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Mahendragarh-Narnaul News: हैफेड जिला प्रबंधक पर गिरी गाज, मंत्री की मांग के बाद डीसी ने एमडी को लिखा कार्रवाई के लिए पत्र
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फोटो नंबर- 30नई अनाज मंडी में बाजरे की तुलाई करते श्रमिक। संवाद
नारनौल। बाजरे की खरीद न किए जाने को लेकर हैफेड के जिला प्रबंधक प्रवीण भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बीते दिन स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने जिला प्रबंधक पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उपायुक्त अनुपमा अंजली ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए हैफेड के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा है।
सरकार की ओर से बाजरे का बाजार भाव 2300 रुपये और भावांतर राशि 600 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, ताकि किसानों को एमएसपी के 2900 रुपये मिल सकें। इधर, कार्रवाई की मांग के बाद भी वीरवार को हैफेड ने बाजरे की खरीद नहीं की।
इसके चलते किसानों ने व्यापारियों की बोली पर जे-फार्म के तहत 2300 से कम भाव पर फसल बेची। खुली मंडी में भाव में 30 से 40 रुपये की बढ़ोतरी हुई और व्यापारियों ने बाजरा 2220 से 2280 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा।
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वीरवार को नारनौल की नई अनाज मंडी में करीब 460 गेटपास जारी हुए और लगभग 12 हजार क्विंटल बाजरे की आवक हुई। गत 8 दिनों में मंडी में करीब 30 हजार क्विंटल बाजरा आया जिसमें से 28 हजार क्विंटल की खरीद व्यापारी जे-फार्म के तहत कर चुके हैं।
हैफेड ने 8 दिनों में की केवल 24 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद
हैफेड को जिले की सभी 6 मंडियों में खरीद के निर्देश दिए गए थे लेकिन खरीद सिर्फ तीन मंडियों में हुई और वह भी कुल 24 मीट्रिक टन। नारनौल में 16.5, अटेली में 5.5 और नांगल चौधरी में 2 मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया। कनीना, सतनाली और महेंद्रगढ़ में आंकड़ा शून्य पर अटका रहा। इसी वजह से खुली मंडी में किसानों को मजबूरन एमएसपी से कम पर बाजरा बेचना पड़ रहा है।
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हैफेड ने कहा कि बाजरे में सिकुड़े व अधपके दाने ज्यादा हैं, इसलिए इलेक्ट्रिक झरने से सफाई के बाद ही खरीद होगी लेकिन झरने से सफाई में मजदूरी ज्यादा लगती है और 2300 रुपये के भाव पर बेचने पर भी एमएसपी का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता।-यादराम, किसान, गांव मारोली
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हैफेड की खरीद न होने और नए नियम लागू होने से खुली मंडी में भी व्यापारी कम भाव दे रहे हैं। दूसरा विकल्प न होने के कारण 2300 से कम भाव पर बाजरा बेचना पड़ रहा है।-रामकिशन, किसान, गांव करोता
वर्जन :
सभी मंडियों में हैफेड के कर्मचारी व अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। निर्धारित मानक पूरे करने पर बाजरे की खरीद की जा रही है।-प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल।
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सरकार की ओर से बाजरे का बाजार भाव 2300 रुपये और भावांतर राशि 600 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, ताकि किसानों को एमएसपी के 2900 रुपये मिल सकें। इधर, कार्रवाई की मांग के बाद भी वीरवार को हैफेड ने बाजरे की खरीद नहीं की।
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इसके चलते किसानों ने व्यापारियों की बोली पर जे-फार्म के तहत 2300 से कम भाव पर फसल बेची। खुली मंडी में भाव में 30 से 40 रुपये की बढ़ोतरी हुई और व्यापारियों ने बाजरा 2220 से 2280 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा।
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वीरवार को नारनौल की नई अनाज मंडी में करीब 460 गेटपास जारी हुए और लगभग 12 हजार क्विंटल बाजरे की आवक हुई। गत 8 दिनों में मंडी में करीब 30 हजार क्विंटल बाजरा आया जिसमें से 28 हजार क्विंटल की खरीद व्यापारी जे-फार्म के तहत कर चुके हैं।
हैफेड ने 8 दिनों में की केवल 24 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद
हैफेड को जिले की सभी 6 मंडियों में खरीद के निर्देश दिए गए थे लेकिन खरीद सिर्फ तीन मंडियों में हुई और वह भी कुल 24 मीट्रिक टन। नारनौल में 16.5, अटेली में 5.5 और नांगल चौधरी में 2 मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया। कनीना, सतनाली और महेंद्रगढ़ में आंकड़ा शून्य पर अटका रहा। इसी वजह से खुली मंडी में किसानों को मजबूरन एमएसपी से कम पर बाजरा बेचना पड़ रहा है।
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हैफेड ने कहा कि बाजरे में सिकुड़े व अधपके दाने ज्यादा हैं, इसलिए इलेक्ट्रिक झरने से सफाई के बाद ही खरीद होगी लेकिन झरने से सफाई में मजदूरी ज्यादा लगती है और 2300 रुपये के भाव पर बेचने पर भी एमएसपी का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता।-यादराम, किसान, गांव मारोली
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हैफेड की खरीद न होने और नए नियम लागू होने से खुली मंडी में भी व्यापारी कम भाव दे रहे हैं। दूसरा विकल्प न होने के कारण 2300 से कम भाव पर बाजरा बेचना पड़ रहा है।-रामकिशन, किसान, गांव करोता
वर्जन :
सभी मंडियों में हैफेड के कर्मचारी व अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। निर्धारित मानक पूरे करने पर बाजरे की खरीद की जा रही है।-प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल।