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फसल कटाई के लिए किसानों को नहीं मिल रहे मजदूर, गेहूं कटाई के लिए एडवांस बुकिंग कर रहे किसान
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सतनाली व आसपास के क्षेत्र में सरसों कटाई का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। वहीं गेहूं कटाई के लिए मजदूरों की समस्या खड़ी हो रही है। किसान भी अपनी गेहूं की फसल कटाई के लिए एडवांश में मजदूरों की बुकिंग कर रहे हैं। अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में गेहूं कटाई का काम शुरू हो जाएगा लेकिन किसानों को अभी से मजदूरों की चिंता सताने लगी है।
इस बार सतनाली क्षेत्र में प्रवासी मजदूर कम पहुंचने के कारण भी अधिकांश किसानों ने परिवार सहित खेतों में सरसों की कटाई पूरी की है। गत वर्ष की तुलना में इस बार मजदूरों की दिहाड़ी व ठेके पर फसल कटाई के रेट भी बढ़ गए हैं। क्षेत्र के कंबाइन संचालकों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए हैं। गांवों में मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर कटाई के अलग-अलग रेट भी मजदूरों द्वारा निर्धारित किए गए हैं।
500 से 800 तक बढ़े कटाई के रेट
किसान रामसिंह, महिपाल, प्रताप सिंह, जीवनराम और राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि फसल कटाई के समय हर बार मजदूरों की आवश्यकता होती है लेकिन इस बार मजदूरों की कमी है। गांवों में पिछले वर्ष प्रति एकड़ कटाई का रेट 2 क्विंटल अनाज था, वहां अब अढ़ाई से तीन क्विंटल तक की मांग हो रही है। पिछले साल कंबाइन से कटाई का रेट 2000 से 2200 रुपये प्रति एकड़ था मगर इस बार यह भी बढ़कर 2500 से 3000 रुपये तक पहुंच गया है। कंबाइन संचालक किशन लाल ने बताया कि पेट्रो पदार्थों की कीमत में वृद्धि के कारण वे रेट बढ़ाने को मजबूर है।
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इस बार सतनाली क्षेत्र में प्रवासी मजदूर कम पहुंचने के कारण भी अधिकांश किसानों ने परिवार सहित खेतों में सरसों की कटाई पूरी की है। गत वर्ष की तुलना में इस बार मजदूरों की दिहाड़ी व ठेके पर फसल कटाई के रेट भी बढ़ गए हैं। क्षेत्र के कंबाइन संचालकों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए हैं। गांवों में मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर कटाई के अलग-अलग रेट भी मजदूरों द्वारा निर्धारित किए गए हैं।
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500 से 800 तक बढ़े कटाई के रेट
किसान रामसिंह, महिपाल, प्रताप सिंह, जीवनराम और राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि फसल कटाई के समय हर बार मजदूरों की आवश्यकता होती है लेकिन इस बार मजदूरों की कमी है। गांवों में पिछले वर्ष प्रति एकड़ कटाई का रेट 2 क्विंटल अनाज था, वहां अब अढ़ाई से तीन क्विंटल तक की मांग हो रही है। पिछले साल कंबाइन से कटाई का रेट 2000 से 2200 रुपये प्रति एकड़ था मगर इस बार यह भी बढ़कर 2500 से 3000 रुपये तक पहुंच गया है। कंबाइन संचालक किशन लाल ने बताया कि पेट्रो पदार्थों की कीमत में वृद्धि के कारण वे रेट बढ़ाने को मजबूर है।
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