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जल महल का दीदार करने के लिए चुकाने होंगे 25 रुपये
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नारनौल जलमहल। फाइल फोटो
- फोटो : Narnol
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग सौ प्राचीन धरोहरों में शामिल जल महल को मॉडर्न पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने में जुट गया है। जल महल के संरक्षण के साथ पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। हरियाणा में दूसरे नंबर की इस प्राचीन धरोहर को देखने के लिए लोगों को जल्द 25 रुपये चुकाने होंगे। इसके अलावा जल महल में पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
बता दें कि नारनौल में जल महल शहर से बाहर मोहल्ला पुरानी मंडी के पास स्थित है। इस आलीशान भवन का निर्माण नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने 1590-91 इसवीं में करवाया था। मुख्यद्वार से जल महल तक पहुंचने के लिए सोलह मेहराबों से युक्त एक पुल बनाया गया है। पुल के समाप्त होते ही दो मंजिलें वाले चार कक्षों से घिरे वर्गाकार भवन का निर्माण करवाया गया है। भवन की छत पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। करीब 15 फीट गहरे तालाब के बीच स्थित 500 साल पुराना आलीशान भवन की सुंदरता आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हालांकि जल महल लंबे से उपेक्षा का शिकार रहा है। लेकिन, अब इसकी पुरानी रंगत वापस लाने का काम शुरू हो गया है। इसके बाद जल महल की सफाई के बाद केमिकल कोटिंग कराई गई है। अब टूटे हुए निर्माण को ठीक कराने के साथ अंदर की पेंटिंग को भी पहले जैसा बनाया जाएगा। इसे लेकर पुरातत्व विभाग काम कर रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण सहायक एसडी भट्ट ने बताया कि जल महल की खोई चमक को दोबारा से लाने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय के बाद जल महल में काफी कार्य होंगे। उन्होंने बताया कि एक स्तर का काम पूरा हो चुका है। जल महल के अंदर ही दो डिजाइन है। कुछ प्राचीन डिजाइन टूट चुकी हैं। जल महल के कैंपस में फोकस लाइटें को बेहतर किया जाएगा। जल महल के तालाब की चहारदीवारी जलभराव से दो साल पहले गिर गई थी। इस पर जल्द कार्य शुरू होने वाला है। वर्ष 2018 में जल महल में पानी भरा था। जल महल तक एक विशेष नहर का इंतजाम है। हालांकि पानी से चहारदीवारी गिरने से पानी दोबारा पिछले साल नहीं भरा गया।
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बोटिंग की उपलब्ध होगी सुविधा
जल महल के अंदर जाने के लिए टिकट सिस्टम लागू किया जाना है। इसके लिए पुरातत्व विभाग से दो सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध हो गए हैं। अब टिकट के लिए काउंटर व अन्य इंतजाम किए जाने हैं। सभी इंतजाम होने के बाद टिकट सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके साथ ही जल महल के चारों ओर तार से फेसिंग की जाएगी। दूसरा जल महल कैंपस में एक सेंटर भी बनाने की योजना है। जहां पर पर्यटकों को जल महल के इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी। कैंपस में लोगों के बैठने के लिए बेंच व नोटिस बोर्ड लगाया जाएगा। जल महल में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है। नारनौल के रास्ते राजस्थान के जयपुर व उदयपुर आदि पर्यटन स्थलों पर घूमने वाले वाले विदेशी पर्यटक जल महल को देखने के लिए हर साल आते रहते हैं।
जल महल देखने के लिए टिकट सिस्टम लागू किया जाना है। इसके लिए पुरातत्व विभाग से दो सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध हो गए हैं। अब टिकट के लिए काउंटर व अन्य इंतजाम किए जाने हैं। सभी इंतजाम होने के बाद टिकट सिस्टम लागू किया जाएगा। एक व्यक्ति का 25 रुपये टिकट होगा।
- एसडी भट्ट, संरक्षण सहायक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग।
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बता दें कि नारनौल में जल महल शहर से बाहर मोहल्ला पुरानी मंडी के पास स्थित है। इस आलीशान भवन का निर्माण नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने 1590-91 इसवीं में करवाया था। मुख्यद्वार से जल महल तक पहुंचने के लिए सोलह मेहराबों से युक्त एक पुल बनाया गया है। पुल के समाप्त होते ही दो मंजिलें वाले चार कक्षों से घिरे वर्गाकार भवन का निर्माण करवाया गया है। भवन की छत पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। करीब 15 फीट गहरे तालाब के बीच स्थित 500 साल पुराना आलीशान भवन की सुंदरता आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हालांकि जल महल लंबे से उपेक्षा का शिकार रहा है। लेकिन, अब इसकी पुरानी रंगत वापस लाने का काम शुरू हो गया है। इसके बाद जल महल की सफाई के बाद केमिकल कोटिंग कराई गई है। अब टूटे हुए निर्माण को ठीक कराने के साथ अंदर की पेंटिंग को भी पहले जैसा बनाया जाएगा। इसे लेकर पुरातत्व विभाग काम कर रहा है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण सहायक एसडी भट्ट ने बताया कि जल महल की खोई चमक को दोबारा से लाने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय के बाद जल महल में काफी कार्य होंगे। उन्होंने बताया कि एक स्तर का काम पूरा हो चुका है। जल महल के अंदर ही दो डिजाइन है। कुछ प्राचीन डिजाइन टूट चुकी हैं। जल महल के कैंपस में फोकस लाइटें को बेहतर किया जाएगा। जल महल के तालाब की चहारदीवारी जलभराव से दो साल पहले गिर गई थी। इस पर जल्द कार्य शुरू होने वाला है। वर्ष 2018 में जल महल में पानी भरा था। जल महल तक एक विशेष नहर का इंतजाम है। हालांकि पानी से चहारदीवारी गिरने से पानी दोबारा पिछले साल नहीं भरा गया।
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बोटिंग की उपलब्ध होगी सुविधा
जल महल के अंदर जाने के लिए टिकट सिस्टम लागू किया जाना है। इसके लिए पुरातत्व विभाग से दो सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध हो गए हैं। अब टिकट के लिए काउंटर व अन्य इंतजाम किए जाने हैं। सभी इंतजाम होने के बाद टिकट सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके साथ ही जल महल के चारों ओर तार से फेसिंग की जाएगी। दूसरा जल महल कैंपस में एक सेंटर भी बनाने की योजना है। जहां पर पर्यटकों को जल महल के इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी। कैंपस में लोगों के बैठने के लिए बेंच व नोटिस बोर्ड लगाया जाएगा। जल महल में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है। नारनौल के रास्ते राजस्थान के जयपुर व उदयपुर आदि पर्यटन स्थलों पर घूमने वाले वाले विदेशी पर्यटक जल महल को देखने के लिए हर साल आते रहते हैं।
जल महल देखने के लिए टिकट सिस्टम लागू किया जाना है। इसके लिए पुरातत्व विभाग से दो सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध हो गए हैं। अब टिकट के लिए काउंटर व अन्य इंतजाम किए जाने हैं। सभी इंतजाम होने के बाद टिकट सिस्टम लागू किया जाएगा। एक व्यक्ति का 25 रुपये टिकट होगा।
- एसडी भट्ट, संरक्षण सहायक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग।