय तक परिवार को मिल सकता है।

फैसलों को प्रभावी बनाने के लिए गठित कमेटियां गांवों में नियमों की निगरानी करेंगी। जरूरत पड़ने पर दूसरी गांव कमेटियों से भी सहयोग लिया जा सकेगा। इस तरह अभियान को केवल बैठकों तक सीमित न रखकर व्यवहार में लागू करने की कोशिश की जा रही है।
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