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Mahendragarh-Narnaul News: शिवाजी नगर जामा मस्जिद में अदा की गई बकरीद की नमाज
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फोटो नंबर-05नारनौल की जामा मस्जिद में बकरीद की नमाज अदा करने पहुंचे मुस्लिम समुदाय के लोग।
नारनौल। शिवाजी नगर स्थित जामा मस्जिद में वीरवार सुबह बकरीद का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कारी मोहम्मद हनीफ फैजी ने सुबह 8:45 बजे ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज अदा कराई। लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। मौके पर मस्जिद परिसर में सुरक्षा एवं व्यवस्था के भी उचित प्रबंध किए गए थे।
शाही इमाम मोहम्मद हनीफ गौरवाल ने कहा कि बकरीद त्याग, बलिदान और इंसानियत का पर्व है। उन्होंने कहा कि बकरीद की सच्ची खुशी तभी हासिल हो सकती है जब हमारा खालिक हमसे राजी हो। अल्लाह की रजा हासिल करने का सबसे बड़ा तरीका उसकी मखलूक के साथ रहम, प्रेम और भाईचारे का व्यवहार करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एक-दूसरे की गलतियों को माफ करें और आपसी मनमुटाव दूर कर समाज में प्रेम एवं सौहार्द बनाए रखें।
उन्होंने बताया कि इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने सबसे प्रिय पुत्र हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। उनकी इस अटूट आस्था और बलिदान की भावना से खुश होकर अल्लाह ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबा भेज दिया। तभी से बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है।
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शाही इमाम मोहम्मद हनीफ गौरवाल ने कहा कि बकरीद त्याग, बलिदान और इंसानियत का पर्व है। उन्होंने कहा कि बकरीद की सच्ची खुशी तभी हासिल हो सकती है जब हमारा खालिक हमसे राजी हो। अल्लाह की रजा हासिल करने का सबसे बड़ा तरीका उसकी मखलूक के साथ रहम, प्रेम और भाईचारे का व्यवहार करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एक-दूसरे की गलतियों को माफ करें और आपसी मनमुटाव दूर कर समाज में प्रेम एवं सौहार्द बनाए रखें।
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उन्होंने बताया कि इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने सबसे प्रिय पुत्र हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। उनकी इस अटूट आस्था और बलिदान की भावना से खुश होकर अल्लाह ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबा भेज दिया। तभी से बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है।
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